
Baster: देश में अभी भी कई जगह बहुत पिछड़ी हुई है। जहाँ बेहद ही सामान्य और जरुरी चीज़े भी नहीं पहुँच पाई है। चंपा छत्तीसगढ़ के एक ऐसे स्थान की रहने वाली हैं, जो पिछले कई सालों से नक्सलवाद की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। चंपा बस्तर के मुरकुच्ची गांव की निवासी हैं। वह पढ़ी-लिखी भी नहीं हैं। वे अपने 2 बच्चों का लालन पालन करने के लिए खेती करती हैं। यहाँ खेती ही जीवन यापन का एक जरिया है।
एक समय था, जब उन्हें अपने बच्चों के लिए एक वक़्त का भोजन अरेंज करना भी मुश्किल था। अनपढ़ और आदिवासी क्षेत्र की होने के कारण कुछ लोग उन्हें ठग भी लेते थे। फिर कुछ ऐसा हुआ की आज उनकी खेती से होने वाली कहमे कई गुना बढ़ गई है और उनका घर भी अच्छे से चलने लगा है।
इस क्षेत्र में मक्का, चना, गेहूं, ज्वार, सरसों और अन्न फसलों की खेती होती है। इससे पहले इन्हे लिखा पढ़ी और नाप-तौल का कोई ज्ञान नहीं था। यहाँ कहीं पास में अच्छा बाजार भी उपलब्ध नहीं था।
ऐसे में अपनी फसल का ना तो सही दाम मिल पता और ना ही वे इसे कही और बेच पाती थी। कुछ दलाल इस परिस्थिति का फायदा उठा ले रहे थे। फिर वे तीन साल से ‘भूमगादी महिला कृषक’ संघ से जुड़ी। अब इन्हे सही जानकारी के साथ ही साथ अच्छा बाजार भी भी मिल गया है।
उन्होंने शहर से आये एक पत्रकार को बताया की इससे पहले वे प्रति माह महीने बड़ी मुश्किल से 3000-4000 रुपये कमा पाती थी, वहीं अब 9000-10000 रुपये की कमाई हर महीने होने लगी है। पहले इन्हे अपनी फसल और अनाज बेचने के बाद, उसकी बिकवाली के पैसों के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। परन्तु, अब अनाज बिकने से पहले ही उन्हें पेमेंट की जा रही है।
एक इंजीनियर की कोशिश रंग लाई
चंपा जैसी छत्तीसगढ़ की 6000 से अधिक आदिवासी महिला किसानों के जीवन में यह ख़ुशी एक शख्स के प्रयासों से आई है। 31 वर्षीय दीना नाथ राजपूत (Deena Nath Rajput) के प्रयासों से इस महिलाओं के अँधेरे जीवन में खुशियों का उजाला आया है।
दीना नाथ राजपूत, भिलाई के एक कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन ब्रांच से इंजीनियरिंग की पढाई करने के बाद, बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में जॉब कर रहे थे। अपना IT जॉब करते हुए भी उनका मन तो समाजसेवा करने का था।
भूमगादी महिला कृषक नाम के एक NGO शुरू की
ऐसे में उन्होंने (Deenanath Rajput) अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ कर कुछ अलग करने का मन बना लिया और मार्च 2018 में ‘भूमगादी महिला कृषक’ नाम के एक NGO की शुरुआत कर दी।
उन्होंने एक अख़बार को बताया था की वे सोशल सर्विस में काम करना चाहते थे, लेकिन परिवार के दबाव में, उन्होंने इंजीनयरिंग पूरी कर ली। फिर साल 2013 में उन्हें बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी मिली और वे वही जॉज करने लगे। वहां नौकरी वे बेमन से कर रहे थे। उन्होंने वह जॉब केवल तीन महीने में ही छोड़ दी। वे वापस अपने शहर बस्तर आ गये और सिविल सर्विसेज के एग्जाम की तैयारी करने लगे थे।
उन्होंने लगातार 2 सालों तक सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी की और एग्जाम क्लियर करते हुए इंटरव्यू राउंड तक भी गए, लेकिन उन्हें सफलता हासिल नहीं हो पाई। उसके बाद साल 2016 में उन्होंने सोशल वर्क में मास्टर्स करने के लिए एडमिशन ले लिया और इसी दौरान, उन्हें मुंगेली जिले में स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) के तहत काम करने का अवसर प्राप्त हुआ।
