
रामलला के हित में निर्णय आने के बाद भरतपुर के बयाना और बंशी पहाड़पुर के खनन इलाके से पत्थर की आपूर्ति फिर Start हाे जाएगी। राम जन्म भूमि मंदिर बनाने में न्यास की ओर से प्रस्तावित मंदिर में इलाके से निकलने वाले सेंड स्टोन का उपयोग 60 प्रतिशत से ज्यादा होगा। मंदिर निर्माण में करीब 4 लाख घन फीट पत्थर उपयोग होगा, जिसमें से लगभग 2.5 लाख घन फीट बंशीपहाडपुर का स्टोन इस्तेमाल किया जायेगा।
वर्ष 2006 से अयोध्या के कारसेवक पुरम में पत्थर भेजने का काम चल रहा है। अभी तक 1 लाख घन फीट पत्थर की आपूर्ति हो चुकी है। इसमें 70 हजार घन फीट पत्थर अयोध्या की राम मंदिर कार्यशाला बनाने में तथा 30 हजार घन फीट पत्थर पिंडवाड़ा की कार्यशाला में पहुचाया जा चुका है। यहां पत्थर की नक्काशी का काम किया जा रहा है।
राम मंदिर के लिए पत्थर का काम जारी
एक खेप पिछले महीने ही भेजी जा चुकी है। पिछले दिनों 10 ट्रोला पत्थर पहुचाया गया, जिसमें एक में 400 घन फीट माल मौजूद था। अब डेढ़ लाख घन फीट पत्थर की आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए संबंधित खान मालिकों से विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी टच में बने रहते है। विश्व हिंदू परिषद के विभाग अध्यक्ष सतीश भारद्वाज ने इसकी पुष्टि की है।
सिर्रोंध, महलपुर चूरा, छऊआमोड और तिर्घरा इलाको की खानों के पत्थर का परीक्षण करने के बाद चयनित किया गया है। यहां सहकारी समितियों और खान मालिकों से ब्लॉक निकालकर बयाना पहुचाने काे कहा गया है। यहां रफ माल की छटाई के और कटिंग होने के बाद अयोध्या भेजा जाएगा।
10 से 20 ट्रोला पत्थर हर महीने भेजा जाएगा
पत्थर की आपूर्ति 6 माह तक पूरी हो पायेगी। 10 से 20 ट्रोला पत्थर हर महीने भेजा जाएगा। इसके लिए विश्व हिंदू परिषद द्वारा कुछ ट्रोले स्थाई रूप से रेंट पर लिए जाएंगे। बंशी पहाड़पुर के पत्थर की महत्वपूर्ण बात उनकी मजबूती और सुंदरता के कारण सदियों से मशहूर है। इसमें अन्य पत्थरों के तुलना अधिक भार सहने की क्षमता और सरलता से पच्चीकारी होने की अहम वजह के कारण इसकी हमेशा से डिमांड रही है।
अक्षरधाम, संसद, इस्कान के अधिकांश मंदिरों, लालकिला, बुलंद दरवाजा सहित कई प्रसिद्ध मंदिरों और इमारतों में बंशी पहाड़पुर का पत्थर लगा है। पत्थर कारोबारी नेमीचंद ने कहा कि इस पत्थर में रुनी मतलब स्टोन कैंसर नहीं होता। बारिश से पत्थर के रंग में कोई परिवर्तन नही आता है, बल्कि निखार आती है।
दीवार और छत के पत्थर की डिज़ाइन
बंशी पहाड़पुर के स्टोन से मंदिर में लगने वाले सभी 106 खंभे डिज़ाइन हो गए हैं। विश्व हिंदू परिषद के विभाग अध्यक्ष सतीश भारद्वाज ने बताया कि मंदिर दो मंजिला इमारत का होगा। इसके भूतल में 106 खंभे लगेंगे, जिनकी हाइट 16 फीट होगी। इसके अतिरिक्त सिंह द्वार, गर्भगृह, रंग मंडप, नृत्य मंडप और परिक्रमा मार्ग बनाया जायेगा।
मंदिर की लंबाई 270 गुणित 135 फुट है। शिखर की ऊंचाई 125 फीट बनाई जाएगी। परिक्रमा मार्ग 10 फीट चौड़ा बनाया जाएगा। दीवार 6 फुट मोटी रहेगी। चाैखट में संगमरमर और सजावट के लिए अन्य पत्थर का उपयोग किया जायेगा। खंभे, दीवार, महराब, छज्जे, झरोखे, छत के लिए पत्थर डिज़ाइन किए गए हैं। इनमें पच्चीकारी का काम करीब समाप्त हो गया है।
सात साल तक चला पत्थर खोजने का काम
करीब 7 साल तक पिंडवाड़ा मेंसैकड़ों कारीगरों ने पत्थर खोजने का काम किया। राम मंदिर निर्माणको लेकर जब कवायद Start हुई थी तब बयाना, भरतपुर से बंशी पहाड़पुर पत्थरों का चुना गया था, जबकि इन पत्थरों को खोजने के लिए पिंडवाड़ा काे चयनित किया गया।
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल, रामबाबूजी और चंपत रॉय ने जनवरी 1995 में भूमि पूजन कर यहां तीन कार्यशालाओं में कार्य Start करवा दिया था, जिससे काम जल्दी पूरा हो सकें। सोमपुरा मार्बल इंडस्ट्री, भरत शिल्प कला केंद्र व महादेव शिल्प कला केंद्र मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन में विश्व हिंदू परिषद द्वारा इन पत्थरों को खोजने का काम किया गया। 2004 में पत्थर तलाशने की प्रकिया पूरी हुई थी।




