
Prayagraj: पीएससी याने पब्लिक सर्विस कमीशन की तरफ से हर वर्ष परीक्षा आयोजित की जाती है जिसमें लाखों युवा इस परीक्षा में बैठते हैं। आपको बता दें पीएससी की परीक्षा फिर चाहे वह यूपीएससी हो या फिर स्टेट पीएससी दोनों ही काफी कठिन परीक्षा मानी जाती है।
इन परीक्षा को पास करने के लिए तीन चरण निर्धारित किए गए हैं, जिसमें पहले चरण में प्रारंभिक परीक्षा आती है, दूसरे चरण में मुख्य परीक्षा तीसरे चरण में साक्षात्कार यदि उम्मीदवार एक भी चरण में फेल हो जाता है तो उसे दोबारा पहले चरण से ही शुरुआत करनी पड़ती है।
इस परीक्षा में उम्मीदवार एक नहीं दो नहीं बल्कि तीन तीन बार फेल होते हैं और उसके बाद लगातार प्रयास करते हुए इस परीक्षा में सफलता पाने की दौड़ में होते हैं। वर्तमान में युवाओं के अंदर सिविल सर्विसेज के प्रति काफी ज्यादा उत्साह देखा है। 100 में से 80 युवा सिविल सर्विसेज (Civil Service) में जाना चाहता है। इसीलिए इस परीक्षा में प्रतियोगिता भी काफी ज्यादा बढ़ जाती है।
भाई बहन की सफलता की कहानी
हर वर्ष पीएससी की परीक्षा (PSC Exam) पब्लिक सर्विस कमीशन की तरफ से आयोजित होती है और रिजल्ट आने पर कई ऐसे उम्मीदवार के सफल होने की कहानी सामने आती है जो अगले उम्मीदवार को प्रेरित करने के लिए काफी अच्छी होती।
हर वर्ष युवाओं के सफलता की कहानियां सामने आती है, आज हमें ऐसे ही भाई बहन की सफलता की कहानी के विषय में बात करेंगे, जिसमें एक साथ दोनों भाई बहन ने यूपीपीएससी की परीक्षा (UP-PSC Exam) पास कर ली। जाने एक ही घर से दो डिप्टी कमिश्नर निकल आए। यह मामला वर्ष 2021 का है जब उत्तर प्रदेश पीएससी परीक्षा आयोजित हुई और उसका रिजल्ट घोषित हुआ।
यह परीक्षा 29 सर्विस के लिए 678 पद की भर्ती की घोषणा की गई, इसमें से लगभग 627 उम्मीदवारों का चयन हुआ। इनमें से दो भाई बहनों ने तो कमाल ही कर दिया। प्रयागराज (Prayagraj) के रहने वाले विवेक और संध्या (Vivek And Sandhya) ने यूपीपीएससी वर्ष 2021 की परीक्षा में टॉप रैंक हासिल की। आठवीं रैंक पर विवेक है तो 12 वीं रैंक पर संध्या आई।
बिना कोचिंग के पाई टॉप रैंक
अक्सर लोग पीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली को चुनते हैं। का मानना है कि पीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली में बेस्ट फैकेल्टी है, जो विद्यार्थियों का अच्छी तरह से मार्गदर्शन करते हैं। परंतु प्रयागराज के भाई बहनों ने बिना किसी कोचिंग के इस परीक्षा को अच्छी रैंक से पास किया है।
बताया जा रहा है कि दोनों भाई बहन ग्रामीण एरिया के मेजा के तेंदुआ कलां गांव के निवासी है। इस समय दोनों भाई-बहन डिप्टी कलेक्टर (Deputy Collector) के पद पर कार्यरत हैं। बताया जा रहा है कि विवेक को तीसरे प्रयास में यह कामयाबी मिली वही विवेक की बहन संध्या को पहले ही प्रयास में यह कामयाबी मिल गई। भाई-बहन की सफलता की सबसे खास बात यह है कि ग्रामीण इलाके से होने के कारण दोनों भाई बहनों को कहीं कोचिंग करने का मौका नहीं मिला उन्होंने सेल्फ स्टडी से यह मुकाम हासिल किया है।
बच्चों की सफलता पर है माता-पिता बेहद खुश
एक रिपोर्ट के मुताबिक संध्या और विवेक के माता पिता गांव में ही रहकर प्राइवेट स्कूल के संचालक थे। उन्होंने गांव के बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया हुआ है। जब विवेक और संध्या को सफलता मिली तो उनके माता-पिता हर्ष से उल्लास नजर आए। पिता कृष्ण कुमार सिंह ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि उन्होंने अपने बच्चों के लिए डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना ही देखा था जो आज सच हो गया है।
वही विवेक और संध्या की मां प्रतिमा सिंह का कहना है कि तीन बेटियां हैं और एक बेटा उन्होंने कभी बेटा बेटी में फर्क नहीं किया वह हमेशा से चाहती थी कि उनके बच्चे सफलता की सीढ़िया चढ़े। उन्होंने अपने सभी बच्चों को एक समान प्रेरित किया और आज उनके दो बच्चों ने उनका नाम रोशन कर दिया।
संध्या और विवेक का इंटरव्यू
संध्या बताती हैं कि उन्होंने अपनी पढ़ाई को काफी अच्छे तरीके से किया। उन्हें बचपन से ही अपने माता-पिता का पढ़ाई के प्रति काफी अच्छा सपोर्ट मिला। आज वह अपने पिता का सपना पूरा करके बेहद खुश हैं और वह कहती हैं कि अब उनका फर्ज होगा समाज की सेवा करना सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को सुचारू ढंग से चलाना उनका कर्तव्य होगा। खासतौर पर भी बालिकाओं के लिए और उनकी शिक्षा के लिए काम करना चाहती हैं।
दूसरी तरफ विवेक का कहना है कि आज मैं जो कुछ भी बन पाए हैं, वह अपनी माता पिता बहन और मामा के कारण ही बन पाए हैं। माता पिता बहन और मामा ने कवि गुरु बन के शिक्षा दी तो कभी बड़े बनकर समझाया।
उनका कहना है कि उन्होंने अपने जीवन का 50 प्रतिशत हिस्सा इस गांव में बिताया है, इसीलिए वे गांव के लोगों के लिए कार्य करना चाहते हैं। विवेक बताते हैं कि वे दोनों भाई-बहन (Brother-Sister) एक दूसरे के मोटीवेटर थे। समय पर वे एक दूसरे को मोटिवेट करते और एक दूसरे को पढ़ाया करते थे जिससे उनका रिवीजन होता था और वह अपने इस परीक्षा के लिए और ज्यादा मजबूत होते थे।