जिला पंचायत ने ‘सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी’ का पुरस्कार दिया
फिर साल 2018 में मुंगेली को छत्तीसगढ़ का पहला खुले में शौच मुक्त जिला घोषित किया गया। इस कामयाबी को हासिल करने के बाद, जिला प्रशासन को पुरस्कार के रूप में एक करोड़ रुपए मिले और दीना नाथ को जिला पंचायत ने ‘सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी’ का पुरस्कार दिया। इस पुरस्कार को हासिल करने के बाद, दीना नाथ को प्रेरणा मिली और उन्हें एहसास हुआ कि उन्हें लोगों की सेवा करने के लिए इसी राह पर चलना है।
दीना नाथ बस्तर में ही बड़े हुए थे और यहां के लोगों जीवन सैली से परिचित थे। उस क्षेत्र में नक्सलवाद चरम पर होने के चलते सभी लोग भय में रहते थे। फिर लगभग 3 सालों तक सरकारी परियोजनाओं के साथ काम करने के बाद उन्हें इस बात का अहसास हुआ की उन्हें करीब किसानो के लिए कुछ करना होगा, जिससे उनका स्तर सुधरे।
भूमगादी का मतलब जमीन से जुड़े लोग
फिर उन्होंने 2018 में ‘भूमगादी महिला कृषक’ (Bhumgadi Mahila Krushak) नाम से एक एफपीओ (Farmer Producer Organisation) की शुरुआत की उन्होंने भूमगादी वर्ड को इसलिए लिया, जिससे स्थानीय लोगों को इससे अपनापन फील हो। भूमगादी का मतलब जमीन पर उगने वाली चीजें और उससे जुड़े लोगो से होता है।
दीना नाथ ने शुरुआत में केवल 337 महिलाओं को जोड़ा और समय के साथ और भी ज्यादा महिलाये जोड़ती गई। उन्होंने एक अख़बार को बताया की जान उन्होंने बस्तर में अपने एफपीओ की शुरुआत की, तो लोग उनपर भरोसा नहीं कर पा रहे थे। लेकिन वे काम करते रहे और लोग देखते रहे।
दीना नाथ के साथ अब 6100 से अधिक महिलाएं जुड़ी
अब दीना नाथ के साथ बस्तर के साथ ही साथ, नारायणपुर और कांकेर से 6100 से अधिक महिलाएं जुड़ गई हैं। ये महिलाएं ऑर्गेनिक केला, पपीता, उड़द, रेड राइस, गेहूं, ब्लैक राइस, मक्का और अन्न फसल उगाती है और आमचूर, इमली, टोमेटो सॉस जैसे कई उत्पाद बनाकर उनका छोटा बिज़नेस करती हैं। इससे उस सभी का जीवन स्तर काफी सुधर रहा है।
Bastar bhumgadi mahila fpo corona fight and help all.pepole pic.twitter.com/aDVTBG7Daw
— Bastar Bhumgadi Mahila Krushak FPO (@bhumgadi) May 24, 2020
आज उनके तैयार किये गए उत्पाद रायपुर, विशाखापट्टनम, हैदराबाद, दिल्ली जैसे कई शहरों में जा रहे हैं। अब उनके बनाये गए उत्पाद सुपरमार्केट में बिकने लगे हैं। अब ‘भूमगादी महिला कृषक’ कंपनी (Bhumgadi FPO) के कुल मुनाफे में उन महिलाओ की 30 फीसदी की भागीदारी भी है।
Have you ever heard about Roselle drink? Had one refreshing Roselle drink in Dhantewada, Chhattisgarh. Thanks to Akash, ex PMRDF fellow from Bhumgadi FPO. who curated this drink. Add one tea spoon of Roselle powder in water, either with sugar/ jaggery, topped with roasted jeera pic.twitter.com/5tNToP5erV
— Shouvik Mitra (@MitraPradan) December 18, 2019
दीना नाथ ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए जगदलपुर में ‘बस्तर कैफे’ (Baster Cafe) की शुरुआत की है। इसमें लोग स्थानीय कॉफी से लेकर कई अन्य आदिवासी खाने और अनेक डिश का स्वाद भी ले सकते हैं। स्थानीय लोगो का ऐसा कहना है की आने वाले समय में वे ई-रिक्शा के माध्यम से ग्राहकों को होम डिलीवरी की सर्विस भी देने वाले हैं।



