देश के इस शहर में रहने वाले इस शख्स ने ऐसा अनोखा घर बनाया, जो इको फ्रेंडली है, खर्चा भी बहुत कम

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Eco friendly home
All About Eco friendly home Bengaluru Sustainable. This man built Eco friendly Home with greenness and nature friendly in Karnataka.

Bengaluru: हम इंसान प्रकृति से कितना खिलवाड़ कर रहे हैं, धरती से पानी का स्तर कम होता जा रहा है। जंगल ख़त्म किये जा रहे हैं, बड़े-बड़े शहर बस गए हैं। पहाड़ो की खूबसूरती से खिलवाड़ हो रहा है, जो हमारे लिए बहुत नुक्सान देय होने वाला है।

ऐसे में हमे ज़रूरत है की जितना हो सके हम प्रकृति के बारे में सोचे और कम से कम नुकसान करें, लेकिन शहर में हालत ये हो गयी है। ना पेड़ बचे हैं ना तालाब या कुए रह गए, सब पानी की कमी के चलते सुख रहे हैं और उनमे शहर बसता चला जा रहा है।

ऐसे में अगर प्राकृति के लिए कुछ करना है, तो आपको ज़िन्दगी में बहुत बदलाव लाने की ज़रूरत है, लेकिन ये सभी लोग नहीं कर पाते, हम आपको ऐसे एक व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने ये बड़ा कदम उठाया है।

घर बनाने में हर बात का किया ध्यान

अपनी जीवन शैली को लेकर सतर्क रहने वाले चोक्कलिंगम (Chokkalingam) और उनका परिवार लगभग 15 सालों से अपनी जीवनशैली को प्रकृति के अनुरूप रहने के लिए कोशिश कर रहे हैं। एक इको फ्रेंडली घर में रहते हैं और बिजली के लिए सोलर सिस्टम लगाया है और पुरे साल में बारिश का लगभग छह महीने में संरक्षण कर के पानी इस्तेमाल करते हैं।

चोक्कलिंगम ने बताया, लगभग 15 साल पहले हमने अपना घर बनाने का प्लान किया था और हमने यह विचार किया कि हम अपने कल्चर के मुताबिक और प्रकृति के अनुरूप घर बनाएंगे। जिसमें हमने इको फ्रेंडली रॉ मटीरियल का इस्तेमाल ज्यादा किया।

छत व फर्श और दीवार भी ऐसी बनायीं की जितना हो सके हम प्रकृति के अनुसार काम कर सके, हमारा घर 3500 स्क्वायर फ़ीट एरिया में बना पूरी तरह इको फ्रेंडली है। साथ ही, हमारा रहन-सहन भी ऐसा है, जितना हो सके प्रकृति पर कम से कम नुक्सान हो।

मिट्टी से बनवाया है अपना घर

अपने घर का निर्माण इन्होने आर्किटेक्ट शेरिन बालचंद्रन की मार्गदर्शन में बनवाया है। पत्थरो से बना दरवाज़ा आपको घर के शुरुआत में ही देखने मिलता है, चोक्कलिंगम का कहना हैं कि इस दरवाजे को ‘ड्राई मेसनरी तकनीक’ (Dry Masonry Technique) से बनाया गया है।

इसमें पत्थरों को मोर्टार के बिना ही लगाया है। यह एक ट्रेडिशनल टेक्नोलॉजी है और आजकल ये बहुत कम देखने को मिल रही है। गार्डन है जो दरवाजे के दोनों तरफ है, गार्डन से होते हुए घर के अंदर जाया जा सकता है।

उनके घर में भी बिजली वाली घंटी नहीं है। बल्कि साधारण घंटियों को ही इस तरीके से लगाया है कि बाहर वाली घंटी बजते ही अंदर वाली घंटियां भी बजने लगती हैं और इस से किसी के आने का पता चल जाता है । उनके घर के बीच में आँगन बनाया है।

घर की डिजाइन कुछ इस प्रकार है

घर में लिविंग रूम, पूजा घर रसोई डाइनिंग रूम और दो बैडरूम ग्राउंड फ्लोर पर बने हैं, फर्स्ट फ्लोर पर रूम अटैच्ड बाथरूम के साथ हैं और साथ ही बालकनी भी बनी है ट्रेडिशनल चिमनी रसोई में लगी हुई है, जिसमे बिजली की ज़रूरत ही नहीं पड़ती है।

दीवारों पर किसी भी तरह का कोई पेंट या पुट्ठी का काम नहीं कराया है। पूजा घर में गुंबद बनायीं है और कुछ कमरों की छत ईंट से बनवायी हैं, मैंगलोर टाइल्स इसके ऊपर बिछा के फर्श बनाया हैं। पुराने खिड़की-दरवाजों को अपने घर पर इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकता है। लकड़ी के अन्य सारे काम रीसायकल लकड़ी से हुए हैं बाहर कमरे के दरवाज़े पर पुरानी मारुती कार का दरवाज़ा लगाया है।

सौर ऊर्जा पर घर की बिजली चलती है

घर बनाते समय ही इन्होने सोच लिया था की बोर्ड की बिजली नहीं चलायेंगे, इसलिए उन्होंने सोलर सिस्टम तैयार कराया और 3 किलो वाट का ऑफ ग्रिड सिस्टम लगाया ताकि पंखा लाइट और सारे उपकरण चल सके। घर की छत पर वेंटीलेटर भी बनाया गया है, जो गर्मी में और सर्दी में इस तरह उपयोग करते हैं की घर में अंदर टेम्परेचर सामान्य बना रहता है।

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