भाजपा का ऐलान: वीर सावरकर को देंगे भारत रत्न पुरस्कार, विरोधी खेमे में आंग लग गई: VIDEO

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Bharat Ratna for Veer Savarkar
BJP MH deciding to push for Bharat Ratna for Veer Savarkar. Do not forget this Congress malign Marathi freedom fighter hero Veer Savarkar.

सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने महाराष्ट्र चुनावों को लेकर अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। बीजेपी ने वादा किया है कि वीर सावरकर को भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक कुछ दिन पहले ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बताया कि अगर वीर सावरकर इस देश के प्रधानमंत्री होते तो पाकिस्तान का जन्म और कोई अस्तित्व भी नहीं होता।

हमारी सरकार हिंदुत्व वाली सरकार है और आज मैं वीर सावरकर के लिए भारत रत्न से सम्मानित करने की भी मांग करता हूं। विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 में महाराष्ट्र के नासिक जिले के समीप भागुंर गांव में हुआ। वह पहले क्रांतिकारी थे, जिन्होंने 1901 में ब्रिटेन की रानी विक्टोरिया की मृत्यु पर नासिक में शोकसभा रोकने का विरोध किया।

विदेशी वस्त्रों की प्रथम होली वीर सावरकर के द्वारा जलाई गई

जानकारी के मुताबिक विदेशी वस्त्रों की प्रथम होली पूना में 7 अक्तूबर 1905 को वीर सावरकर के द्वारा जलाई गई थी। वीर सावरकर विश्व के पहले क्रांतिकारी थे, जिन्हें अंग्रेजी सरकार ने दो बार आजीवन कारावास की सजा का ऐलान किया। वह प्रथम ऐसे राजनैतिक बंदी थे, जिन्होंने काला पानी की सजा में 10 साल से भी ज्यादा समय तक आजादी के लिए चने चबाने पड़े थे।


वीर सावरकर ने जेल में बंद होने के बाद उन्होंने कोठरी की दीवारों पर कोयले से कविताएं लिखी और 6000 पंक्तियां भूले नही थे तब भी। उनकी लिखी हुई किताबो पर आजादी के बाद भी कई वर्षों तक पाबंदी लगी रही। उन्हें 1905 में विदेशी वस्त्र दहन के कारण पुणे के फर्म्युसन कॉलेज से बेदखल कर दिया गया।

कांग्रेस और कुछ वामपंथी समर्थक लोग वीर सावरकर विरोधी

भाजपा के इस ऐलान से कुछ लोगो और भाजपा विरोधी लोगो को खुजली होना शुरू हो गई है। सोशल मीडिया में एक टपका इसका विरोध भी कर रहा है। आपको बता दें की कांग्रेस और कुछ वामपंथी समर्थक लोग वीर सावरकर जी को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं मानते हैं। ऐसा करने के पीछे कारण भी साफ़ साफ़ नहीं बताते हैं। लोगो का कहना है की वे कांग्रेस की विचारधारा और नेहरू के विरोधी थे, शायद इस वजह से ऐसा है।

वीर सावरकर ऐसे पहले बैरिस्टर थे, जिन्होंने 1909 में ब्रिटेन में ग्रेज-इन Exam पास करने के बाद ब्रिटेन के राजा के प्रति ईमानदार होने की शपथ नहीं ली, इस वजह से उन्हें बैरिस्टर की उपाधि का पत्र कभी हासिल नहीं हो सका। 26 फरवरी 2003 को उसी संसद में उनकी प्रतिमा लगी जिसमें उनके निधन पर शोक प्रस्ताव पर रुकावट पैदा की गई थी।

उन्होंने अपने निधन से पहले एक लेख लिखा जिसका Title आत्महत्या नहीं आत्मार्पण था, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके जीवन का लक्ष्य पूर्ण हो चुका है इसलिए अब अपना जीवन समाप्त कर देना अच्छा है। 83 वर्ष की Age में उनका निधन हो गया। उनको देश आज भी याद करता है।

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