
Purnia: कृषि विज्ञान के कारण कृषि क्षेत्र में भी नए-नए चमत्कार हो रहे हैं। एक समय था कि किसान फसलों की अच्छी पैदावार ना होने के कारण आत्मह-त्या करने पर मजबूर थे। कुछ ही समय पहले आए दिन अखबारों में न्यूज़ चैनलों में यह खबर चलती थी कि किसान की फसल खराब हो गई जिस वजह से किसान ने आत्महत्या कर ली।
किसानों को पारंपरिक फसल से लगाई हुई लागत ही प्राप्त नहीं हो रही थी, मुनाफा तो तो दूर की बात। अब किसानों ने अपने रोजगार का रास्ता निकाल लिया है किसानों को समझ में आ गया है कि वे किस तरह इस परिस्थिति से निकल सकते हैं। किसानों ने पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक खेती भी अपनाई है, जिसमे वे कृषि विज्ञान के विशेषज्ञों द्वारा समझाई गई बातों का अनुसरण करके अच्छी खासी फसल उगा रहे हैं।
खेती किसानी भारतीयों का पहला व्यवसाय है, जिससे वे अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। आज हम एक ऐसे ही किसान की बात करेंगे, जिसमें कृषि विज्ञान की बातों का अनुसरण करके विदेशी फल को देसी तरीके से उगाया और उससे लाखों रुपए कमा रहा है।
किसान शशिभूषण सिंह की कहानी
बिहार (Bihar) जिले के अंतर्गत आने बाली पूर्णिया (Purnia) जिले के गांव रानीपतरा के रहने वाले किसान शशि भूषण सिंह ने अपने कारनामे से सबको चौंका दिया। किसान शशि भूषण सिंह बताते हैं कि उन्होंने एक विदेशी फल जिसे जुगनी (Zucchini) भी कहते हैं। इस फल को उन्होंने देसी तरीके से उगाया है।
बताते हैं कि उन्होंने इस फल को उगाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र की मदद ली। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने शशि भूषण को इस फसल को उगाने के तौर तरीके बताएं उन्हीं की मदद से शशि भूषण को यह बीज प्राप्त हुए। वे बताते हैं कि उन्होंने इस बीच को काफी साधारण तरीके से बोया है। उनका कहना है भले ही यह एक विदेशी सब्जी (Foreign seeds) है, परंतु ऐसे उन्होंने काफी साधारण तरीके से याने देसी तरीके (Desi Tricks) से कम देख-रेख में उगाया।
स्वाद और विटामिन से भरपूर है यह सब्जी
शशि भूषण बताते हैं कि जुगनी नाम की यह विदेशी सब्जी स्वाद और विटामिन से भरपूर है। लोगों ने जब इसके विषय में जाना तो बाजार में इसकी काफी ज्यादा मांग बढ़ गई है। दूसरी तरफ यह सब्जी देसी तरीके से ही काफी आसानी से उग जाती है और काफी अच्छी पैदावार होती है मार्केट में भी लोग ऐसे 40 RS प्रति किलोग्राम के हिसाब से खरीद लेते हैं। इसीलिए उन्हें इस फसल से काफी ज्यादा लाभ हो रहा है।
वे बताते हैं जुगनी के एक पेड़ से करीब 4 से 5 किलो सब्जी आराम से निकल जाती है, जिससे वे एक पेड़ से 200 RS कमा लेते हैं। इस सब्जी की फसल को उगाने में कोई ज्यादा लागत नहीं आती जिस वजह से उन्हें इस फसल से मुनाफा हो रहा है।
जाने इस सब्जी के फायदे
किसान शशिभूषण बताते हैं उन्हीं से सब्जी के विषय में जानकारी क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ से प्राप्त हुई। इसके के बाद उन्होंने इस विदेशी सब्जी जुगनी (Exotic Vegetable) के बीच लोकल मार्केट में उपलब्ध कराने के लिए कहा। किसान शशिभूषण बताते हैं कि उन्होंने जुगनी के बीच (Zucchini Seeds) की उपलब्धता से लेकर खेतों में बुवाई तक अपने तरीके का इस्तेमाल किया है।
वे यह भी बताते हैं कि पूरे पूर्णिया जिले में उनके अलावा इस सब्जी की पैदावार कोई नहीं कर रहा है एकलौती हैं जो पूरे जिले में जुगनी की सप्लाई करते हैं। इसी कारण वे कृषि क्षेत्र में कई बार पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। वे बताते हैं कि उन्होंने 25 दिसंबर में इस फसल की बुवाई की थी। 4 से 5 महीने में वे टूटने की स्थिति में आ गए। कृषि विज्ञान के विशेषज्ञ सतीश बताते हैं कि इस सब्जी में ढेरों विटामिंस है जो लोगों को स्वास्थ्य रखने में मददगार है।
जुगनी को लगाने का तरीका
किसान शशि भूषण कहते हैं कि अन्य किसानों को भी इस फसल की खेती करनी चाहिए। साधारण तरीके से अच्छा खासा मुनाफा कमाने के लिए यह फसल काफी उपयोगी है। वे कहते हैं यदि कोई किसान जुगनी की खेती करना चाहता है, तो फसल की बुवाई के पहले खेत को तैयार कर लेना चाहिए।
सबसे पहले खेत की मिट्टी में गोबर और वर्मिनकंपोस्ट हाथ मिला के मिट्टी को तैयार करते हैं। उसके बाद 3 फीट चौड़ाई और 2 फीट लंबाई पर एक बीच का रोपण करते हैं। उसकी कुछ समय बाद पौधा निकलने प्रारंभ हो जाते हैं, उसकी 20 दिन के बाद किसानों को हल्की सिंचाई करनी होती है और पेड़ों पर मिट्टी भी चढ़ाने होती है।
गिरिडीह में जुकिनी की खेती कर रहे हैं किसान, 10 कट्ठा जमीन पर पहली बार की गई खेती। pic.twitter.com/MlrWcN6Fmb
— News18 Bihar (@News18Bihar) December 28, 2022
यदि आपको लगता है आप की फसल में किसी प्रकार की बीमारी है, तो आप कीटनाशक के लिए इंडोफिल 45 का छिड़काव कर सकते हैं। आपको समय समय पर एनपीके और डीएपी का छिड़कब भी करना होता है। शशि भूषण बताते हैं कि जुगनी सब्जी खीरे की तरह दिखाई देती है और यह दो रंगों में चलती है हरी और पीली।




