
Baran: जैसा कि हम जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। इस देश में 80 फ़ीसदी युवा किसान है और अपनी जीविका खेती-बाड़ी से चला रहा है। वर्षों से चली आ रही पारंपरिक खेती वर्तमान समय में किसानों को धीरे-धीरे नुकसान की तरफ ले जा रही है। बढ़ते प्रदूषण और लगातार वनों की कटाई से पर्यावरण और मानसून अस्त-व्यस्त हो गया है।
फल स्वरूप जो फैसलो की किसी समय अच्छी पैदावार हुआ करती थी। वह पैदावार धीरे-धीरे कम होती जा रही है। और पारंपरिक खेती का स्थान आज की वर्तमान और आधुनिक खेती ने ले लिया है। वर्तमान समय में किसान भाई पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक खेती के तहत महंगी फल सब्जी उगा रहे हैं, जो उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहे हैं।
आधुनिक खेती के तहत लोग जैविक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने में मदद कर रही है और वैज्ञानिकों की कई तकनीकों का इस्तेमाल हो रहा है, जो धीरे-धीरे कृषि को सवार रही है। आज इस लेख में हम आपको एक ऐसे व्यक्ति की कहानी बताएंगे जिसने खेती जगत में नवाचार लाकर उसके जैसे कई किसानों की मदद की है।
किसान जुगुल किशोर की कहानी
जानकारी के अनुसार राजस्थान राज्य के बारां (Baran) जिले के अंतर्गत आने वाला नाहरगढ़ गांव (Nahargarh Village) के रहने वाले किसान भाई जुगल किशोर (Jugal Kishore) ने कृषि जगत में नवाचार लाया है। बताया जा रहा है कि किसान भाई जुगल किशोर ने पॉली हाउस का निर्माण कर खीरे की खेती करने का निर्णय लिया और उसमें सफल रहे। जुगल किशोर के इस प्रकार की खेती से आसपास के कई किसानों को लाभ हुआ है।

बताया जा रहा है कि पारंपरिक खेती से किसानों को काफी ज्यादा नुकसान होने लगा था। लगातार यूरिया और रसायन का उपयोग होने से जमीन में उर्वरा शक्ति नष्ट हो गई है, फल स्वरुप अनाज की उपज नहीं हो पा रही। ऐसे में किसान भाइयों को लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा था। परंतु खीरे की खेती से अब वे अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं।
जुगल बने अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
बताया जा रहा है कि जुगल किशोर 2000 वर्ग मीटर में पॉली हाउस (Polyhouse) का निर्माण किया है और उस पॉलीहाउस में खीरे की खेती (Cucumber Farming) कर रहे हैं। इस खीरे की खेती से उन्हें काफी ज्यादा लाभ हो रहा है। जुगल किशोर ने खुद तो कमाई का जरिया ढूंढा ही साथ में आसपास के किसानों को भी एक अच्छी रकम कमाने का तरीका सिखाया है। जिस वजह से वह उन किसानों के लिए ईश्वर समान हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि जुगल किशोर 1 वर्ष में दो बार इस पॉलीहाउस में खीरे की फसल लगाते हैं और उन फसल से लागत निकालकर 5 से 600000 RS सालाना कमाते हैं। 1 वर्ष में पॉलीहाउस से करीब 50 से 60 टन खीरे प्राप्त होते है। पॉलीहाउस खेती की वह पद्धति है, जिसमें कम जमीन मिट्टी और कम लागत में अच्छा खासा मुनाफा कमाने वाली फसल प्राप्त होती है, इसीलिए ज्यादातर किसान पॉलीहाउस का निर्माण कर आधुनिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।
किसानों का आधुनिक खेती की तरफ रुझान
जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि किसानों का अब आधुनिक तेज खेती की तरफ काफी ज्यादा रुझान समझ में आ रहा है। खेती किसानी हमारे भारत के 80 फ़ीसदी युवाओं की आमदनी का जरिया है। कई परिवार खेती-किसानी से पल रहे हैं, परंतु मौसम की मार और मृदु भूमि के कारण खेती करना आसान नहीं रह गया है।

ज्यादा लागत और कम मुनाफे के कारण किसान भाई आत्मह-त्या करने पर भी मजबूर हो रहे हैं, ऐसी स्थिति में आधुनिक खेती ने कृषि क्षेत्र में नवाचार लाकर किसानों को एक बार फिर जीवनदान दिया है। आधुनिक खेती में किसानों को खेती की नई पद्धतियां सिखाई जाती है। जिससे किसानों को काफी लाभ प्राप्त हो रहा है। बताया जा रहा है कि राजस्थान राज्य के अंचल नाहरगढ़ के रहने वाले किसान जुगल किशोर मंगल को इस खीरे की खेती से काफी अच्छा लाभ हो रहा है।
वर्ष 2019 में शुरू की पॉलीहाउस से खीरे की खेती
जुगल किशोर मंगल ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि किसानों को पारंपरिक खेती करने में काफी सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे पहले तो उनके साथ यह समस्या है कि लागत ज्यादा लगती है और मुनाफा कम होता है। ऐसी स्थिति से निजात दिलाने के लिए उन्होंने आधुनिक खेती को बढ़ावा दिया है।

वे बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2019 में उन्होंने पॉलीहाउस का निर्माण किया और सबसे पहले खीरे की फसल लगाई (Cucumber Cultivation In Polyhouse)। उस फसल से उन्हें लगभग 3.5 लाख रुपए का फायदा हुआ। उसके बाद महामारी के कारण उन्हें काफी ज्यादा मुसीबत का सामना करना पड़ा। महामारी से निजात पाने के बाद एक बार फिर उनकी पॉलीहाउस का खीरा पूरे प्रदेश में बिक रहा है और वे अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे।



