बिहार में किसान के बेटे ने बगैर किसी कोचिंग के NDA की परीक्षा में 29वीं रैंक लेकर आया, मिसाल बना

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NDA exam
Bihar farmer's son cleared NDA exam without coaching and got 29th rank in the country. Now he became pride of Bihar.

Muzaffarpur: भारत देश के कोने कोने में युवाओ में टेलेंट कूट कूट के भरा है। अपने टेलेंट के जरिये ही युवा स्‍वयं को चरितार्थ करते है। मेहनत वह चाबी है, जिससे हर कठिन से कठिन समस्‍या का समाधान और वर्षो से सोई हुई किस्‍मत का ताला खुल जाता है।

कभी कभी हम जो करना चाहते है उसके लिये हर सुख सुविधा आसानी से प्राप्‍त नहीं होती है। इन सुख सुविधाओ के आभाव के कारण कुछ लोग मेहनत करना छोड़ देते है और निराश होकर बैठ जाते है।

आप भी यह जानते है थक कर हार कर बैठ जाने वाले अपने जीवन में केवल उतना ही हासिल हो पाता है जो कड़ी मेहनत करने वाला एक व्‍यक्‍ति अपने पीछे छोड़ देता है। जी हॉं अगर मेहनत की जाये जो इस संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे हम प्राप्‍त ना कर सके।

बिहार के छात्र ने बिना कोचिंग के एनडीए परीक्षा उत्‍तीर्ण की

हमेशा अपने जीवन मे जो सुख सुविधाये खोजते रहते है, वह अक्‍सर ही पीछे रह जाते है। प्रतिभा वह चीज है जिसे किसी सुख सुविधा की जरूरत नहीं होती। आज की हमारी कहानी ऐसे ही प्रतिभावान मेहनती बिहार के राज्‍य पटना के एक लडके की है।

हमने अक्‍सर देखा है कि कोई भी बच्‍चा अपनी क्‍लास के लेवल के सवाल और पुस्‍तक से संबंधित समझ को रखता है। इसे ही समझना बच्‍चे के लिये कठिन होता है, जिसके लिये वह कोचिंग संस्‍थान जॉइन करता है। आजकल कोई भी ऐसी परीक्षा नही जिसके लिये विद्ययार्थी कोचिंग ना करे। लेकिन बिहार के जिस स्‍टूडेंट की हम बात करने वाले है। वह इन सब कथनो से परे है।

आज बिहार के किसान के बेटे जिनका नाम अंशुमौली आर्य है, उन्‍होंने नेशलन डिफेंस अकेडमी जिसे एनडीए कहा जाता है उसकी परीक्षा को पास किया है। इस परीक्षा में अंशुमौली आर्य ने पूरे भारत देश में 29 वा स्‍थान हासिल किया है। यह परीक्षा अंशुमौली ने किसी भी कोचिंग संस्‍थान से मदद लिये बगैर पास की है। जी हां इस परीक्षा को क्रेक करने के लिये अंशुमौली ने कोई भी कोचिंग नही की है।

नाना के प्रोत्‍साहन ने दिलाई सफलता

अंशुमौली (Anshumaali) की बात करे तो वह बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में स्थित शिवशंकर पथ में निवास करते है। आज जब वह एक सफल स्‍टूडेंट बन गये तो उन्‍हें देखकर हर कोई पढ़ाई के प्रति अपने अंदर का जुनून जगा रहा है। हर विद्यार्थी अुशुमौली की तरह सफल बनने का प्रयास कर रहा है।

अंशुमौली के पिता एक साधारण से किसान है। वही माता एक वर्किंग वुमन है। अंशुमौली की माता का नाम नविता कुमारी है जो कि एक लाइब्रेरियन है। अंशुमौली करते है कि आज वह जो सफलता प्राप्‍त कर पाये है, वह अपने नाना जी के आशीर्वाद से प्राप्‍त कर पाये है।

उनके नाना ही एक थे जो उन्‍हें अक्‍सर ही रक्षा अधिकारी का पद प्राप्‍त करने के लिये प्ररित करते रहते थे। उनका प्रोत्‍साहन ही था, जिस कारण एक सफल छात्र वह बन पाये है और इस एंट्रेस एक्‍जाम को क्‍लीयर कर पाये है। 

ग्‍यारहवी कक्षा से एनडीए की जानकारी मिली तभी से तैयारी शुरू की

अंशुमौली बताते है कि जब वह ग्‍यारहवी की कक्षा में थे उस समय उनको एनडीए के विषय में जानकारी प्राप्‍त हुई थी। जब उनको पता लगा की नेशनल डिफेंस एकेडमी में अगर सेलेक्‍शन लेना हो तो एनडीए की तरफ से आयोजित होने वाली परीक्षा उत्‍तीर्ण करनी पड़ती है। तभी से उन्‍होंने इसकी तैयारी करना शुरू कर दिया था।

अंशुमौली के अनुसार उन्‍होंने परीक्षा उत्‍तीर्ण करने के लिये किसी भी प्रकार की कोचिंग संस्‍थान जॉइन नही की। उन्‍होने केवल अपनी मेहनत, ऑनलाइन तथा सेल्‍फ स्‍टडी से ही इस परीक्षा को उत्‍तीर्ण किया है। अंशमोली ने बताया किे एनडीए मे सेलेक्‍ट होने के लिये परीक्षा में पास होने के साथ साथ अच्‍छी पर्सलालिटी का भी होना जरूरी है।

तीन साल की पढ़ाई के बाद, 1 साल की होगी ट्रेनिंग

अंशुमोली बताते है कि एनडीए एक ऐसी संस्‍थान है, जिसमें अगर एक बार सेलेक्‍ट हो गये, तो इसके जरिये पूरे विश्‍व की बड़ी बड़ी प्रोफेशलन संस्‍था से जुड़ा जा सकता है। इस प्रकार अगर इन संस्‍थानो से हम जुड जाये तो ऑफिसर के रूप में बहुत से दायित्‍व तथा जिम्‍मेदारी को निभाना होता है।

अंशुमौली बताते है इस एंट्रेंस एक्‍जाम को पास करने के बाद में अब उनको 3 साल के लिये एनडीए का जो हेडक्‍वार्टर खडगवासला में है, वहा पर पढ़ाई करनी होगी। जब उनकी वहॉं पर 3 साल की पढ़ाई पूरी हो जायेगी, उसके बाद उनको आईएमए देहरादून में पूरे 1 साल की ट्रेनिंग मिलिट्री के लिये दी जायेगी। जिसके बाद वह एक रक्षा अधिकारी बन जायेंगे।

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