शख्स को कॉलेज के बाद जॉब नहीं मिली, तो साइकिल पर मसाला बेचा, अब मसाला फैक्ट्री के मालिक बने

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Masaala Business Starts
Bihar man Mukesh Kumar Sinha started masala business on cycle and now he is owner of masala factory. Masaala Business is well for earning.

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Patna: स्‍वाद सुगंध का राजा मसाला होता है। यह लाइन हमनें हमेशा ही टीवी पर सुनी है और इस लाइन के जरिए में मसालो का प्रचार करते हुए देखा है। आये दिन हम कई मसाला ब्रांड के ऐड टीवी पर देखते है। हम बहुत अच्‍छे से जानते है, कि मसालों के बिना हमारे घर के किचन में कोई भी चीज स्‍वादिष्‍ट नहीं बन सकती है।

मसाले ही किचन के राजा होते है। मसालों में मिर्च, हल्‍दी, नमक, गरम मसालो इत्‍यादि आते है। लेकिन आज यह मसाले केवल हमारे किचन तक ही सीमित नहीं है। इन मसालों के वजह से हमारे देश में बहुत से व्‍यवसाय चल रहे है ओर लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

इन्‍हीं मसालों का बिजनेस करके आज लोग लाखों कि कमाई कर लेते है। जिसमें से धर्मपाल गुलाटी का नाम तो सभी ने सुना है। उनका नाम मसालों के क्षेत्र में बहुत ही फैमस है। उन्‍होने मसालों कि दुनिया में नई क्रांति ला दी थी। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे व्‍यक्ति के बारे में बताने जा रहे है, जोकि ग्रेजुएशन के बाद यूपीएससी (UPSC) की तैयारी कर रहे थे और कई वर्षो तक यहा वहा नौकरी की तलाश में फिर रहे थे।

नौकरी ना मिलने पर उस व्‍यक्‍ति ने मसालों का बिजनेस (Masala Business) करना शुरू किया और आज वह व्‍यक्‍ति एक मसालों किे फैक्‍ट्री का मालिक बन गया है। हम बात कर रहे है, बिहार के पूर्णियो जिले में रहने वाले मुकेश कुमार सिन्‍हा (Mukesh Kumar Sinha) की। आईये जानते है, उनके जीवन के बारे में कि किस तरह उन्‍होंने इस बिजनेस कि शुरूआत (How To Start Masala Business) की।

हमने यह लाइन हमेशा ही सुनी है कि अगर आपमें किसी चीज को पाने के हौसले मजबूत हे, तो आप उस चीज को हर मुशीबत को पार करते हुए आखिर में प्राप्‍त कर ही लेते हे। यही बात एक आम व्‍यक्‍ति ने अपनी मेहनत से साबित कर दिया है।

वह व्‍यक्‍ति जो कि अपने पूरी जिंदगी में कई तरह कि मुसीबतों का सामना करता रहा और आर्थिक तंगी का सामना करता रहा। हर बेरोजगार की तरह कई सालों तक नौकरी के लिए यहा वहा भटकता रहा। लेकिन आज वह खुद कि मेहनत और लगन से एक मसाले की फैक्ट्री का मालिक बन चुका है। और आज वह इतना सक्षम हो चुका है, कि वह दूसरों को नौकरी दे रहा है।

मुकेश किे प्रारंभिक शिक्षा

बिहार (Bihar) में जन्‍में मुकेश कुमार सिन्हा एक बहुत ही गरीब निर्धन परिवार से ताल्‍लुक रखते थे। हर युवा की तरह वह भी सरकारी नौकरी पाना चाहते थे। ताकि वह अपने घर कि गरीबी दूर कर सके और अपना जीवन सवार सके।

मुकेश ने स्‍नातक कि डिग्री लेने के बाद पटना में जाने का फैसला किया। वहां पर उन्‍होंने वहीं रह कर यूपीएससी कि तेयारी करना शुरू कर दी। उनका सपना आईएएस बनने का था। लेकिन शायद उनकी किस्‍मत को कुछ और ही नसीब था। तैयारी करते करते ही कुछ समय बाद मुकेश के पिता जी की मृत्‍यू हो गई। जिस वजह से उनके घरों में पैसों कि दिक्‍कत होने लगी और उन्‍हें अपनी तेयारी छोड़ कर घर वापस आना पड़ा।

