
Indore: दोस्तों जैसा कि हम जानते हैं कि आज रोजगार कितनी बड़ी समस्या है, जहां एक ओर बड़ी बड़ी डिग्री लेने के बाद भी अच्छी जॉब नहीं मिल पा रही वही खुद का व्यापार करना भी किसी रिस्क से कम नही। आज ये समस्या बड़े शहरों में तो है ही, बल्कि छोटे गांव में तो रोजगार के साधन हैं ही नही ऊपर से गांव में भी कोई व्यापार आसानी से सेट नही किया जा सकता।
इसके चलते आज मछली पालन व्यवसाय (Fisheries Business) एक अच्छा साधन बन के उभर रहा जिससे न केवल बड़ी आमदनी कमाई जा सकती है साथ ही इसे छोटे छोटे गांव में भी डेवेलोप किया जा सकता है। इसलिये सरकार ने भी इस कांसेप्ट को सपोर्ट करने सब्सिडी (Subsidy) का एलान किया है जिससे जो अपना स्टार्टअप करना चाहता है तो उसे मदद मिल सके तो आइये जानते हैं डिटेल्स से।
मछली पालन आसान क्योंकि जरूरी नही किसी तकनीकी मशीनरी की
आइये जानते हैं मछली पालन एक आसान और प्रॉफिटेबल व्यवसाय क्यों माना जा रहा। जहां एक ओर किसी भी बड़े व्यवसाय को शुरू करने बहुत बड़ी लागत के साथ एडवांस मशीन्स की जरूरत पड़ती है, जिसका मेंटेनेन्स भी खर्चीला होता है।
वही दूसरी तरफ मछली पालन हेतु सिर्फ तालाब की जरूरत पड़ती है, जिसे किसान अपने खेत के कुछ हिस्से को इस्तेमाल कर डेवेलोप कर सकता है और जितना चाहे उतना बड़ा तालाब बना के बड़े स्तर पर मछली पालन (Machli Palan) करे। सबसे बड़ी बात इस तालाब को डेवेलोप करने सरकार 52000 से 1 लाख रुपये तक कि सब्सिडी दे रही।
क्या है Pond Scheme या खेत तालाब योजना
मछली पालन के लिये सबसे जरूरी है तालाब और इसे बनाना एक खर्चीला काम है, इसलिये किसानों को इस व्यवसाय हेतु प्रोत्साहित करने सरकार ले के आयी है, पोंड स्कीम तालाब योजना जिसके अंतर्गत 3 किश्तों में 50 प्रतिशत तक की राशि सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर की जायेगी। छोटा तालाब बनाने के लिये 52,500 रुपये मिलेंगे वहीं बड़ा तालाब बनाने हेतु 1,14,200 रुपये तक सब्सिडी के तौर पे किसानों को दिए जा रहे।
नया तालाब बनाने का सबसे बेस्ट समय है जून-जुलाई
हर चीज का एक निश्चित समय होता है, इसमें से एक तालाब तैयार करने का भी है। तो आपको बता दें खेत को सही से खुदाई कर तालाब बनाया जाता है परंतु इसमें पानी भरना एक कठिन काम होता है, इसलिये वैज्ञानिकों की सलाह माने तो बरसात लगने से ठीक पहले हमें तालाब रेडी कर लेना चाहिये।
आज मछली पालन करने हेतु बच्चा छोड़ते हुए pic.twitter.com/dHSsXMJ48f
— Aditya Singh (@AdityaS51291906) July 24, 2022
हम सब जानते हैं कि बारिश में छोटे से छोटे झरने भी बाढ़ का रूप ले लेते हैं, इसी बारिश को तालाब में स्टोर कर ले तो बहुत आसानी से उसे भरा जा सकता है, आज जिन राज्यों में पानी की कमी होती है वहां भी इसी बारिश के पानी को स्टॉप डेम के माध्यम से स्टोर कर खेती के लिये इस्तेमाल करते हैं। पानी विश्व के लिए एक विकट समय है।
टोटल सब्सिडी विभिन्न राज्यों में
तालाब निर्माण से जहां एक ओर मछली पालन व्यवसाय तो बनता ही है साथ में तालाब के होने से जमीन के नीचे का भू जल स्तर भी इनक्रीस होता है, इसलिये सरकार सब्सिडी का लाभ देने में ज्यादा उत्सुक है। जहां राजस्थान सरकार 1200 घन मीटर वाले लघु किसान को लागत का 70 प्रतिशत तक दे रही वही उत्तर प्रदेश सरकार भी तालाब की लागत का 60 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही वही केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के द्वारा अलग से सब्सिडी का प्रावधान किया है।




