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Bastar: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बस्तर इलाके का नाम सुनते ही, हमारे दिमाग में नक्स-लवाद और उग्र-वादियों की फ़ोटो सामने आने लगती है। लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि यह इलाका अपनी हस्तकला के लिए भी देश भर में अपनी पहचान बनाने में सफल साबित हो रहा है।
इस क्षेत्र में बैम्बू से बहुत अधिक मात्रा में प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। यहां के कलाकारों के लिए 30 वर्षीय आसिफ खान (Asif Khan) ने एक अनोखी पहल कर सबको चकित कर दिया, उन्होंने एक स्टार्टअप (Startup) का शुभारंभ किया है, जो स्थानीय कलाकारों को अपने प्रोडक्ट्स बेचने के लिए एक प्लेटफार्म प्रदान करेगा।
आजकल बांस और घास से बनी वस्तुएं महिलाओं के लिए रोजगार के सुनहरे अवसर प्रदान कर रही हैं। इन्हें बस आवश्यकता है तो सही प्रशिक्षण और प्रोत्साहन की। जिसे जिले के ग्रामीण विकास विभाग पूरा करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कामन फेसीलेटर सेंटर बनाये जा रहे है। जिससे सभी को सही दिशा के साथ सही मार्गदर्शन मिल सके।
साइंस कालेज मैदान में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव में इस वर्ष बांस से बनी साइकिल (Bans Ki Cycle) लोगों के बीच आश्चर्य का विषय बनी हुई है। वह दर्शकों को आपनी ओर आकर्षित करने में सफल साबित हो रही है। इस साइकिल को देख लोग साइकिल की सेल्फी और फोटो लेने के लिए उत्साहित है।
उल्लेखनीय है कि महोत्सव में बस्तर की विभिन्न कलाओं के संयोग का एक अनूठी कोशिश की गई। बताया जाता है कि साइकिल बनाने के लिए पहले बांस का बीओवन प्रोटोटाइप डिज़ाइन किया गया है। इसमें बस्तर के प्रसिद्ध चार अलग-अलग हस्तशिल्प कला के समागम का प्रमाण मिलता है।
इस साइकिल के निर्माण में ढोकरा कला, लोह शिल्प, शीशल और बांस शिल्प का इस्तेमाल किया गया है। बहुत जल्द ही इसे बस्तर जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर लॉन्च भी किया जाएगा। हम आपको उस शख्स के बारे में बताने जा रहे है, जिसने इस अविष्कार को नई पहचान दी।
आसिफ (Asif Khan) ने 2019 में नौकरी से मन हटाकर इस क्षेत्र में कदम रखा। छह साल तक सोशल सर्विस सेक्टर में काम करने के बाद उन्होंने ‘Naturescape’ नाम से स्टार्टअप का शुभारंभ किया। उन्होंने चार आदिवासी परिवारों से जुड़कर काम शुरू किया।
स्थानीय कलाकारों की मदद से उन्होंने बैम्बू से एक ईको-फ्रैंडली साइकिल डिज़ाइन की। ‘बैम्बूका’ (Bambooka) उसका नाम रखा है। इस साइकिल में स्थानीय बैम्बू का प्रयोग किया गया है। इस सोच के पीछे उनका लक्ष्य कलाकारों को रोजगार का अवसर देना था।
आसिफ ने मीडिया से बात करते हुऐ बताया की, हमारे देश के कई इलाकों में बैम्बू से अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट्स तैयार किए जा रहे हैं। लेकिन अब तक बैम्बू से किसी ने साइकिल बनाने पर विचार नही किया। हमने इसी बात को सच साबित करते हुऐ साइकिल बनाने का प्रयास किया, यह पहल सफल साबित हुई। आज हर क्षेत्र में इस साइकिल को पहचान मिल रही है।
हालांकि इस तरह की बैम्बू साइकिल (Bamboo cycle) दुनिया के कई क्षेत्रों में तैयार की जा रही हैं। लेकिन जो बात आसिफ के साइकिल ‘बैम्बूका’ को सबसे अलग बनाती है, वह है इसमें इस्तेमाल हुआ कच्चा माल। कच्चे माल के रूप में उन्होंने पीतल, लोहा और जूट फाइबर का इस्तेमाल किया है।
इसकी कीमत की बात करें तो फ़िलहाल यह ग्राहकों को 35000 रुपये में मुहैया कराई जा रही है। आसिफ ने बताया, इसे बनाने में कलाकारों की मेहनत और कच्चे माल को ध्यान में रखकर ही कीमत निर्धारित की गई है, जो बिलकुल भी अधिक नहीं है। इसे डिज़ाइन करने में कारीगरों को 12 से 15 दिन का समय लग जाता हैं।
Asif Khan from Jagadalapur, Chhattisgarh has launched a bicycle made of Bamboo, "Bambooka". This 8 kg cycle is made using four prominent art and craft of Bastar including Dhokra art, iron, shishal and bamboo crafts. @PMOIndia@narendramodi@MSDESkillIndia @dpradhanbjp pic.twitter.com/QS18OiuVwe
— Abhinandan Mishra (@mishra_abhi) November 1, 2021
आसिफ भविष्य में अपने स्टार्टअप (Bamboo Cycle Startup) को एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में बदलने का विचार बनाये हुये है जिसे जल्द ही वो पूरा करने वाले है। उन्होंने कहा, कई समूह हमें पैसे से सहायता देकर अपनी रुचि दिखा रहे हैं। हम भविष्य में और बेहतर काम करना के लिए अग्रसर हो रहे है।
#HumansofChhattisgarh With a mission of reviving extinct Bamboo art of tribal Bastar region and providing local young artisans with employment opportunities Md. Asif Khan has initiated a project of making Chhattisgarh’s first bamboo cycle "Bambooka" @AwanishSharan @rajat4bansal pic.twitter.com/4wWNUhKUTs
— Humans Of Chhattisgarh (@HumansofCG) November 24, 2021
आसिफ आर्ट और क्राफ्ट के अतिरिक्त पर्यटन क्षेत्र में भी अपना हुनार दिखा रहे हैं। वह बस्तर क्षेत्र में आदिवासियों को हॉस्पिटैलिटी का प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर देने का प्रयास कर रहे हैं। आसिफ ने बताया कि उनके पास बैम्बू साइकिल के दस ऑर्डर्स हैं, जिस पर वह पूरी लग्न और मेहनत से काम कर रहे हैं।



