
Ajmer: आज बेटियां भी बेटों से किसी भी स्थान में कम नहीं हैं। जहां पहले रूढ़िवादी परम्परा में बेटों को ही घर का सहारा समझा जाता था, लेकिन अब बेटियों भी किसी से कम नही है अपने मजबूत हौसलो, कड़ी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के दम पर परिवार का सहारा बन रही है।
इसका जीता जागता उदाहरण राजस्थान के अजमेर (Ajmer) के एक छोटे से गांव में रहने वाली अंकिता कुमावत। आईआईएम की डिग्री के बाद उन्होंने अपना व्यापार शुरू किया। उन्होंने आँवले से स्वयं च्यवनप्राश (Chyawanprash) बनाया और न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे देश में अपना नाम बनाया।
कहते है, एक डॉक्टर का बच्चा डॉक्टर और एक किसान का बच्चा किसान बनता है, परंतु अंकिता कुमावत (Ankita Kumawat) शिक्षा और ज्ञान के अच्छे इस्तेमाल से एक ऐसा उत्पाद तैयार किया, जो शरीर के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ।
अंकिता का बचपन और उनकी शिक्षा
अंकिता अजमेर के एक छोटे से गांव की निवासी थी उनके पिता इंजीनिअर थे और उनकी माता गृहणी अंकिता बालपन से ही तेज़ बुद्धि, एक्टिव और क्रिएटिव माइंड की थी। उन्होंने अपने स्कूल की शिक्षा गांव से ही पूरी की और 2009 में आईआईएम कोल्कता (IIM Calcutta) से डिग्री ली।
उसके बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में एक अच्छे पैकेज पर जॉब भी मिल गई। लेकिन उनको वो पसन्द नही ऐसी उनके मन मे कुछ और ही करने का जुनून था। आपने इस जुनून के चलते उन्होंने जॉब को नही देखा। उनके दिमाग में स्वयं का व्यापार करने का सपना था। अपने सपनो को उड़ान देना चाहती थी।
खेती से आया बिजनेस का विचार
अच्छे पैकेज पे जॉब मिलने के बाद भी वह स्वयं से सेटिस्फाइड नहीं थी, वह शुरू से एक अच्छे उद्यमी (Business woman) बनने का ख्वाब देखती थी। फिर उन्होंने खेती से अपना व्यापार करने का सोचा, परंतु वह जानती थी की खेती किसानी में मुनाफा और नुकसान दोनों है और लोगो की सोच भी कुछ ऐसी ही थी। परंतु अंकिता ने इस मिथ को अपने हुनर के दम पर खत्म कर दिया उन्होंने आर्गेनिक खेती (Organic Farming) की और लोगो के जरुरत का सामान बनाया।
आँवला की फसल से शुरू किया अपना व्यापार
अंकिता ने बड़े पैमाने में आंवले की फसल लगाई परंतु वह एक दुविधा में थी कि इतने सारे आँवले का इस्तेमाल कहा हो, उन्होंने आँवले से च्यवनप्राश (Gooseberry Chawanprash Busines) बनाने का निर्णय लिया और काम शुरू किया।
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— Manveen D (@MotherOPedia) July 5, 2017
च्यवनप्राश बनाने के लिए और भी इंग्रीडिएंट की आवश्कयता थी जैसे शतावरी, ब्राह्मी, जटामानसी, गोखरू, बेल, कचूर, नागरमोथा, लौंग, जीवन्ती, पुनर्नवा, अंजीर, अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी के पत्ते, सौंठ, मुनक्का, मुलेठी आदि जड़ी बूटी गांव के किसान भाई के पास मिल जाती थी।
इन्टरनेट के ज़रिये च्यवनप्राश बनाने की विधि सीखी
फिर उन्होंने इन्टरनेट के माध्यम से च्यवनप्राश (Homemade Chawanprash) बनाने की विधि देखी और अपना काम शुरू किया अंकिता जी बताती है कि शुरुआत में जब वह उत्पाद बना रही थी। तब उनको बहुत अधिक समस्याओ का सामना करना पड़ा यह काम अकेले का नहीं था, परंतु पहले भी वह आँवले (Gooseberry) से माउथ फ्रेशनर और गौ माता के लिए दवाईया बनाती थी, उसकी विधि वह जानती थी, फिर इंटेरनेट की मदद से उन्होंने अपना उत्पाद तैयार किया।

अंकिता का बनाया ब्रांड (Maatratav Dairy and Organic Farm) आज लगभग सभी ऑनलाइन साइट पर उपलब्ध है। इसकी मांग पुरे राजस्थान (Rajasthan) में है और अंकिता स्वयं की वेवसाइट चला रही है, लगभग पूरे भारत में उनका ब्रांड चल रहा है। उनको इस व्यापार में अभी 15 प्रतिशत लाभ ही हो रहा है। इससे वे अच्छी खासी कमाई भी कर रही है, परंतु अंकिता अभी भी अपनी कोशिश में लगी हुई है।
आर्गेनिक खेती करके और भी उत्पाद बनाने के लिए अग्रसर है। कहते है जिसमे उचाईयों को छूने की काबिलियत होती है, उनके लिए कोई रास्ता कठिन नहीं होता, इस बात का जीता जगता उदाहरण है अंकित कुमावत। आज वे दूसरी बेटियों के लिए एक उदाहरण हैं।



