इन युवाओं के पास कोई नौकरी नहीं थी, बेरोजगारी में ककड़ी की खेती शुरू की और बम्पर कमाई होने लगी

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cucumber farming kakdi ki Kheti
Manipur youths starts cucumber farming and changed their life. These youths have not any job but started kakdi ki kheti.

Imphal: भारत के हर युवा के लिए पढ़ाई लिखाई करना मुश्किल होता है। क्योंकि कुछ युवा अपने पुरखों से चले आ रहे व्यापार आगे भी चलाते है और कुछ युवा अपने घर परिवार को चलाने के लिए मजदूरी करते है ।इसी लिए जरुरी नहीं होता की हर कोई अच्छे से पढ़ लिख कर नोकरी ही करें।

भारत में काफी सारे लोगो की आय किसानी से होती है। अक्सर भारत में लोग ज़मीन को ही सब कुछ मानते है। वे अपने घर की बेटी भी जमीन देख कर ही देते है। लोगो का मानना है कि कृषि एक जुआ है और जो इसे करता है, वो हमेशा नुकसान ही भोगता है।

अब ऐसा नहीं है पहले के किसान जानकारी के आभाव में गलतियां करते थे। परंतु अब किसानों की मदद खुद कृषि के ज्ञाता करते है। वे उन्हें पूरा ज्ञान देते है कि किस वक़्त किस चीज़ की फसल लगानी है और कितना खाद और पानी देना है।

लोगों ने लगातार अपनी जमीनों पर खतरनाक रसायन डालें है, जिससे ज़मीन की उर्वरक शक्ति कम हो गई है ऐसे में कृषि के वैज्ञानिकों ने किसानों को जैविक खाद के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया है। वर्मीकम्पोस्ट जो खेतो के लिए अमृत होता है, इसके इस्तेमाल की बात रखी है।

भारत में हर क्षेत्र में आधुनिक खेती (Modern Farming) की जा रही है, जिससे लोग काफी मुनाफा कमा रहे है। आज हम एक ऐसे ही किसान युवा के एक समूह की बात करेंगे, जिसने ककड़ी की खेती (Cucumber Farming) कर लाखो का व्यवसाय बनाया आइये हम विस्तार से जानते है।

महामारी ने बढ़ाई बेरोजगारी

भारत में पिछले कई वर्षो से बेरोजगारी का आलम छाया हुआ है। ऐसे में आपदा का आना भारत के हर परिवार के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई थी। कई परिवारो में खाने के लाले पड़ गए थे। साथ ही लोगो ने अपनों को भी इस महामारी में खो दिया।

लॉक डाउन से भारत की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई और कई सारे लघु उद्योग बन्द हो गए। ऐसे में लोगो के पास रोजगार भी नहीं और खाने को भी नहीं। ऐसी स्थिति में लोग करे तो क्या करे। पिछले वर्ष मई के महीने में आपदा की दूसरी लहर से बचने के लिए देश में लगे लॉकडाउन से बेरोजगारी की दर बढ़ कर 23.5 प्रतिशत हो गई।

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सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की गणना के अनुसार साल 2021 में अगस्त के महीने में भारत के लगभग 16 लाख से भी ज्यादा युवाओं ने अपनी नौकरी खो दी। इन्ही में से एक है मणिपुर राज्य के लीमाराम गाँव के रहने वाले काफी सारे बेरोजगार ग्रामीण किसान जिन्होंने आज ककड़ी की खेती (Kakdi ki kheti) करने का विचार बनाया और अपने आप को झोंक दिया।

लॉकडाउन में की ककड़ी की खेती का शुभारंभ

इन युवाओं की उम्र करीब 30 से 35 वर्ष है। इन युवा किसानो ने मणिपुर राज्य के उत्लौ क्षेत्र में स्थापित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित ग्रामीण युवा कौशल प्रशिक्षण में हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण में इन युवाओं को ज्यादा पैसे देने वाली सब्जियों की खेती (Vegetable Cultivation) को सुरक्षित तरीके से कैसे की जाए इसकी जानकारी इस प्रशिक्षण के माध्यम से दी गई।

प्रक्षिक्षण के बाद ही आपदा काल के चलते इन युवा किसानों ने 1,250 वर्ग मीटर के क्षेत्र में ककड़ी की किस्म आलमगीर-180 की बिना मौसम के बुबाई कर दी। ककड़ी के बुबाई के करीब एक से दो महीने में करीब 11 बार कटाई करवा कर 1,865 किलोग्राम प्रति 1,250 वर्ग मीटर में उत्पादित की।

लागत से दो गुना मुनाफ़ा कमाया

इन युवाओं ने अपनी लागत से ज्यादा मुनाफा कमाया जिससे वे बेहद ख़ुश है और वे बताते है कि उन्होंने अपनी ककड़ी की फसल में मात्र 11,200 रुपये इन्वेस्ट किये थे और लोकल मार्किट में उन्होंने ककड़ी को 30 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बेचा। जिससे उनकी कुल बिक्री करीब 55,950 रुपये की हुई। उन युवा किसानों को 44,750 रुपये का लाभ हुआ।

अन्य युवाओं की भी मदद की

अब ये युवा अपने साथ और लोगो को भी शामिल कर आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर तरह तरह की सब्जियो की खेती करने का विचार बना रहे है। मार्किट में जिस चीज़ की ज्यादा माँग है जैसे टमाटर, ब्रोकली, मटर, ब्रॉडलीफ सरसों, गोभी, प्याज आदि का उत्पादन कर वे मार्केट में सप्लाई करते है।

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