
Bhagalpur: हर व्यक्ति खेती करना नहीं चाहता। लेकिन कुछ ऐसे भी लोग होते हैं। जो नौकरी से बेहतर खेती मे अपनी उमंग दिखाते है। वह खेती करते हैं, एक नए अंदाज मे। जिससे उनको खेती से ही नौकरी से ज्यादा मुनाफ़ा मिल सके। ऐसे ही एक कहानी सामने आई है। जो खबर है वह बिहार के जिले भागलपुर (Bhagalpur) के एक युवा गुन्जेश गुंजन (Gunjesh Gunjan) की है।
बता दे कि बिहार राज्य मे अब कई शख्स ऐसे है, जो खेती के तरफ़ अपनी रुचि दिखा रहे हैं। अब वह लोग अपनी परंपरागत खेती को छोड़कर एक अलग प्रकार की खेती करने के बारे मे सोच रहे हैं। इन्ही सब युवा मे भागलपुर मे निवास करने वाले गुन्जेश गुंजन भी अब एक नई प्रकार की खेती यानी पपीते की खेती (Papita Ki Kheti) कर रहे हैं।
बता दे कि उन्होने नए तरीके से खेती करने के लिए एव आमदनी अच्छी होने के लिए नई तकनीक से उत्पन्न अच्छी किस्म के बीजों को तलाश करके पपीते की खेती की है। जिससे वह आज लाखो रुपये की कमाई कर रहे हैं।
गुंजेश अपनी पुश्तैनी खेती मे कर रहे हैं नई तरीके से पपीते की खेती
गुंजेश के अनुसार अपनी पुश्तैनी खेती को एक नई तकनीक मे बदलने तक का सफ़र काफ़ी संघर्षशील रहा है। वे बताते है कि उन्हें यहा तक पहुँचने के लिये कई दिक्कतो का सामना भी करना पड़ा। लेकिन गुंजेश की यह मेहनत आखिर रंग लाई।
अब उनकी मेहनत और कमाई सभी के लिए प्रेरणा बन गई है। अब उनकी इस खेती को देखकर लोग पपीते की खेती (Papaya Farming) कैसे करे और केसे लाखो रुपए की कमाई करे यह सब उनसे जानना चाहते हैं।
पपीते की खेती से फ़ल प्रदर्शनी में गुंजेश को प्राप्त हुआ है प्रथम स्थान
गुंजेश बताते हुए कहते हैं कि मेरे परिवार मे मेरे दादाजी और मेरे पिताजी भी पपीते की खेती करते थे। लेकिन वह खेती देशी पपीते की करते थे। जिससे उनको ज्यादा मुनाफ़ा नहीं हो पाता था। पर जब मैने खेती करना प्रारंभ किया, तो मुनाफ़ा ज्यादा होने के लिए खेती करने का तरीका ही चैन्ज कर दिया।
इसके लिए उन्होने एक बेहतरीन किस्म के बीजों की खोज की। ताकि उन्हें अच्छा फायदा हो। अब वह एक सीजन मे लगभग 4-5 लाख रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे है।
इसी बीच वह बताते हैं कि इस पपीते की खेती को वह इतने अच्छे से कर रहे हैं कि उन्हें पटना की फ़ल प्रदर्शनी मे पहला रैंक भी प्राप्त हुआ है। साथ ही वह अन्य फ़ल प्रदर्शनी मे कई बार वह सम्मनित भी हो चुके हैं।
पुणे की ताइवान कम्पनी से आता है पपीते का बीज
गुंजेश के मुताबिक ताइवान की कम्पनी जो कि पपीते के बीजों के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। वह पुणे से इस बीज को डिलीवर करती है। इसमे सबसे अच्छी बात यह है कि इस कम्पनी से पौधे खरीदने पर उधान विभाग की तरफ़ से खेती मे जितनी भी लागत लगी है, उसका 75 प्रतिशत लाभ यह ही देते हैं।
बता दे कि अलग अलग कम्पनियां के तरफ़ से उद्यान विभाग मे कई प्रकार के बीज उपलब्ध रहते हैं। इन विभागो में हर टाइम अन्य प्रकार की नई नई योजना आते रहती हैं। ये विभाग किसानों को नई तकनीक से खेती करने मे मदद करते हैं।
पपीता को मार्केट मे स्वयं जाकर बेचते थे गुंजेश
भागलपुर से तालुक रखने वाले गुंजेश गुंजन बताते हैं कि अपनी पुश्तैनी खेती को एक नई तरीके मे बदलने तक का समय काफ़ी कष्टमय रहा है। वह बताते हैं कि इस पपीते को उन्हे स्वयं ही बाजार मे जाकर बेचना पड़ता था। लेकिन बाद मे यह पपीता सबको पसंद आने लगा तो पपीता को लेने के लिए व्यापारी गुंजेश के खेत तक आने लगे।
देशी पपीते की तुलना मे इस पपीता मे हैं कई खासियत
गुंजेश के अनुसार उनके इस पपीता की बात करे, तो इसकी कई खासियत है। क्योंकि इसके हर एक पौधे मे पपीता का गुच्छा ही लगा होता है। यह पपीता देशी पपीता से दिखने मे सिंदूरी लाल और उससे अधिक मीठा भी होता है।
इसके अलावा यह जल्दी खराब भी नहीं होता है। क्योंकि इस पपीते का पल्व बहुत हार्ड होता है और पकने के बाद भी इसे करीब एक सप्ताह तक स्टोरेज करके रखा जा सकता है।
इस नई किस्म के पपीते को गाइनोडेइशियस पद्धति का फल भी कहा जाता है। इसकी तुलना मे देशी पपीता जल्दी खराब हो जाता है, क्योकि इसकी परत बहुत पतली होती है इसलिए यह ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाता है।



