Friday, August 6, 2021
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गरीब किसान के बेटे ने अब्दुल कलाम की किताब पढ़कर ISRO में वैज्ञानिक बन किया नाम रौशन

File Photo

Bhopal: गरीब माँ बाप अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए मजदूरी करते है। अगर बेटा उनके सपनों को पूरा कर दे तो माता पिता को हर जगह की खुशी मिल जाती है। एक Success स्टोरी जैसे ही मजदूर पिता ने सुना कि उनका बेटा एक बड़ा वैज्ञानिक बन गया है, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू बरस पड़े।

इन आंसू की कीमत मजदूर माता पिता ही समझ सकते है जिन्होंने दिन रात मेहनत करके अपने बेटे को पढ़ाया। एक पिता जिसने अपने बेटे को पढ़ा-लिखा कर वैज्ञानिक बनाया। उसी ISRO में जहां से भारत के पूर्व राष्ट्रपति मिसाइलमैन एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने सफर को स्टार्ट किया था।

सोमनाथ नंदू माली, पंढरपुर तहसील के सरकोली का एक युवक आज ISRO में वैज्ञानिक बन कर गांव का नाम रोशन कर दिया। गांव के एक स्कूल में पढ़ाई से इसरो तक का सफर बड़ी ही कठिन परिस्थितियों में तय करने वाले सोमनाथ बहुत से लोगों के लिए एक प्रेरणादायक हैं। सोमनाथ की शिक्षा के के लिए पिता, मां और भाई ने खेतो में मजदूरी तक की।

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में पैदा हुए सोमनाथ माली ने ISRO में वैज्ञानिक बनकर अपने परिवार और इलाके का नाम रौशन कर दिया है। 2 जून को उनका चयन केरल के तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में एक सीनियर वैज्ञानिक के तौर पर हुआ है। सोमनाथ महाराष्ट्र के पहले छात्र हैं, जो ISRO में वैज्ञानिक के रूप में चयनित हुये।

मीडिया में दिए इटरव्यू में सोमनाथ ने बताया कि हालही में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कंप्लीट किया है और फिलहाल दिल्ली आईआईटी Delhi IIT से मैकेनिकल डिजाइन कर रहे हैं। सोमनाथ ने बताया कि साल 2016 में उन्होंने इसरो ISRO में आवेदन किया था। लेकिन तब वह ISRO का रिटन परीक्षा पास नहीं कर सके थे।

गांव के एक स्कूल में पढ़ने से लेकर ISRO में वैज्ञानिक बनने तक, सोमनाथ का सफर बहुत कठिन संघर्षो से गुजरा है। समाज के एक वंचित वर्ग से संबंध रखने वाले, सोमनाथ के माता-पिता और भाई ने सोमनाथ की अच्छी शिक्षा देने के लिए किसानी से लेकर मजदूरी भी की।

सोमवाथ ने सातवीं की पढ़ाई जिला परिषद प्राइमरी स्कूल से और 10वीं क्लास अपने गांव के सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। सोमनाथ ने 11वीं कक्षा में पंढरपुर के KBP कॉलेज में एडमिशन लिया था। गेट परीक्षा में 916 रैंक हासिल करते हुए उन्हें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में मैकेनिकल डिजाइनर के तौर पर चुना गया था। सोमनाथ के संघर्ष और मेहनत की कहानी सबको प्रेरणा देने वाली है।

उन्होंने कभी हार नही मानी। उनके परिवार वालो ने उनके हौसले को बनाये रखा।कब्जी उनका हौसला कम नही होने दिया। उन्होंने गांव में जिला परिषद प्राइमरी स्कूल से 7वीं और सेकेंडरी स्कूल से 10वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद 11वीं की पढ़ाई शास्त्र शाखा के पंढरपुर स्थित केबीपी कॉलेज से की। साल 2011 में 81 फीसदी अंकों के साथ बारहवीं कक्षा पास करने के बाद सोमनाथ बी टेक के लिए मुंबई चले गए। उनकी सफलता की कहानी सभी के लिए एक प्रेरणा दायक है।

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