छात्र ने सेना जवानों के लिए ऐसा स्मार्ट जूता तैयार किया, जो बर्फ या मलबे में दबने पर सिग्नल देता है

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smart shoe for army
In Meerut, Uttar Pradesh, the son of a laborer and an engineering student has claimed to have made a smart shoe for army personnel. Photo Credits Jagran.

Meerut: देश की रक्षा के लिए आर्मी के जवान हर मौसम में 24 घंटे और सातों दिन बोडर पर तैनात होते है। तभी देश का नागरिक शांति और अमन के साथ अपने घरों पर रहते है। हर तीज त्यौहार पर लोग अपने अपने घरों पर त्यौहार मनाते है और फौजी भाई देश की सीमा पर खड़े होकर देश की रक्षा करते है।

आर्मी के जवानों का जीवन काफी कठिन होता है, कब उनके साथ क्या हो जाए कोई नही जानता। हर वर्ष कई फौजी अपने देश की रक्षा में शहीद हो जाते है। हर युवा चाहता है की वे भी आर्मी में शामिल होकर देश की रक्षा कर सके। परंतु बॉडर पर खड़े होकर ही देश की सेवा नही होती, बल्कि देश का हर व्यक्ति किसी न किसी चीज से देश की सेवा कर रहा है।

आए दिन देश के जवानों (Army Man) की शहादत की खबर आती है। कई जवान दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो जाते है, तो कई जवान बर्फ और मलबे में दब कर शहीद हो जाते है, वे जिस इलाके पर अपनी ड्यूटी कर रहे होते है, वहा पर बर्फ और बड़े बड़े पहाड़ होते है, जहा भूस्तखलन होना आम बात है, इसलिए एक इंजीनियर ने ऐसे जूतों का अविष्कार किया है, जिससे बर्फ और मलबे में दबे जवानों की रक्षा की जा सकती है, तो आइए जानते है क्या खासियत है उन जूतों को।

उत्तर प्रदेश के इंजीनियर छात्र के द्वारा बनाया गया खास जूता

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य के मेरठ (Meerut) शहर के एक मजदूर का बेटा जो एक इंजीनियरिंग का छात्र (Engineering Student) भी है, उसने सेना के जवानों के लिए एक स्मार्ट जूता (Smart Shoe) बनाये है। उसने इन जूतों की खासियत बताते हुए कहा हैं की यदि कभी कोई जवान भूस्खलन के कारण बर्फ या मलबे की चपटे में आ जाता है।

यह जूता कंट्रोल रूम तक सिग्नल भेजने में सक्षम है, जिससे मौके पर जवान को ढूंढा जा सके और उसकी जान बच सके। यह जूता बिना किसी इंटरनेट कनेक्शन से चलाया जा सकता है। मणिपुर राज्य की भूस्खलन घटना से छात्र को यह आइडिया मिला। इसके बाद करीब एक सप्ताह के भीतर छात्र ने यह स्मार्ट आर्मी जूता बना लिए।

जवानों की मुसीबत की घड़ी में कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगा सिग्नल

यह इंजीनियर विद्यार्थी एमआईईटी इंजीनियरिंग कॉलेज के अटल कम्युनिटी इन्नोवेशन सेंटर में http://B.Tech इलेक्ट्रिकल के फर्स्ट ईयर का विद्यार्थी है, जिसका नाम सुमित कुमार है। सुमित के द्वारा ही सेना के अग्निवीर जवानों के लिए एक स्मार्ट जूता बनाए गया है।

उनका दावा है कि इन जूतो की मदद से जवानों के मुसीबत में फंसने की सूचना कंट्रोल रूम तक आसानी से पहुंच जाएगी। जिससे भूस्खलन या हिमस्खलन से होने वाली दुर्घटनाओं से ग्रसित सेना के जवान बच जाएंगे।

जूते की बनावट का विवरण

सुमित कुमार इस जूते की बनावट के बारे में बताते हुए कहते है कि इस स्मार्ट जूते को दो भाग में बनाया गया है। एक ट्रांसमीटर सेंसर को जूते की सोल में लगाया गया है और दूसरा ट्रांसमीटर रिसीवर अलर्ट सिस्टम में जिसका कनेक्शन सेना के कंट्रोल रूम में होगा।

ट्रांसमीटर सेंसर जूते की मदद से सेना के जवान से जुड़ा रहेगा। वर्तमान में इसकी रेंज वायु में लगभग 100 मीटर है और जमीन के भीतर करीब 3 फीट है। भूस्खलन या हिमस्खलन के समय मलबे या बर्फ से जूतों पर दबाव पड़ेगा और सेंसर एक्टिव हो जाएगा।

सेंसर के सक्रिय होते ही सिग्नल के कारण कंट्रोल रूम में अलार्म बजने लगेगा जिससे सेना के अन्य जवानो को जानकारी मिल जाएगी बचाव दल जल्द ही जवान के दबे होने का स्थान का पता कर लेंगे। किसी दूसरे छोटे रिसीवर को अपने साथ ले जाने पर पास पहुंचते ही अलार्म की ध्वनि तेज हो जाएगी, जिससे बचाव दल का काम और आसान हो जाएगा।

किफायती लागत पर बना जूता

स्मार्ट जूते के निर्माता सुमित मेरठ शहर के खिर्व जलालपुर सरधना के रहने वाले हैं। उनके पिता मजदूरी कर अपने बेटे को पढ़ा रहे है। सुमित बताते है कि उन्हे इन जूतों को बनाने में करीब 15 से 16 हजार रुपए की लागत आई है।

आगे बताते हुए वे कहते है कि यदि इस पर और अच्छे से काम किया गया, तो इन जूतो के निर्माण में इसके मूल्य में कमी आ सकती है। साथ ही सिग्नल की रेंज को भी और बढ़ाया जा सकता है। स्मार्ट जूतों में कुछ सामान जैसे रेडियो ट्रांसमीटर रिसिवर, चार्जेबल बैटरी, हैंड रोटेड चार्जिंग, अलार्म और प्रेसर सेंसर आदि चीजों का उपयोग किया गया है।

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