प्राकृतिक आपदा से किसान हुआ बर्बाद, इस तकनीक से खेती कर किसान हुआ मालामाल, कमाए 12 लाख रुपये

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Kesar Ki Kheti
Bundelkhand Farmer Bhupendra doing Kesar Farming and earns 12 lakh rupee. Kesar ki Kheri ke fayde. Organic farmer lives Kesar Cultivation.

Bhopal: भारत कृषि प्रधान देश माना जाता है। लेकिन हर किसी के वश की बात नही है, खेती करना, कुछ तो इसमें मालामाल हो जाते है और कुछ तो सब हार जाते है। प्राकृतिक का सबसे बड़ा रोल होता है, खेती करने में, कभी वारिश तो कभी सूखे पड़ने से सारी फसल नष्ट हो जाती है। लेकिन जो खेती करने की कला सिख गया उसे कोई भी मौसम से कोई फर्क नही पड़ता।

जब किसी इंसान के ऊपर प्राकृतिक की मार पडती है तब अधिकांश वह इंसान निरास होकर हाथ पर हाथ रख कर बेठ जाता है। लेकिन आज हम उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड (Bundelkhand) में प्राकृतिक आपदाओं से बुरी तरह बर्बाद और तबाह हो चुके, किसान के बारे में जानने वाले हैं, जिसने केसर की खेती (Kesar Cultivation) कर नया इतिहास रच दिया है।

खेती करना ऐसी कला है जो किसान को अर्श से फर्श पर ले आती है। किसान को मालामाल होने से कोई रोक नही सकता फिर। ऐसी ही किसान की कहानी (Story) बता रहे है, जो हम सभी को प्रेरित करती है आगे बढ़ने के लिये। केवल एक बीघा खेत में 8 किलो केसर उगा कर उसे 12 लाख रुपयों में बेचकर मोटा मुनाफा कमाया है।

एक बीघा खेत से कमाए 12 लाख रुपये

हमीरपुर (Hamirpur) जिले में बिवांर थाना क्षेत्र निवासी किसान भूपेंद्र (Farmer Bhupendra) ने निरास ना होकर कुछ अलग करने का संकल्प लिया और साहस दिखाते हुए केसर की खेती कर डाली। भूपेंद्र ने हिम्मत जुटाई और अपने डेढ़ बीघा खेत में अमेरिकन किस्म की केसर पैदा करने की ठानी। उन्होंने बाजर से केसर (Kesar) का आधा किलो बीज खरीदा, जो इनको 20 हजार रूपये का मिला और उसकी बुवाई कर डाली।

उन्होंने दिन रात परिश्रम करनी शुरू कर दी। कभी सिंचाई करके तो कभी निराई-गुड़ाई कर डाली। उनकी फसल तकरीबन तैयार है और जब इसकी कटाई होगी, तो इसका फूल 50 हजार से डेढ़ लाख रूपये किलो बिकेगा, साथ ही इसका बीज 40 हजार रूपये किलो बिकेगा।

केसर की खेती (Kesar Farming) करने का मन बनाया

भूपेंद्र की ही भांति बिवांर थाना क्षेत्र के तमाम किसानों ने भी अब अगले वर्ष से केसर की खेती (Kesar Ki Kheti) करने का मन बनाया है। केसर की खेती कर अपनी किस्मत आजमाएंगे और अगर कुछ शानदार परिणाम मिलता है, तो परंपरागत खेती को छोड़ कर कुछ अच्छा करेंगे जैसा भूपेंद्र ने किया है।

बिवांर थाना क्षेत्र के ही एक अन्य किसान रोहित का कहना हैं कि भूपेंद्र ने बिना महंगी खाद के जैविक विधि से केसर पैदा किया है और नतीजा भी हमारे समक्ष हैं। उनका सरकार से आग्रह है कि सरकार इस क्षेत्र में कुछ कैंप लगवाए।

जिसमें किसानों को इस विषय में जानकारी दी जाए और भूपेंद्र जैसे जागरूक किसानों की सहायता से अन्य किसानों को भी इस खेती के विषय में बताना चाहिए, ताकि इस क्षेत्र के सभी किसान भाई भूपेंद्र जैसे जागरूक बन पाए और अधिक से अधिक मुनाफा कमा सके।

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