
Haldwani: भारत के हर राज्य में कुछ ना कुछ खासियत जरूर होती है, फिर चाहे वह खाने पीने की हो या फिर पहनने ओढ़ने की। वैसे देखा जाए तो राजस्थान राज्य की संस्कृति पहनावा और खानपान दुनिया भर में विख्यात है परंतु पहाड़ों का खाना और पहनावा भी राजस्थान से कम नहीं है। पहाड़ों की खूबसूरती यहां के खानपान और पहनावे से और ज्यादा बढ़ जाती है। जगह की अपनी एक अलग पहचान होती है अलग अलग संस्कृतिया होती है।
आज हम उत्तराखंड (Uttarakhand) के खाने की बारे में विस्तार से जानेंगे। उत्तराखंड का स्वाद परोसने के लिए तीन दोस्तों ने एक रेस्टोरेंट की शुरुआत की जिसका नाम “सांझ रेस्टोरेंट” (Saanjh Restaurant) है। इस राज्य की खासियत है कि यहां पर उत्तराखंड का भरपूर स्वाद और आनंद मिलता है।
वैसे देखा जाए तो उत्तराखंड को देवभूमि (Devbhoomi) भी कहा जाता है, क्योंकि यहां स्वयं महादेव का वास है। हर वर्ष लाखों पर्यटक पहाड़ों की खूबसूरती और महाकाल के दर्शन के लिए उत्तराखंड का रुख जरूर करते हैं। ऐसे में इन तीन दोस्तों की मेहनत सफल हो गई, जब उन्होंने पर्यटक के सामने पहाड़ों का स्वाद परोसा। आइए जाने विस्तार से
तीन दोस्तों के स्वरोजगार की कहानी
उत्तराखंड राज्य के अंतर्गत आने वाला कमलुवागांजा इलाका इस समय तीन दोस्तों के कारण चर्चा का विषय बना हुआ। जानकारी के अनुसार इस इलाके के तीन दोस्तों ने साथ में मिलकर स्वरोजगार की शुरुआत की इससे स्वरोजगार के माध्यम से भी लोगों को पहाड़ों का स्वाद परोस रहे हैं।
याने वे अपने सांझ रेस्टोरेंट के माध्यम से हल्द्वानी (Haldwani) के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के दिल में भी राज कर रहे हैं। उत्तराखंड के हल्द्वानी आने वाले पर्यटक इन तीन दोस्तों के रेस्टोरेंट में जाना बेहद पसंद करते हैं।

हल्द्वानी के सांझ रेस्टोरेंट की सफलता के बाद अब इसी रेस्टोरेंट की दूसरी शाखा खोलने के लिए मनोज गिरी, हिमांशु गिरी, अजय बिष्ट सौरव नेगी और हिमांशु नेगी तैयार है। सांझ रेस्टोरेंट की दूसरी शाखा पंगोट किलबरी खोली गई है।
वर्ष 2021 में इस रेस्टोरेंट की नीव रखी गई
बताया जा रहा है कि वर्ष 2021 में हल्द्वानी कमलुवागांजा में सांझ रेस्टोरेंट की नींव रखी गई। इस रेस्टोरेंट के निर्माण में मनोज गिरी, हिमांशु गिरी अजय बिष्ट सौरव नेगी और हिमांशु नेगी शामिल है। इस रेस्टोरेंट को कुछ इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि लोग पहाड़ी खाने के साथ-साथ पहाड़ों में कुछ समय बिताने की भी व्यवस्था रखते है।
दूर से आए सैलानियों के लिए इस रेस्टोरेंट में स्टे की व्यवस्था भी है। इतना ही नहीं जो व्यक्ति मेडिटेशन, एफर्मेशन के लिए शांति में वातावरण चाहता है, तो इस रेस्टोरेंट के अंदर खुले आसमान के नीचे ऐसी व्यवस्था भी है जहां लोग शांति से बैठ कर मेडिटेशन कर सकते हैं। सांझ रेस्टोरेंट पहाड़ों की हर रेस्टोरेंट से अलग है क्योंकि सांझ रेस्टोरेंट अपने पहाड़ी स्वाद और शांति में वातावरण के लिए जाना जाता है।
कसोल थीम पर निर्मित है यह रेस्टोरेंट
सांझ रेस्टोरेंट के मालिक बताते हैं कि वे रेस्टोरेंट में पहाड़ के स्वाद को तो पड़ोस ही रहे हैं, साथ ही यहां आने वाले लोगों को होमस्टे की सुविधा (Home Stay Service) भी दे रहे हैं, इस रेस्टोरेंट को कसोल थीम (Kasol Theme) पर डिजाइन किया गया है। जहां लोगों को मेडिटेशन के लिए एक शांति में वातावरण मिलता है। यहां रहने वाले लोगों को अपने कमरे की बालकनी से पहाड़ों की खूबसूरती देखने को मिलती है।
सांझ रेस्टोरेंट के मैनेजर का कहना है कि वह पहाड़ों के स्वाद को जब थाली में परोसते हैं, तो वहां घूमने आए पर्यटकों के चेहरे की खुशी देखकर उन्हें बेहद खुशी होती है। उनका मानना है कि वे अपने राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं।
सांस रेस्टोरेंट ने दी आत्म निर्भरता की मिसाल
बताया जा रहा है कि सांझ रेस्टोरेंट के कर्ता-धर्ता मनोज गिरी, हिमांशु गिरी और हिमांशु नेगी 4 वर्ष पहले ही हल्द्वानी में शिफ्ट हुए थे। यहां आना और आगे क्या करना है उनका विजन क्लियर था।
उनका एक ही मकसद था कि आत्मनिर्भर रहें और पहाड़ों में रहते हुए खुद का स्वरोजगार बनाएं। उनकी राह में काफी रुकावटें थी, परंतु उन्होंने हिम्मत से काम लिया और आगे बढ़ते रहे और आज से सभी मुसीबतों को पीछे छोड़ उस मुकाम पर हैं जिसके बारे में हर कोई बहुत आसानी से नहीं सोच पाता।
सांज रेस्टोरेंट पहाड़ों की संस्कृति और मॉडल कल्चर का एक मिश्रित प्रारूप है, जो सभी रेस्टोरेंट से अलग बनाता है। अक्सर पहाड़ों में रोजगार की बेहद समस्या होती है, ऐसे में सांझ रेस्टोरेंट में पहाड़ी युवाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया है।





