बिहार के बालक ने अंतरिक्ष में खोजें 10 क्षुद्रग्रहण, 11वीं कक्षा के इस लड़के की नासा ने भी तारीफ की

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Bihar student Shreyas
11th class students of Bihar discovered 10 asteroids. Bihar student Shreyas selected for NASA Citizen Science Program.

Patna: देशभर में युवा तरह-तरह का काम करके देश भर में नाम कमा रहे है। हर इंटेलिजेंट छात्र चाहता है की उसका नाम दुनिया में हो इसी लिए वह काफी ज्यादा मेहनत करता है। हर युवा की ख्वाहिश होती है कि वह अपने क्षेत्र में इतना सफल हो सके कि दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश कर सके।

भारत के हर राज्य में ढेर सारी प्रतिभा छिपी हुई है, जो एक बेहतरीन मंच मिलने पर उभर कर सामने आते हैं। आज के इस लेख हम आपको बिहार (Bihar) की उन प्रतिभाओं के बारे में बताएंगे, जिसने अंतरिक्ष में 10 शुद्र ग्रह की खोज कर बिहार का नाम रोशन किया, आइए जाने उन प्रतिभाओं के बारे में।

बिहार के बेटों ने की 10 क्षुद्रग्रह की खोज

बिहार राज्य भारत का सबसे गरीब राज्य माना जाता है, परंतु इसके बाद भी बिहार में कई प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभाओं से न केवल अपने राज्य का बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। हाल ही में एक खबर मिली है कि बिहार के रहने वाले दो युवक जिनका नाम हर्ष और श्रेयस बी चंद्रा है। जिनका चयन कुछ दिन पहले नासा (NASA) में आयोजित एक प्रोग्राम में हुआ था।

भारत से 6 बच्चे क्षुद्र ग्रह की खोज के लिए चुने गए थे। इनमें से दो बच्चे बिहार के थे और इन्हीं 2 बच्चों ने इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलेबोरेशन (IASC) के द्वारा दस क्षुद्र ग्रह खोज निकाले है।

अब नासा ने यह घोषणा की है कि उन 2 बच्चों के द्वारा खोजे गए क्षुद्रग्रहों का नामकरण भी उन्हीं बच्चों के नाम पर किया जाएगा। साथ ही करीब 2 वर्षों तक रिसर्च जारी रहेगी। उसके बाद नासा की तरफ से इन बच्चों को अस्थाई प्रमाण पत्र और छात्रवृत्ति की सुविधा दी जाएगी। साथ ही वे नासा की तरफ से सम्मान के पात्र भी हैं।

विज्ञान में रुचि रखने वाले छात्र और व्यक्ति होते हैं शामिल

नासा की तरफ से सिटीजन साइंस प्रोग्राम (NASA Citizen Science Program) आयोजित किया गया था, जिसके तहत इंटरनेशनल एस्टॉनोमिकल रिसर्च कोलेबोरेशन एक कैंपेन लगाया जाता है। कैंपेन में विश्व भर के व्यक्ति शामिल होते हैं, जो विज्ञान के रिसर्च विभाग में रुचि रखते है।

आपको बता दें नासा का यह प्रोग्राम देश-विदेश दोनों के लिए होता है साथ ही इनमें छात्रों के साथ साथ पीएचडी होल्डर भी इस प्रोग्राम में भागीदार होते हैं। आप सोच सकते हैं कि छोटे-छोटे छात्राओं के साथ अनुभवी व्यक्तियों का कंपटीशन होता है।

यह प्रोग्राम अंतरिक्ष के हर छोटी-बड़ी गतिविधियों को उन छात्र-छात्राओं के द्वारा नजर रखने के लिए आयोजित किया जाता है। छात्र-छात्राएं अंतरिक्ष में ग्रहों की दशा को और किस दिशा में क्षुद्र ग्रहों (Asteroids) का गमन हो रहा है इन सभी चीजों पर छात्रों द्वारा नजर रखी जाती है।

किस तरह काम किया जाता है इस बारे में दी जानकारी

बिहार राज्य के गायघाट क्षेत्र के निवासी हर्ष कक्षा 11वीं में विज्ञान संकाय के छात्र हैं। हर्ष से बातचीत के दौरान पता चला कि नासा ऐसे कार्यक्रमों को आयोजित करते हैं जिसमें अंतरिक्ष से संबंधित जानकारी और खोज में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह खास अपॉर्चुनिटी होती है।

इसमें रुचि रखने वाले छात्राओं के द्वारा एक रजिस्ट्रेशन किया जाता है, उसके पश्चात एक टेस्ट लिया जाता है उसको पास करने के बाद ही विद्यार्थी नासा के इस प्रोग्राम के लिए चयनित होता है। चयनित होने के बाद छात्रों को एक ऐप दिया जाता है जिसके माध्यम से वे अंतरिक्ष की गतिविधियों पर ध्यान रखते हुए उसकी रिपोर्ट नासा के अधिकारियों तक भेजी जाती है।

15 दिन के भीतर चुने गए थे श्रेयस

श्रेयस (Shreyas) के द्वारा मिली जानकारी के अनुसार आप जब भी अंतरिक्ष में किसी भी प्रकार की हलचल देखते हैं, तो आपको उसकी रिपोर्ट नासा की एक वेबसाइट से देनी होती है। उनका कहना है कि उन्होंने समूह में एक क्षुद्र ग्रह को खोज निकाला है।

बिहार राज्य के अंतर्गत आने वाला औरंगाबाद शहर के निवासी श्रेयस एक इंजीनियरिंग के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि जुलाई के महीने में उन्होंने इस कैंपेन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था जिसके 15 दिन के भीतर ही उनका चयन हो गया। वे अपनी इस उपलब्धि से काफी खुश है।

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