मिट्टी के घरों में रहने वाला बेटा बना IAS, पिता के देहांत के बाद मां ने खेतो में मजदूरी करके पढ़ाया

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Arvind Kumar Meena IAS
Arvind Kumar Meena IAS From BPL Family of Dausa Rajasthan. Arvind Kumar Meena IAS Success Story who lived in sand house Rajasthan.

Photo Credits: Twitter

Jaipur: आज हर व्यक्ति सरकारी नोकरी पाने के सपने देखते है, लेकिन सपनो को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होती है जो हर किसी के वश की बात नही होती। UPSC जैसी कठिन परीक्षा का नाम सुन के ही लोग डर जाते है, सोचते है कि इसकी पढ़ाई महंगी कोचिंग में जाकर होती है, लेकिन ये सच नही है मेहनत कभी पैसा नही देखती, अगर आप मे किसी भी लक्ष्य को हासिल करने का जुनून है, तो कोई भी कठिनाई आपका रास्ता नही रोक सकती।

आज के वक़्त में हरएक व्यक्ती चाहता हैं की वो सरकारी नौकरी (Government Job) प्राप्त करे और लेकिन बस सपना ही बना रहता है उसके लिए जुनून नही होता, जिसके चलते वो अपने रास्ते से पीछे हट जाते है। दिन रात परिश्रम भी करते हैं, पर बहुत से लोगो को सफलता (Success) नहीं मिल पाती।

आईएएस (IAS) बनना हर किसी का ख़्वाब होता है, परंतु उसके लिए करनी पड़ती है, कड़ा परिश्रम कुछ लोगों के पास सहूलियत की कमी नहीं होती, लेकिन कुछ ऐसे भी युवक युवतियां होते हैं, जो सहूलियत के अभाव में ग्राम में रहकर भी आईएएस बनने का ख़्वाब देखते हैं और उसे साकार भी करते हैं।

ऐसे ही हैं दौसा जिले के सिकराय उपखंड के नाहर खोहरा गांव के मे रहने वाले युवक अरविंद कुमार मीणा (Arvind Kumar Meena)। जिन्होंने समूचे देश में 676 वीं और एसटी वर्ग में 12 वीं रैंक प्राप्त कर आईएएस (IAS Officer) बने हैं। अरविंद कुमार मीणा (IAS Arvind Kumar Meena) ने बताया है, जब वह 12 साल के थे, तो उनके पिता का निधन हो गया था।

ऐसे में पूरे घर का उत्तरदायित्व मां पर आ गया मां ने कठोर परिश्रम कर विकट परिस्थितियों में शिक्षित किया और इस ऊचाईयों तक पहुंचाया कि आज वह आईएएस में चयनित हो गए। वहीं, अरविंद मीणा अपने मामा का भी बहोत बड़ा योगदान बता रहे हैं।

आईएएस बनने के पूर्व अरविंद का चयन सशस्त्र सीमा बल में सहायक कमांडेंट के औंधे पर हुआ, मगर अरविंद और उसकी मां सज्जनो देवी की इच्छा थी कि आईएएस बनना है। ऐसे में अरविंद ने सरकारी नौकरी लगने के पश्चात भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी थी।

4 अगस्त 2020 को यूपीएससी का परिणाम जारी हुआ तो अरविंद और उनके परिवार का आईएएस बनने का सपना भी पूरा हो गया। आईएएस बनने में जहां उन्होंने हरदम प्रोत्साहित किया है या तो सहायता भी किया। अरविंद कुमार मीणा इस समय सशस्त्र सीमा बल में असिस्टेंट कमांडर के औधे पर तैनात हैं और आई एफ एस में भी पूर्व में वह चयनित हो चुके है, लेकिन उनका ख्वाहिश थी आईएएस बनना और आज उन्होंने वह पूरा कर लिया।

अरविंद कुमार का कहना है उनके माता-पिता अधिक पढ़े लिखे नहीं हैं, लेकिन आईएएस बनने का हौसला उनको पिता ने दीया था और आज अपने पिता का इच्छा पूरा कर वह बड़ी भाग्यशाली महसूस कर रहे हैं।

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