
Hamirpur: हमीरपुर के जलालपुर मार्ग पर बसे उमरिया गांव की कुल आबादी लगभग ढाई हजार है। यहां के ज्यादातर ग्रामीणों की आमदनी कृषि पर ही निर्भर है। तीन वर्ष पूर्व गांव के ही कुछ किसानों ने प्रयोग के तौर पर तुलसी की खेती (Tulsi cultivation) को प्रारम्भ कीया प्रथम बार में ही उन्हें अच्छा खासा लाभ हुआ। जिसके पश्चात गांव में बड़े स्तर पर इस पौधे की खेती प्रारंभ हो गई।
किसान बेहतर लाभ देने वाली फसलों की ओर अपना रूख कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के इस गांव (Village) के किसान तुलसी की खेती (Tulsi Farming) से कमा रहे हैं, मोटा लाभ। भारत में अक्सर ज्यादातर किसान फसल चक्र की प्रकिया अपनाने को लेकर उदासीन रहते हैं। वर्षो से वे एक ही प्रकार की खेती एक ही तकनीक से करते आ रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से देश के किसान जानकर हो रहे हैं और बेहतर लाभ देने वाली फसलों की ओर रूख कर रहे हैं।
देश में केंद्र सरकार इस वक़्त देशभर में (Medicinal Plants) औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इसी के तहत आयुष मंत्रालय ने अगले वर्श तक 75 लाख घरों पर औषधीय पौधों को पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। तुलसी के पौधे (Tulsi Plaints) भी उन्हीं पौधों में से एक है। वहीं उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक गांव ऐसा भी है, जहां के 90 % किसान तुलसी की खेती (Tulsi Farming) कर लाभ कमा रहे हैं।
सौ दिन में मिलता है एक़ लाख का मुनाफा
उमरिया के पूरन राजपूत 10 बीघे भूमि में तुलसी की खेती (Tulsi Ki Kheti) करते हैं। एक दशक पहले वे आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे थे। परंतु तुलसी की खेती से उनकी आर्थिक स्थिति काफी सुधर गई है। वे बताते हैं कि 10 बीघा भूमि में तुलसी की खेती पर अधिक से अधिक 50 हजार रुपये का खर्च आता है।
Tulsi Farming a new opportunity for marginal farmers . pic.twitter.com/cBVaReYwRL
— amit kashyap (@AmitevaAmit) July 17, 2020
प्रति बीघे से डेढ़ से दो क्विंटल तक की पैदावार हो जाती है। जिसके बाद आर्गेनिक इंडिया नाम की कंपनी हम किसानों से 10 हजार प्रति क्विंटल के भाव से तुलसी खरीदती है। जिससे हमें करीब एक लाख तक का मुनाफा सरलता से हासिल हो जाता है।
जानिए कैसे होती है तुलसी के पौधे की खेती
तुलसी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे ज्यादा अच्छी मानी जाती है। इसकी खेती के लिए सबसे पहले जून-जुलाई माह में बीजों के मााध्यम से नर्सरी तैयार की जाती है। नर्सरी तैयार होने के पश्चात इसकी रोपाई की जाती है। रोपाई के दौरान एक लाइन से दूसरी लाइन की दूरी 60 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 30 सेमी रखनी होती है। पौधे 100 दिनों के भीतर तैयार हो जाते है, जिसके बाद कटाई की प्रकिया का चालु हो जाती है।
When women #farmers have land ownership, access to technology, credit and training, #agriculture productivity goes up significantly. See the glimpses of Tulsi Farming at Barwadih Latehar under #MKSP. More than 250 women farmers are doing Tulsi cultivation in jharkhand. @MoRD_GOI pic.twitter.com/sddTYsGAJ9
— JSLPS, Rural Development Dept, Jharkhand (@onlineJSLPS) September 11, 2018
हमारे देश में तुलसी की पूजा भी की जारी है और कहा जाता है की जिस घर में तुलसी होती है और उसकी पूजा लगातार की जाती है, वहा हमेशा सुख सम्बृद्धि बनी रहती है। तुलसी का वर्णन भारतीय इतिहास और हिन्दू धर्म में भी किया गया है। तुलसी का पौधा उगना भी बहुत आसान है।



