
Bhopal: भगवान ने यदि किस्मत में बुरा होना नही लिखा है, तो कोई भी उसका बुरा नही कर सकता फिर चाहे काल ही क्यों ना हो, कहते हैं मां अपने बच्चों की जान बचाने के लिए के कुछ भी कर सकतीहै। हर मुश्किल परिस्थितियों का भी डट कर सामना कर सकती है।
फिल्मों में मां की ममता के बहुत से किस्से देखे, सुने होंगे लेकिन आज एक ऐसी सच्ची कहानी बताने जा रहे हैं जहां एक मां की पुकार ने उसके बेटे के काल को मात दे दी। एक 6 साल का बच्चा जिसे डॉक्टर ने प्राणहीन घोषित कर दिया था, मां के बार बार पुकारने पर जीवित हो उठा।
बच्चा बहादुरगढ़ के किला मोहल्ला का रहने वाला कुनाल शर्मा (उम्र 6 वर्षी) है। बच्चे की मां का नाम जाह्नवी है। पिता हितेश और दादा विजय शर्मा हैं। बच्चे की ताई अन्नू, जो कि जाह्नवी के साथ रोते हुए अस्पताल से लाए गए डॉक्टर के प्राणहीन घोषित करते ही सब बच्चे को दुलारने लगे थे। पड़ोसी सुनील भी छाती दबाकर उसे जिंदा करने की कोशिश कर रहा था।
काल को चकमा देकर, जिं’दा होने वाले सात साल के इस मासूम का परिवार बहादुरगढ़ के किला मुहल्ला का रहने वाला है। परिवार के मुखिया विजय कुमार शर्मा, राजू टेलर के नाम से मेन बाजार में कपड़ा सिलाई की दुकान चलाते हैं। उनका बेटा है हितेष भी इसी कपड़े की दुकान पर काम करता है। काल से अपने प्राण वापस लाने वाला बच्चा, हितेष का पुत्र कुनाल है। पिछले महीने कुनाल को बुखार आ गया था।
जांच में टाइफायड पाॅजिटिव आया। दवा दिलाई मगर ठीक नहीं हुआ। 25 मई को कुनाल को दिल्ली के एक बड़े हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। मगर स्थिति लगातार खराब होती चली गई। आखिर में उसकी सांस लगभग थम चुकी थी। डाक्टरों ने परिवार को बोला कि कुनाल को वेंटीलेटर पर रखना पड़ेगा, मगर कोई आशा की किरण नहीं है। परिवार की भी आंखे भर आई थीं। बच्चे को प्राणहीन मानकर परिवार घर ले आया।
जब बच्चे के पिता कुणाल को लेकर अपने साले के घर पहुंचे और वहीं पर उसका अंतिम संस्कार करने की तैयारी चल रही थी लेकिन दादी ने जिद करते हुए कहा कि उसे अपने पोते को एक बार देखना है और उसे पैतृक घर पर लाया जाए। तब कुणाल के पापा उसे घर लेकर आये।
अगर दादी अगर कुणाल का चेहरा देखने की जिद ना करती, तो कुणाल का अंतिम संस्कार हो चुका होता। कुछ देर बाद कुणाल के शरीर में कुछ हरकत दिखी तो परिवार वालो को एक आशा की किरण दिखाई दी। इसके बाद पिता हितेश ने बच्चे का चेहरा चादर की पैकिंग से बाहर निकाला और अपने लाडले को मुंह से सांस देने लगे।
कुछ देर बाद जब कुणाल के शरीर में कुछ अजीब सा हिलने का महसूस हुआ, तो पड़ोसी सुनील ने बच्चे की छाती पर दबाव देना शुरू किया। इसके बाद मोहल्ले के लोग बच्चे को 26 मई की रात को उसे रोहतक के एक प्राइवेट अस्पताल में ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे 15 फीसदी ही बचने की संभावना बताई पर वह धीरे-धीर ठीक होने लगा, अस्पताल में बच्चे की तेजी से रिकवरी हुई और फिर 20 दिन बाद वो पूरी तरह ठीक होकर मंगलवार को घर पहुंच गया।
उसे देखकर मां की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बच्चे को देखने अड़ोसी-पड़ोसी एकत्रित होने लगे। फिर पूरे गांव में सुर्खियों का विषय बन गया हर किसी की जवान पर बच्चे का जिक्र था। गांववालों को आश्चर्य होने लगा। दादा ने इसे चमत्कार से कम नही बताया।



