
Surat: आर्ट एक ऐसी शक्ति है जिसके सहारे इस संसार में अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है। कला का होना अपने आप में गर्व की बात होती है। कला कभी भी इंसान को भूखे पेट नहीं सोने देती। यह परिवार का पेट भरने से लेकर उस व्यक्ति की दुनिया में पहचान बनाने में मददगार होती है। यही कारण है कि लोग कला की पूजा करते है।
एक ऐसी ही कला है जिसका संबंध दिल से लेकर दिमाग तक जाता है। यह कला हाथों के सहारे कपड़ो पर बनाई जाती है। लेकिन कपड़ो पर इसे बनाने के लिये आपको पैंट, सुई, धागा याफिर ब्रश की जरूरत नही होती है। बल्कि इसे कपड़े को छुये बिना ही बनाया जाता है। हम जिस कला की बात कर रहे है यह कला गुजराज राज्य से संबधित है। इस कला को दुनिया में रोगन आर्ट (Rogan Art) के नाम से जानते है।
400 साल पुरानी रोगन आर्ट फिर से हुई पुनर्जीवित
रोगन आर्ट 400 साल पुरानी कला है। यह ईरान (Iran) से संबंधित है यह कला ईरान से भारत के राज्य गुजरात में आई थी। लेकिन धीरे धीरे इस कला में धुँधला पन छा गया। यह कला धीरे धीरे इस स्थिति में आ गई कि यह विलुप्ति की कगार पर पहुँच गई।
इस कला को गुजरात (Gujarat) राज्य के कच्छ में रहने वाले अब्दुल गफ्फार ने फिर से पुनर्जीवित कर दिया है। आप को जानकर हैरानी होगी इस काल को सिर्फ अब्दुल गफ्फार का परिवार ही अच्छे से जानता है। यह पेंटिंग हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इतनी पसंद है कि उन्होंने इस आर्ट से बनी पेंटिंग को कई दिग्गजो को भेंट की है।
प्रधानमंत्री द्वारा कई महान दिग्गजो को भेंट की गई यह पेंटिंग
इस आर्ट से बनी पेंटिंग को क्वाड शिखर सम्मेलन के समय में जापान के फुमियो किशिदा को प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने भेंट की थी। इससे पहले भी मोदी जी ने यूरोपीय दोरे के समय में डेनमार्क की महारानी जिनका नाम मार्ग्रेथ द्वितीय है उन्हें भेंट की थी।
During the launch of Smriti Van memorial in Kutch by PM Modi. Padmashri Abdul Gafur Khatri presented PM with beautiful traditional rogan art kurta & a painting.
PM wore this the kurta on the occasion of #GaneshChaturthi and shared a pic.
Via : @craftvillagein on LinkedIn. pic.twitter.com/yyXiORGNkr
— Kumar Manish (@kumarmanish9) September 1, 2022
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति मिस्टर बराक ओबामा को भी मोदी (PM Modi) द्वारा यही रोगन पेंटिंग भेंट की गई थी। इसी प्रकार और भी विदेशाी नेता है, जिनको यह रोगन आर्ट की पेंटिंग हमारे देश के प्रधानमंत्री द्वारा भेंट की जा चुकी है। जब यह पेंटिंग नेताओ को भेंट की गई तो इस आर्ट की लोकप्रियता बढ़ गई।
अब्दुल गफ्फार के परिवार ने कला को दिलाई नई पहचान
अब्दुल गफ्फार (Abdul Gafur Khatri) जो की इस कला को बहुत अच्छे से जानते है उन्हें इस कला के लिये सरकार की तरफ से पद्म श्री का पुरस्कार भी दिया जा चुका है। वही अब्दुल गफ्फार खत्री जी के परिवार को इसके अलावा और भी अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया जा चुका है।
इस परिवार के सदस्य सुमरा खत्री का कहना है कि यह कला भारत देश से पूरी तरह विलुप्त होने की स्थिति में थी। लेकिन उनके परिवार की मेहनत की वजह से यह कला फिर से पुनर्जीवित हो गई।
इस तरह किया जाता है रोगन तैयार
इस परिवार के अनुसार इनकी कई सारी पीढ़ी इस कला को कपड़ो पर उकेरते आई है। परिवार के सदस्य कहते है कि वह परिवार के 8 पीढ़ी को जानते है जो इस कला को करते आये है। इनका कहना है कि यह कला देखने में जितनी सुन्दर लगती है, इसे बनाना उतना ही मुश्किल है।
