शख्स अमेरिका की अच्छी जॉब छोड़कर भारत लौटा और यह स्टार्टअप शुरू कर 600 करोड़ बिज़नेस बना लिया

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Peyush Bansal Lenskard
Success Story of Peyush Bansal Who is the founder and CEO of Lenskart. He is also a judge of the famous Indian Shark Tank.

Photo Credits: Peyush Bansal On Social Media

Bangalore: अक्सर लोग समझ नही पाते की उन्हे अपने भविष्य में क्या करना है। और इसी के चलते वे अपना चुनाव गलत कर लेते है और बाद में पछताते है। हर बार किया गया निर्णय सही नही होता कभी कभी हम गलत भी हो जाते है। दुनिया में कोई भी काम आसान नहीं है परंतु नामुमकिन भी नही है।

इंसान हर वो काम कर सकता है, जो संभव है बस मेहनत और पूरी ईमानदारी से काम करने की जरूरत है। हर किसी के जीवन में उतार चढाव आते है। जब तक जीवन में संघर्ष नहीं होता तब तक जीवन खाली खाली सा लगता है।

आज इस पोस्ट में हम एक ऐसे व्यक्ति की बात करेंगे जो अमेरिका (America) में एक सबसे प्रसिद्ध कंपनी में काम करता था, परंतु माइक्रोसॉफ्ट कंपनी से काम छोड़ इंडिया लौटा, खुद का स्टार्ट अप (Startup) करके करोड़पति बन गया। इस व्यक्ति का नाम पीयूष बंसल (Peyush Bansal) है को दिल्ली के निवासी है। आइए जानते है उनकी संघर्ष की कहानी।

पीयूष के संघर्ष से भरे दिन

आज हम इस पोस्ट के जरिए बात करेंगे दिल्ली के निवासी पीयूष बंसल की। पीयूष बंसल ने इस प्रकार का व्यापार प्रारंभ किया जिसे उसे पहले किसी ने आजमाया भी नही था। परंतु पीयूष ने इस व्यापार को शुरू करने से पहले उस व्यापार की हर मजबूत और कमजोर कड़ी की जांच कर ली थी।

ऑनलाइन चश्मा बेचने का व्यापार (Online Eyeglasses Selling Business) पीयूष बंसल के द्वारा वर्ष 2010 में प्रारंभ किया। इस व्यापार को लेंसकार्ट (Lenskart) नाम दिया। व्यापार के शुरुआती दिन बहुत ही मुश्किल रहे। पीयूष को अपने इस व्यापार को बनाने में बेहद संघर्ष करना पड़ा। परंतु पीयूष इन मुश्किलों से डगमगाई नही।

आज आप उनकी मेहनत का परिणाम देख सकते है। पीयूष बंसल की कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) की नेट कीमत 1000 करोड़ डॉलर से भी ज्यादा हो चुकी है। आज देश के सफल व्यापारी की लिस्ट में सबसे ऊपर पीयूष बंसल का नाम दर्ज है।

पिता चाहते थे की बेटा खूब बड़ा आदमी बने

पीयूष बंसल दिल्ली के एक शिक्षित और समृद्ध परिवार में जन्मे है। इनके पिता पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट थे। पीयूष के पिता जी की शुरू से ही ख्वाहिश थी की उनका बेटा अच्छी तरह पढ़ लिख कर उनकी तरह एक बड़ा और नेक इंसान बने।

पीयूष की प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने के बाद उनके पिता ने उच्च शिक्षा के लिए उन्हे कनाडा भेज दिया। वहां से पीयूष ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर डिग्री प्राप्त की और अपनी पहली नौकरी माइक्रोसॉफ्ट कंपनी जो पूरी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है यहां पर पीयूष को काफी बड़ा लगभग लाखो के पैकेज पर काम मिला।

परंतु वे अपनी नोकरी से जरा भी खुश नहीं थे। वे खुद कंपनी के मालिक बनना चाहते थे। इसलिए वे वर्ष 2007 में भारत लौट आये। जब उन्होंने बताया कि वे नोकरी छोड़ कर भारत आये तब उनके पिता उनसे बेहद नाराज हुए।

पिता नही चाहते थे की पीयूष यह काम करे फिर बाद में मान गए

पीयूष के वापस लौट आने पर उनके पिता नाराज हुए तो उन्होंने अपनी सारी बात रख कर पिता जी को समझाया तो उनके पिता बात को समझते हुए अपनी सहमती दी और पीयूष को अपने स्टार्टअप का शुभारंभ करने के लिए कहा। जिससे पीयूष भी अपने बिजनेस को जमाने में जी तोड़ मेहनत करने लगे। उनकी मेहनत और बिज़नेस के लिए लगनसार होने से ही उनके पिता ने उन्हे इस काम की आज्ञा दी।

ये बात उस समय की है जब भारत में ई-कॉमर्स मात्र एक कॉन्सेप्ट था और पीयूष भी पहली बार इस क्षेत्र में उतर रहते वे भी इस क्षेत्र में अपना नाम स्थापित करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले एक वेबसाइट का निर्माण किया जिसका नाम सर्च माय कैंपस डॉट कॉम था। पीयूष के द्वारा निर्मित यह वेबसाइट थी, जिसे उन्होंने छात्रों के लिए बनाई। इस वेबसाइट (Website) के माध्यम से स्टूडेंट हॉस्टल से लेकर खिताबों और पार्ट टाइम जॉब की जानकारी देख सकते थे।

आईवेयर ने दिलाई सफलता

इस काम में कामयाब होने के बाद उनके हौसले मजबूत हुए। परंतु उनकी यह सफलता उनकी उम्मीद के जितनी नही थी। इसी सोच के चलते उन्होंने एक बार में ही चार वेबसाइट बनाई और उन पर वर्क करना प्रारंभ किया। ये वेबसाइट आईवियर, ज्वेलरी, घड़ी और बैग् के लिए थी।

पीयूष ने इन चार वेबसाइट में सबसे ज्यादा आई-वियर पर काम किया और उन्हें उम्मीद से ज्यादा सफलता मिली। आज पुरे देश में लेंसकार्ट के करीब 1500 से भी अधिक आउटलेट बनाए जा चुके है। फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम कर पीयूष ने लेंसकार्ट का पूरे देश के हर हिस्से में विस्तृत किया।

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