
Delhi: गाँव के लोग आज भी बेटी को बोझ मानते है, लेकिन उनको ये समझ नही की बेटी अधिशाप नही वरदान होती है। माता पिता के सिर का ताज होती है। बेटे होना भाग्य की बात है, लेकिन बेटी तो सौभाग्य से ही मिलती है। कई गांव में आज भी रूढ़िवादी सोच बरकरार है। लड़की बोझ है उन्होंने जन्म से पहले ही खत्म कर दो। बेटियों को पढ़ाया नही जाता है।
आज के युग मे बेटी बेटो से कम नही है। हर क्षेत्र में बेटी ने अपनी जीत का परचम लहराया हुआ है। लड़को के कदम से कदम मिलाकर चलती है आज की बेटी। बेटी आज माता पिता के लिए किसी वरदान से कम नही है। बेटियों के सपनों को जब उड़ान मिल जाती है, तब वह इस बदलते समाज की सोच बन जाती है।
आज हम आपको एक एसे पिता के विषय में बताने जा रहे हैं, जिनकी तीन बेटिया है और उन्हें उन तीनों पर गर्व है। चंद्रसेन सागर (Chandrasen Sagar) बरेली के पूर्व ब्लाक प्रमुख हैं। उनकी पत्नी का नाम मीना सागर (Meena Sagar) है। उनकी तीन बेटियां है, अर्पित (Arpit Sagar) अर्जित (Arjit Sagar) और आकृत (Aakrit Sagar) तीनों ही आईएस (IAS) के पद पर तेनात हैं।
चंद्रसेन सागर एक राजनेता हैं और उनका प्रयास रहता है की कभी किसी को आहात मत करो क्योंकि अच्छे कर्मों का फल सदेव अच्छा ही होता है। उनके अच्छे कर्मों का ही फल ही था उनकी बेटी आज सरकारी नोकरी कर देश की सेवा में लगी हुई है। शायद उन्हीं के अच्छे कर्मों का फल उनकी बेटियों को मिल रहा है।
Celebrating the #75thIndependenceDay 🇮🇳@DMCentralDelhi pic.twitter.com/W5ZZRDM3Sn
— Akriti sagar (@AkritisagarIAS) August 15, 2021
तीनों बेटियों की शिक्षा की सबसे अधिक फिक्र उनकी माँ को ही हुआ करती थी। माँ तीनों बेटियों की परीक्षा की तैयारियों के दौरान उनके साथ रहती है, ताकि उनके अध्ययन के समय उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या का सामना ना करना पड़े और किसी भी तरह से उनकी पढ़ाई में कई भी रुकावट ना आने पाए। हमेशा उनकी परछाई बनकर उनका साथ देती। कभी भी उनके होसलो को कम नही होने दिया। हमेशा उनके होसलो को बढ़ाया है।
सफलता का श्रेय दिया माता को
चंद्रसेन सागर जी के घर में उनकी पत्नी मीना सागर ने अपनी सभी बेटियों का ध्यान बहुत अच्छे तरीके से रखा। हर खुशी देने की पूरी कोशिश की। वह हमेशा अपने बेटियों की सहायता का हर संभव प्रयास करती है और तीनों बेटियों को आईएएस (Three IAS Daughters) बनाने में मीना सागर की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
पिता चंद्रसेन ने भी कभी अपनी बच्चियों पर सपनों का भार नहीं डाला, उन्होंने ने कभी भी अपनी इच्छाओं को अपनी बेटियों पर नहीं डाला उन्हें किसी भी क्षेत्र को चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता थी। चंद्रसेन जी के अनुसार उनकी बेटियों ने वही किया जो वह करना चाहती थी।
बेटियों को समझते थे बोझ उनको दिया करारा जबाब
भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि समाज में वास्तव में बेटियों को लेकर धरना अच्छी नहीं रही लगातार बेटियां होने पर कुछ लोग अबॉर्शन कराने का सुझाव दिया पहले के वक़्त में अल्ट्रासाउंड कराने पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं था, लेकिन हम लोग किसी के झांसे में नहीं आए और दोनों पति और पत्नी ने विचार किया कि बेटा हो या बेटी इसमें कोई भेदभाव नहीं करेंगे। आज के समय में चंद्रसेन एक नेता के नहीं ब्लकि तीन आईएएस बेटियों के पिता के रूप में जाने जाते हैं। बेटियां कभी बोझ नही होती है।



