नंगे पांव स्कूल जाते हुए जिस कार को देखते थे, आज उसी कंपनी में बने सॉफ्टवेयर इंजीनियर

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Bhavesh Lohar Ford Job
Domestic Worker's Son Bhavesh Lohar Becomes Engineer at Ford. How a domestic worker’s son kept his promise and became an engineer at Ford. As a child, Bhavesh Lohar had to work really hard for his education.

File Photo

Bhopal: कामयाब होने का सपना तो बहुत लोग देखते हैं, लेकिन उसको पूरा करने के लिए हर किसी के पास संसाधन नहीं होता हैं। ऐसी कठिन परिस्थितियों में कुछ लोग टूट जाते हैं, अपने सपनो से पीछे हट जाते है। उनमें कई अभ्यर्थि ऐसे भी होते है, जो अपनी मंजिल पाने के लिए कभी परिस्थिति का रोना नही रोते। सपने हर कोई देखता है, पूरा करने के लिए कोशिश हर कोई नहीं करता।

कहते हैं कि जागकर सपने देखने वालों के ही सपने पूरे होते हैं। पर एक लड़का है जिसने जो सोचा वो कर दिखाया, उसने वो कर दिया जिसके बारे में जानकर लोग प्रेरित हो रहे हैं। यह कहानी (Story) राजस्थान (Rajasthan) के उदयपुर (Udaipur) में रहने वाले भावेश लोहार (Bhavesh Lohar) की है। वह जब छोटे थे, तो हर रोज़ तपती गर्मी में हाईवे पर नंगे पांव चला करते थे। उस दौरान भावेश, अपने दोस्तों से बात करते थे कि एक दिन जब वह कुछ बड़ा कर लेंगे, तो कौन सी कार खरीदेंगे। एक बार जब उन्होंने एक स्थानीय समाचार पत्र में फोर्ड (Ford) फिगो का विज्ञापन देखा, तो देखते ही उन्हें उस गाड़ी से प्यार हो गया।

कौन है भावेश

उदयपुर के भावेश लोहार (Bhavesh Lohar From Udaipur) ने भी ये कमाल कर दिखाया है। भावेश लोहार ने अपने सपनों की नौकरी (Dream Job) पाने के लिए सभी बाधाओं को तोड़ दिया और आज कार बनाने वाली फोर्ड कंपनी में इंजीनियर (Engineer In Ford Company) बन गए हैं। भावेश लोहार को इस मुकाम पर पहुंचाने में उनकी मां का सबसे बड़ा त्‍याग हैं। इस मुकाम को हासिल करने में उनका माँ का योगदान है। माँ ने मजदूरी करके पढ़ाया, हर खुशी को कुर्बान करके शिक्षा को महत्व दिया। वर्षों से लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा और बरतन माज कर उन्‍होंने अपने बेटे को पढ़ाया।

माँ ने लोगो के जूठे बरतन माँजकर पढ़ाया

भावेश लोहार उदयपुर के रहने वाले हैं। उनकी मां लोगों के घरों में काम करती हैं। उनकी माँ दूसरों के घर में जाकर बर्तन और कपड़े धोने का काम किया करती थी। क्योंकि उनके पिता की कमाई का अधिकांश हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता था। उन्होंने लिंक्डन पर अपनी सक्सेस स्टोरी शेयर की, जो Viral हो रही है।

इसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने सारी रुकावटों को पार किया, कभी हार नही मानी, हमेशा आगे बढ़ने के लिए कदम बढ़ाया, सपनो को पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत की, परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नही थी कि अच्छी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर पाते लेकिन अंदर जज्बा कम नही हुआ, परिस्थिति का डटकर मुकाबला किया।

आगे वो बताते है कि वो अपनी बड़ी बहनों के भी बहुत शुक्र गुजार है, जिन्होंने अपने सपने को दबा कर घर खर्च चलाने में माँ की सहायता की और आज पुरे परिवार की मेहनत के दम पर वो फोर्ड कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन चुके है। दुनिया की जानी-मानी फोर्ड मोटर कंपनी (Ford Motor Company) में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर (Software Engineer) जॉब करने लगे।

स्कूल नंगे पैर जाते थे

भावेश ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुऐ बताया कि मुझे आज भी वो दिन याद हैं जब हाइवे पर हम नंगे पर लू के बीच में सरकारी स्कूल जाते थे। मैं और मेरे दोस्त फ्यूचर की कारों के बारे में बातचीत करते थे। और यह कहते थे कि एक दिन बड़ा आदमी बनने पर यह कार खरीदेंगे। उन दिनों मुझे फोर्ड फीगो से बड़ा प्यार था। मैने उसकी फोटो अखबार में देखी थी, तभी मन मे विचार बना लिया था पैसा आने पर मैं उसे खरीदूंगा।

छोड़ना पड़ा था हॉस्टल

मैने अपनी पढ़ाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी भोपाल (Bhopal) में की। वहां का रूम उन्हें छोड़ना पड़ा, क्योंकि वो आपदा के दौरान अपने परिवार के अन्य सात सदस्यों के साथ एक 6 बाय 6 के कमरे में रहते थे। हमारे पास एक ही कमरा था, इसमें ही मैंने अपने पढ़ने और इंटरव्यू देने के लिए एक अलग सा कोना बना लिया था, जिसमे में अपनी पढ़ाई कर सकूं। मैं काफी किस्मत वाला हूं कि मैंने कई बड़ी कंपनियों का इंटरव्यू इसी कमरे से दिया और मैं फोर्ड में चयन हो गया।

बड़ी बहन ने बढ़ाया हौसला

उनकी हर कठिन परिस्थिति में उनकी बहन ने साथ दिया, जब भी कभी हिम्मत काम हुई तो बहन ने ढाल बनकर उसमे मजबूती डाली। परिस्थिति को देखकर कभी अपने सपनो से पीछे नही हटा, केवल निगाहे मंजिल की ओर थी। उन्होंने अपनी बड़ी बहन और मां को अपनी इस सफलता का श्रेय दिया। उनकी मां लोगों के घरों में काम करती हैं।

उन्होंने बताया कि उनके पिता महीने में 7000 रुपये तक कमाते थे, लेकिन उन पेसो से परिवार की जरूरत ही पूरी हो पाती थी। इसीलिए कर्ज उतारने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों को भी नौकरी करनी पड़ी। उनका कहना है कि अपना काम ईमानदारी से करते रहो, सकारात्मक सोचते रहो जरूर भगवान ने आपके लिए कुछ अच्छा सोच रखा है।

बचपन का सपना किया साकार

राजस्थान के उदयपुर में रहने वाले भावेश लोहार ने अपनी सच्ची कहानी सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा कि, मुझे वो दिन आज भी याद है, जब भीषण गर्मी में नंगे पाँव चलकर कर हम स्कूल जाया करते थे। में और मेरे दोस्त इस बारे में बहुत चर्चा किया करते थे, कि हम बड़े होकर कौन सी कार खरीदेंगे।

हम दोस्तो के बीच हमेशा कार को लेकर चर्चा होती रहती थी। उन दिनों मुझे फोर्ड फिगो से बड़ा प्यार था। में जब भी उसको देखता मेरे मन में एक ही विचार आता कि कब इतना पैसा आएगा जिससे ये कार खरीद सकूँगा। परिवार की स्थिति को देखते थे तो ये एक सपना ही लगता था। में हमेशा से इस कार को खरीदना चाहता था जिसका सपना मन मे देखा करता था।

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