बेटी के जन्म पर ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया, न्याय पाने बन गई जज

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Avanika Gautam Civil Judge success story in Hindi. How Avanika Gautam become Judge: Ek Number News Story.

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Delhi: जब इरादों में ताकत हो और हौसले मजबूत हो तो हर कोई कठिन परिस्तिथि में भी लोग अपने मुकाम को हासिल कर सकते है। मन दृढ़ता से भरा हो, तो कुछ भी असम्भव नही होता। इन्ही बातों की जीती जागती उदहारण हैं, वृंदावन की अवनिका गौतम। उन्होंने अपने कठिन परिस्थितियों मे हिम्मत नही हारी ना ही अपने हौसले को टूटने दिया।

जिंदगी में कई बार ऐसे विकट परिस्थिति आती हैं कि समझ नहीं आता कहां जाएं और कहां नहीं। मगर इन परिस्‍थतियों में जो लोग मजबूती से डटे रहते हैं, वे सफलता हासिल कर लेते है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है वृंदावन की अवनिका गौतम Avanika Gautam ने। अवनिका एक बेहतर शादीशुदा जिंदगी Married life बिता रही थीं तभी उनके साथ कुछ ऐसा हुआ कि वे बुरी तरह टूट गई थीं, लेकिन उन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी। उन्‍होंने खुद को फिर मजबूत किया और खुद को सशक्‍त करने पर फोकस किया।

इसका परिणाम ये हुआ कि उन्‍होंने पीसीएस-जे क्लियर कर लिया है। एक खुशहाल शादी शुदा जिंदगी में वे बहुत खुश थी।फिर किस्मत ने ऐसी पलड़ी खाई अवनिका के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसके बाद वह बिखर गई, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और मजबूती से परिस्थितियों का डट कर सामना किया।

इतना ही नही उन्होंने खुद को आत्मनिर्भर बनाया और आज वह झारखंड हाइकोर्ट में असिस्टेंट रजिस्ट्रार का पद सम्भाल रही हैं। पीसीएस-जे यानी कि झारखंड लोकसेवा आयोग की परीक्षा क्लियर कर आज वह अपने मुकाम तक पहुंची हैं। लेकिन उनकी यह मंजिल आसान नही थी।

राह के पत्‍थर आपकी मंजिल में बाधा नही बन सकते, बल्कि उन पर चलकर आप मजबूत होते हैं। जिंदगी में जो लिखा है, वह तो होकर रहेगा लेकिन हर घटना आपको अनुभव के साथ मजबूत बनाती है। अवनिका गौतम, एक ऐसी ही शख्सियत हैं जिन्‍होंने हर कठिन परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाया।

वृंदावन की बेटी अवनिका गौतम इन दिनों झारखंड हाईकोर्ट में असिस्टेंट रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) के पद पर पदस्थ हैं। हैं। झारखंड लोकसेवा आयोग की परीक्षा पीसीएस-जे पास कर उनका चयन सिविल जज जूनियर डिवीजन के पद पर हुआ था।
अवनिका आज भले ही लोगों को न्‍याय दिलवाती हैं, लेकिन एक समय उन्‍हें न्‍याय की दरकार थी। ये भी कहना भी सही होगा कि न्‍याय मांगते मांगते वह न्‍यायाधीश बन गईं।

अवनिका गौतम की शादी 2008 में जयपुर के एक परिवार में हुई थी। उस समय वह MSC में थीं। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष ने दहेज की मांग शुरू कर दी। अवनिका यह सब अकेले ही सहती रहीं, लेकिन जब वह एक बेटी की मां बनीं तो ससुराल ने उन्‍हें 2009 में घर से बाहर निकाल दिया। अपनी छोटी सी बेटी को लेकर वह मायके वृंदावन आ गईं और न्‍याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने लगी।

जब कहीं से कहीं तक अवनिका को न्याय की रास्ता नजर नहीं आया तो उन्होंने सख्त कदम उठाते हुए दिल्ली आने का फैसला किया। यहां अवनिका ने पीसीएस-जे की तैयारी शुरू की और 2 साल बाद ही यानि 2014 में सफलता हासिल की और उनका चयन झारखंड पीसीएस-जे के लिए हुआ।

आज अवनिका झारखंड हाईकोर्ट में असिस्टेंट रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल के पद पर अपनी सेवा दे रही हैं। जज बनने के बाद अवनिका गौतम ने एक प्रण लिया था कि उनकी तरह कोई लड़की न्‍याय को ना भटके। उनकी कोशिश रहती है कि हर मजबूर को इंसाफ मिले। वो कहती हैं कि उनके द्वारा न्‍याय में भले ही देर हो, लेकिन अन्‍याय नही होने देंगी।

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