Rogan Art: Crafting your way through the vibrant Gujarat, you can come across the artistic Rogan Art. Curated from boiled oils and natural dyes, this practice of painting on cloth is unique to the Kutch District. #GujaratTourism #Art #Kutch #Handicraft #Rogan #Painting pic.twitter.com/aiWWN5fSHt
— Gujarat Tourism (@GujaratTourism) July 15, 2021
वह लोग कहते है की इसे बनाने में बहुत ही ज्यादा समय लग जाता है। यह रोगन पेंटिंग कला ऑयल पर आधारित आर्ट है। रोगन अच्छा दिखे इसलिए इसे बनाने से पहले कैस्टर ऑयल को पूरे 2 से 3 दिन चूल्हे में गर्म करते है। गर्म करने के बाद में इसे ठंडा किया जाता है। इसे जब ठंडा किया जाता है तो यह रबर के समान हो जाता है।
फिर इस रबर के समान संरचना को ही अलग अलग कलर डालकर उकेरा जाता हे। जिन कलर का इस्तेमाल इस आर्ट को बनाने में किया जाता है वह पूरे नेचूरल होते है। जब रोगन बनाकर प्रेपेयर हो जाता है तो इसे पानी में रख दिया जाता है।
किसी भी रफ स्केच को बनाने की नहीं होती है आवश्यकता
इस रोगन आर्ट को बनाने के लिये एक 6 इंच के लोहे के रॉड को उपयोग में लाया जाता है। इस रॉड के सहारे ही रंग को रगड़ के धागे के समान तार निकाला जाता है। इसकी धागो का उपयोग कपड़ो में डिजाइन देने के लिये किया जाता है। 25 वर्ष के अब्दुल का कहना है इस आर्ट को बनाते हुये उसने अपने दादा जी को देखा था।
With Gaffoorbhai Khatri, from Nirona, who won the Padmashri for Rogan art, an unique art where paste made from boiled castor oil and vegetable dyes is applied on a cloth with a metal styles. Gafoorbhai’s painting of the ‘Kalpavriksha’ was gifted by @narendramodi to Obama in 2014. pic.twitter.com/42VoWujQkp
— Shefali Vaidya. 🇮🇳 (@ShefVaidya) February 1, 2019
अपने दादा जी को यह करता देखा ही अब्दुल के मन मे इस कला को तथा दादा के सपने को आगे बढ़ाने का हुआ। अब्दुल कहते है रोगन आर्ट को कपडे में उकेरने के लिये किसी भी प्रकार का रफ स्केच बनाने की जरूरत नहीं होती है। इस आर्ट के लिये डायरेक्ट कपड़े पर धागो का इस्तेमाल करके अपने मन की इमेंज को उतारा जाता है।
परिवार को अब तक मिल चुके है 30 अवॉर्ड
इस आर्ट को बनाने के लिये समय बहुत ही ज्यादा लगता है। इस आर्ट से अगर कुछ बनाना हो तो 1 से डेढ साल का समय लग जाता है। यही कारण है की यह कला बहुत ही महंगी बिकती है। इससे बनी एक पेंटिंग 15000 से शुरू होती है तथा 30 लाख तक जाती है।
ROGAN ART: GUJARAT
Rogan is a form of textile painting which uses a rich, brightly coloured paint made from castor oil and natural colors.
The term Rogan means ‘Oil-based’ in Persian.
Initially Rogan Art was sustained by local animal herder families and farming communities. pic.twitter.com/HRPpKCeq5v— Jaya_Upadhyaya (@Jayalko1) February 1, 2021
उनके अनुसार इस कला को फिर से जीवित करना उनके लिये आसान नहीं था। शुरू में तो पेंटिंग महंगी होने के कारण कोई भी ग्राहक उन्हें नही मिलता था। इसी वजह से प्रारंभ में उन्होंने रेडियो पर काम भी किया।
पहचान मिलते ही उनके आर्ट के ग्राहक बढ़ते चले गये। जिससे कला का विस्तार होता गया। परिवार का कहना है कि पूरे विश्व भर में इस कला के विस्तार के लिये उन्हें अब तक कुल 30 आवॉर्ड राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मिल चुके है।



