Delhi: 2019 में नरेंद्र मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने के बाद लोगो को सबसे अधिक उम्मीद यही थी कि वह सेना की हर वो आवश्यकता ओ की पूर्ति कर जिसकी उनको जरूरत है। दोबारा सरकार बनने के बाद 50 दिनों में ही प्रधानमंत्री लोगो की उम्मीद पर खरे उतरते हुए नजर आ रहे है।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक अपने पुनः कार्यकाल के पहले 50 दिनों में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय सेना और वायु सेना के लिए मिसाइलों और हथियार प्रणालियों पर तकरीबन 8,500 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं।
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक भारतीय वायु सेना ने स्पाइस-2000, स्ट्रम के अधिक तादात में मिसाइलों की खरीद में लगभग 8,000 करोड़ रुपये निवेश कर दिए हैं। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सरकार के फिर से गठन होने के बाद 2019 के चुनाव समाप्त होने से पहले कुछ योजना प्रारम्भ की गई थीं।
पुलवामा हमले के बाद, केंद्र सरकार ने पाकिस्तान की सीमाओं की सुरक्षा के लिए जो भी उपकरण की जरूरत थी, उसे खरीदने के लिए तीन सेवाओं के लिए तत्काल अधिकार दिए थे। जिसके अंतर्गत सुरक्षा बल 300 करोड़ रुपये तक प्रति मामले की लागत पर तीन महीने के अंदर अपनी चॉइस के उपकरण खरीद सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पुलवामा हमले के बाद कुछ ही सप्ताह में सैन्य बलों को आपातकालीन अधिकार प्रदान किये गए थे।जिसमें CRPF के 44 जवान मौत के घाट उतारे गए थे और भारत ने अपने 44 सैनिक जवान खो दिए थे। भारत ने पाकिस्तान के साथ सीमाओं पर निगरानी बढ़ानी प्रारम्भ कर दी थी।
खबरो के मुताबिक सेवाओं को प्रदान की गई शक्तियों के अंतर्गत भारतीय वायुसेना ने रूस से कई पुर्जों के साथ-साथ Spice -2000 स्टैंड-ऑफ हथियार प्रणाली का अधिग्रहण किया है। विजुअल रेंज Contract से परे पाकिस्तानी फाइटर जेट्स की रेंज को तत्काल मैच करने के लिए हवा से हवा में मिसाइल बनाने के लिए रूस के साथ कई Contract साइन किए गए हैं।



