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Patna: बिहार राज्य बेहद शिक्षित राज्य है, यहां के हर एक घर में आईएएस और आईपीएस अधिकारी है या फिर अन्य किसी सरकारी नोकरी पर काम कर रहे है। देश का हर युवा चाहता है की वो पढ़ लिख कर अच्छी नोकरी करे उसके जीवन में सुख और समृद्धि हो। समय जिस रफ्तार से चल रहा है, उस रफ्तार से ही देश में महंगाई बढ़ रही है।
इसके साथ जनसंख्या वृद्धि से रोजगार के अवसर भी कम होते जा रहेंगे और प्रतिस्पर्धा बढ़ते ही जा रही है। आईएएस और आईपीएस की परीक्षा देश की सबसे मुश्किल परीक्षा है, परंतु इस परीक्षा के अंतर्गत कई सारी नौकरियां होती है, जो हर युवा की चाह होती है।
इन्ही में से एक ऐसा युवा है, जिसके पास हाथ नही है, उसके बाद भी उसका सपना एक आईएएस अधिकारी (IAS Officer) बनने का है। दिव्यगता किसी की पसंद नहीं होती परंतु ना चाहते हुए भी कुछ लोग किसी हादसे के कारण या फिर अनुवांशिक विकार के कारण अपाहिज हो जाते है, परंतु उनके हौसले एक स्वस्थ मनुष्य से कही ज्यादा होते है।
एक आईएएस अधिकारी बनने के लिए योग्यता
यूपीएससी (UPSC) ने उम्मीदवारों के लिए कुछ शारीरिक योगताए निर्धारित की है, जो विद्यार्थी को जानना बेहद जरूरी है। आपको बता दें यूपीएससी के उम्मीदवारों में कोई प्रकार का शारीरिक दोष नहीं होना चाहिए। वे एक अधिकारी होने के सभी कर्तव्य सरलता से निभा सके।
तकनीकी सेवाओं के अलावा आईएएस के उम्मीदवार युवाओं को ऊंचाई, वजन और छाती जैसी किसी भी योग्यता की जरूरत नहीं पड़ती। बस उम्मीदवारों के नेत्र स्वस्थ और उचित दृष्टि वाले होना चाहिए। साथ ही उम्मीदवारों के दांतो का क्रम अच्छा हो।
अभ्यर्थियों को फेफड़े और पेट से संबंधित कोई तरह की परेशानी ना हो। आईएएस बनने के इच्छुक अभ्यर्थी में जन्मजात विकृति, दोष, पुरानी बीमारी नही होना चाहिए। टीकाकरण के निशान होने जरूरी है। अंग ट्रासंप्लांट वाले उम्मीदवारों को अनफिट कर दिया जाता है।
बिहार के नंदलाल की कहानी
बिहार (Bihar) राज्य के मुंगेर जिले में आने वाला आरएस महाविद्यालय में स्नातक परीक्षाओं का आयोजन किया गया है। इस परीक्षा में एक ऐसा छात्र शामिल हुआ, जिसके बुलंद हौसलों ने सब को उसकी तारीफ करने पर मजबूर कर दिया। पूरा जिला उस छात्र की ही चर्चा कर रहा है।
नंदलाल (Nandlal) अपने हाथो से अपाहिज है, परंतु हाथ न होने पर भी उसने अपने दोनों पैर की मदद से परीक्षा दे रहा है। नंद लाल बचपन से ही पढ़ाई के लिए बेहद जुनूनी है इसे के चलते उसने IAS जैसा कठिन परीक्षा का सपना भी देख रखा है। नंदलाल ने अपनी कमजोरी को ही ताकत बनाई है, नंदलाल हवेली खड़गपुर शहर के संत टोला क्षेत्र का निवासी है।
बिजली के करंट के कारण दोनो हाथो को खो दिया
नंदलाल (Bihar Student Nandlal) बीए प्रथम वर्ष के पहले सेमेस्टर की परीक्षा आरएस कॉलेज तारापुर से दे रहा है। उसके पिता का नाम अजय साह जो पेशे से एक दुकान चालक है। गरीबी के साथ दिव्यांगता से लड़ते हुए अपने मजबूत हौसला से नंदलाल अपनी पढ़ाई कर रहा है।
बिहार के मुंगेर जिले के एक दिव्यांग ने वो करके दिखा दिया है, जो शायद लोग सोच भी न पाएं। दोनों हाथ कट जाने के बाद भी नंदलाल ने पढ़ाई का जुनून नहीं छोड़ा और अब पैरों से लिखकर बीए की परीक्षा दे रहा है। वाकई नंदलाल के जज्बे को सलाम करने का मन करता है। (सलाम मेरे दोस्त) pic.twitter.com/O8S6psOZiM
— Bijay chouhan (@BijayVlog) June 28, 2022
नंदलाल (Nandlal Kumar) हादसे के शिकार हो गए थे, उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान जानकारी दी की वर्ष 2006 में एक बिजली के झटके ने उनसे उनके दोनो हाथ छीन लिए जिसके बाद से ही उनकी जिंदगी बदल गई। आगे वे बताते है कि दादाजी के द्वारा दिए होसलों ने उन्हे एक बार फिर जिंदगी की राह दिखाई और दादा जी ने ही पैरो की मदद से लिखना सिखाया।
पैरो की मदद से लिख कर प्रथम श्रेणी से पास हुए नंदलाल
वर्ष 2017 में वे मैट्रिक पहले स्थान पर पास हुए। उस समय के वर्तमान एसडीओ संजीव कुमार के द्वारा उन्हे एक लाख की राशि प्रदान की गई। बीए के बाद वे बीएड करना चाहते है और साथ ही आईएएस की तैयारी भी। परिवार आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है। इसके बाद भी नंदलाल ने हिम्मत नहीं हारी।
बिहार मुंगेर : पैरों से अपनी किस्मत बनाने में जुटा है, यह नंदलाल, बचपन में दोनों हाथ गवां बैठा नंदलाल पैरों की मदद से B.A.का परीक्षा दे रहा है। #IAS बनने का सपना है। आपके इस जज्बे को सलाम! @yuva_rajad pic.twitter.com/jamkHnQHSL
— Diwakar Kushwaha (@Diwakar_RJD) June 30, 2022
नंदलाल ने वर्ष 2019 में इंटरमीडिएट की परीक्षा साइंस विषय से दी और प्रथम श्रेणी में पास हुए। उन्हे 500 अंकों में 325 अंक हासिल हुए जिसमे से भौतिकी मे 67, गणित में 60, रसायन में 73 अंक हासिल कर लोगो के लिए मिशाल पेश की।



