
Chhipa Barod: वर्तमान समय में युवा सोचता है कि खूब पढ़ लिखकर वह सरकारी नौकरी हासिल कर लेंगे और उनका जीवन बढ़िया से चलने लगेगा, परंतु दोस्तों आज के समय में सरकार हर युवा को सरकारी नौकरी नहीं दे सकती। सरकार ने कई सरकारी सेक्टरों को निजी सेक्टर घोषित कर दिया है ऐसे में सरकारी नौकरी और ज्यादा घट गई है।
ऐसे में युवा करें तो क्या करें। भारत सरकार के द्वारा महामारी के समय आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया गया था जिस पर काफी युवाओं ने अमल भी किया है। सरकारी नौकरी वाले परिवार सोचते हैं, कि उनका बच्चा सरकारी नौकरी प्राप्त करके एक सफल जीवन चाहिए था।
आपको बता दें पैसा कमाने का सही विकल्प व्यापार है। आज हम इस लेख के माध्यम से एक ऐसे शख्स की बात करेंगे जिसने एक नहीं बल्कि तीन-तीन सरकारी नौकरियों को ठुकरा कर खेती को अपनाया। आज यही युवक खेती करके लाखों रुपए कमा रहा है आइए जाने विस्तार से।
इजरायल की पद्धति में खेती करने वाले पहले किसान
राजस्थान (Rajasthan) के बारां जिले के अंतर्गत आने वाला छीपाबड़ौद (Chhipa Barod) क्षेत्र के एक युवक जिनका नाम धनराज लववंशी है। धनराज वर्तमान समय में खेती किसानी कर रहे हैं खेती किसानी के लिए उन्होंने 3 नौकरियों को भी ठुकरा दिया और वह काम कर रहे हैं जो मौसम के ऊपर निर्भर है और हमेशा एक घाटे का सौदा माना जाता है। परंतु इस युवक ने खेती को अच्छी तरह से समझा है और उसकी पद्धति को सीखा है इसीलिए आज धनराज खेती के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा लाभ कमा रहे हैं।

धनराज (Dhanraj) बताते हैं कि इजरायल पद्धति से मल्टीक्रॉप हार्वेस्टिंग फॉर्मूला पर काम करने वाले वे राजस्थान के पहले किसान है। पहले उन्होंने इस फार्मूला को सीखा है उसके बाद खुद अपनाया है। उनका कहना है कि वह नौकरी से अच्छा मुनाफा खेती में कम आ रहे हैं।
नौकरी छोड़ने पर अपनों से ताने भी सुने
29 वर्षीय धनराज लववंशी नौकरी पाने के मामले में बेहद भाग्यशाली हैं। एक नहीं बल्कि तीन-तीन नौकरियां मिली परंतु उन्हें नौकरियां पसंद नहीं आई। प्रकृति प्रेमी थे इसीलिए प्रकृति से जुड़े रहना चाहते थे। बताया जा रहा है कि वर्ष 2019 तक उन्हें अकलेरा कोर्ट में क्लार्क की नौकरी की।
उसके बाद उन्हें दोबारा तहसील में क्लर्क की नौकरी मिल गई। उनकी भाग्य ने तीसरी बार भी उनका साथ दिया और वे उसी वर्ष थर्ड ग्रेड टीचर के लिए चयनित हो गए। परंतु में नौकरी नहीं करना चाहते थे। खेती किसानी करके लोगों की भ्रांतियां तोड़ना चाहते थे।
परिजनों ने उनका नौकरी छोड़ने पर काफी विरोध भी किया घर वालों ने तो ताने मारने भी शुरू कर दिए थे परंतु इससे उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ा और वे अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ने लगे। उन्होंने खेती करने के लिए कई सारी पद्धतियों पर अध्ययन किया उन्हें सीखने के लिए वे अपने शहर से दूसरे शहर भी गए।
इन जगहों से सीखी खेती
सबसे पहले वे महत्मा फुले कृषि विद्यापीठ, रूहोरी, महाराष्ट्र गए जहा उन्होंने खेती की कई अलग अलग पद्धति के बारे में सीखा। खेती से जुड़ी बारीक से बारीक चीजों को भी उन्होंने इसी विद्यापीठ से सीखा। इजरायल पद्धति पर खेती में मल्टीक्रॉप फार्मूले पर गहन अध्ययन किया साथ ही अलग जगह जाकर फसलों से जुड़ी अच्छी और बुरी बातों को जानकर वह अपने घर लौट आए।
इसके बाद अपने ही गांव में उन्होंने सिकमी जमीन लेकर खेती प्रारंभ की। धनराज ने सबसे पहले सोयाबीन की खेती की जिसमें उन्हें 42 लाख रुपए की फसल प्राप्त हुई। 45 बीघा जमीन पर उन्हें 4 लाख रुपया की खपत हुई। बाकी उन्हें 3800000 रुपए का मुनाफा हुआ।

धनराज ने अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक फसल पर भी काम करना शुरू किया है। वे मौसमी सब्जियां भी गा रहे हैं जिसमे मिर्ची, टमाटर, बैंगन, भिंडी, करेला, गिलकी, लोकी, तरबूज, खरबूजा और गेंदा फूल की फसलें शामिल है। इस बार में मौसमी सब्जियों से करीब 1 करोड़ रुपए कमा सकते हैं।
40 से ज्यादा महिला और पुरुष को मिला रोजगार
धनराज लववंशी की खेती से 40 से अधिक महिला पुरुष को रोजगार मिला है। खेतों में काम करने वाले कारीगर लोगों के लिए फसल से जुड़े काफी सारे काम होते हैं जैसे फसल लगाने से पहले जमीन की तैयारी, फसल की देखभाल और पशु पक्षियों से बचाने के लिए तरह-तरह के उपाय, कीटनाशक का छिड़काव, अनचाहे पौधों को फसल से हटाना और नर्सरी से प्राप्त पौधों का रोपण करना।
मल्टीक्रॉप हार्वेस्टिंग टेक्नोलॉजी के माध्यम से खेती करने के लिए सबसे जरूरी होता है, पानी की सिंचाई। इसके लिए धनराज बताते हैं कि वे अपने खेतों में वॉटर डिपिंग पद्धति से सिंचाई करते हैं जिससे 45 बीघा जमीन पर 1 दिन में सिंचाई हो जाती है और पानी की बचत भी होती है। धनराज लववंशी न केवल खेती करते हैं साथ ही साथ पशुपालन भी कर रहे हैं, जिससे उन से प्राप्त दूध को बेचकर वह अपनी खेती को और ज्यादा मजबूत बना रहे।