कई दिनों तक करते रहे नौकरी की तलाश

जैसे ही मुकेश के पिताजी कि मृत्यु हूई, तो घर कि सारी जिम्‍मेदारी उनके ऊपर आ गई। जिसे पूरा करने के लिए मुकेश यहा वहा नौकरी की तलाश करने लगे। लेकिन उनके हाथ निराशा ही लगी और उनके घर की आर्थिक स्थिति दिन व दिन खराब होती होने लगी। जिसे दूर करने के लिए मुकेश एक नया काम शुरू किया उन्‍होंने अपने पिताजी की साइकिल का उपयोग करके यहा वहा घूम-घूमकर मसाले बेचने का कार्य प्रारंभ कर दिया।

इस कार्य से धीरे धीरे उनकी इनकम अच्‍छी होने लगी और उनके घर की आर्थिक हालत सुधरने लगी। धीरे धीरे इस कार्य से उन्‍होंने पेसे बचाना शुरू कर दिया। पेसे जमा करने का उनका उद्देश्‍य अपने लिए एक बिजनेस को शुरू करने का था। पैसे जमा करते करते जब उनके पास काफी पैसे इक्‍ट्ठे हो गये, तो उन्‍होंने एक बिजनेस शुरू किया। जिससे उनका पूरा जीवन ही बदल गया और उनकी लाइफ ऐसी बदली जिसकी उन्‍होंने कल्‍पना भी नहीं की थी।

मसालों की फैक्‍ट्री के मालिक बने

अपने पैसो से मुकेश ने एक मशाला फैक्‍ट्री (Masaala Factory) खोल ली और उनकी इस फैक्‍ट्री से वह हर महीने लाखों का मुनाफा कमा लेते है। आज उनकी फैक्‍ट्री में 24 से भी अधिक पुरूष ओर महिला काम करते है और उनकी फैक्‍ट्री रोजाना 3 टन मसालों का प्रोडक्‍शन करती है।

आज मुकेश को सभी लोग ग्रेजुएट मसाले वाला कहते है। लेकिन मुकेश आज भी अपने वह पुराने दिन नहीं भूल पाये है, कि किस तरह उन्‍होंने मुसीबतों का सामना करते हुए यह कार्य शुरू किया था। उन्‍होंने अपने गॉव में ही यह मसाला फैक्‍ट्री लगाई है, जो कि बहुत से बेरेाजगारों के लिए वरदान की तरह सिद्ध हुई है।

मसाले के बिजनेस (Spice Business) में होता है अच्‍छा खासा फायदा

हमारे किचनों में मसालों कि क्‍या जगह है, यह हमें आपको बताने कि बिल्‍कुल भी जरूरत नहीं है। भारतीय खाने (Indian Food) में मसाला ना हो यह हो ही नहीं सकता। मसालों की जगह प्रारंभ से ही हमारे घर के किचनों में महत्‍वपूर्ण रही है। हमारे देश की पहचान हमारे खाने से ही है।

अगर पूरी दुनिया कि बात की जाये, तो हमारे खाने में मसालों की वजह से ही हमारी एक अलग पहचान बनी हुई है। मसालों का स्थान हमेशा से ही महत्वपूर्ण रहा हैं। विश्व में भारतीय खाने की पहचान इसमें डालें गये मसालें ही हैं। इसलिए मसालों की मांग हमेशा मार्किट में बनी रहती हैं।

मुकेश कहते है कि अगर आप भी उनकी तरह मसालों का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो आप भी उनकी तरह आसानी से मसाले बनाने की यूनिट लगा सकते हैं और उनकी तरह लाखों कि कमाई कर सकते है। इस बिज़नेस में लागत कम आती हैं और प्रॉफिट आपको ज्यादा मिलता है।

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