इंजीनियरिंग पासआउट ने नहीं की जॉब, बकरी पालन करके अच्छी कमाई वाला बिज़नेस बना दिया

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Goat farming Business
South Andaman Engineering Pass-out Chandan Vishwas Started Goat farming Business and Earning Good. He Made Earning Money Business.

Photo Credits: ICAR-CIARI

Chennai: पढ़ाई खत्म करने के बाद ज्यादातर लोग शहर में नौकरी की खोज में लग जाते है और शहर में ही रहकर अपने जीवन यापन की प्लानिंग करते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं। जो शहर मैं ना रह कर अपने गांव में रहना पसंद करते हैं और कुछ ऐसा कर देते हैं कि मिसाल बन जाते हैं। यही कहानी है दक्षिण अंडमान (South Andaman) के मीठाखरी गांव के रहने वाले चंदन विश्वास (Chandan Vishwas) की।

संसाधन का अभाव

चंदन विश्वास इंजीनियरिंग (Engineering) की पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने शहर में नौकरी ना करके गांव जाकर अपने व्यवसाय (Business) को शुरू करने का विचार बनाया, लेकिन गांव में इतनी जमीन नहीं थी। कि वह वहां कृषि कर सकें। तो उन्होंने पशुपालन विभाग पोर्ट ब्लेयर से संबंध साधा वहां के वैज्ञानिकों ने उन्हें कृषि से संबंधित बकरी पालन को अपना व्यवसाय को चुनने की सलाह दी।

इन्होंने बकरी पालन (Goat farming) के प्रशिक्षण के लिए 2018 में पशुपालन विभाग पोर्ट ब्लेयर (ICAR-CIARI) से अनुभव और ट्रेनिंग प्राप्त की जिसके बाद इन्होंने बकरी फार्म (Goad Farm) खोला। पशुपालन विभाग के विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक विधि का इस्तेमाल करने की सलाह दी।

कैसे हुई शुरुआत

शुरुआत में चंदन ने 2 नर और 27 मादा बकरियों के साथ शुरुआत की उन्होंने बकरियों के लिए अपने बजट को ध्यान में रखते हुए, जो चीजें उनके पास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थी जैसे बांस और सूखी घास की मदद से बकरियों के लिए एक सेड तैयार किया।

चारे के लिए चंदन ने अपने खेत में हरा चारा उगाया। जिसे वह बकरियों को खिलाते हैं। साथ ही में अजोला तथा कई प्रकार के मिनिरल सप्लीमेंट का इस्तेमाल करते हैं। चंदन बकरियों की ब्रीडिंग वैज्ञानिक तरीके से कराते हैं। इस पद्धति को अपनाने की वजह से उन्होंने सिर्फ 2 वर्ष में अपनी बकरियों की संख्या 29 से 73 कर ली।

बिजनेस बना लोगो की पसन्द

बकरी पालन के साथ-साथ चंदन मुर्गी पालन भी करते हैं, मुर्गी पालन में नस्लो की बात करें तो चंदन बनराजा नस्ल को पाल रहे हैं। चंदन के फार्म पर अभी 250 मुर्गियां हैं। मुर्गियों की बिक्री के लिए चंदन ने एक नया ही तरीका अपनाया है। जिसमें चंदन मुर्गियों के अंडे तथा मीट को कस्टमर के घर तक पहुंचाते हैं। जिससे उनके व्यापार में अच्छा उछाल प्राप्त हुआ है।

होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध होने के कारण आसपास के अधिक तर लोग चंदन से ही मीट और अंडे खरीदना पसंद करते हैं। चंदन मुर्गियों के अपशिष्ट पदार्थ को खाद में बदलकर 20 Ru किलो के हिसाब से बाजार में बिक्री करते हैं। जिससे उनका मुनाफा और बढ़ जाता है।

वैज्ञानिक विधि से बकरी पालन के लिए हमें विशेष चीजों का ध्यान रखना होता है। जिसमें मादा और नर बकरियों का चयन वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रजनन प्रबंधन ,खनिज सप्लीमेंट के साथ-साथ हेल्थ कैलेंडर, शरीर के वजन की रिकॉर्डिंग और विकास पैरामीटर आदि के बारे में समय-समय पर ध्यान देना होता है।

जिससे बकरियों की ग्रोथ काफी अच्छी तरह होती है। बकरियों के खाने के लिए किया है, विशेष प्रबंधन
चंदन ने खेत की बाड़ पर मोरिंगा, कटहल, सुबाबुल के पेड़ तथा चारे के रूप में हाइब्रिड नेपियर और मक्का का इस्तेमाल करते हैं।

अब बात करते हैं आम आमदनी की पिछले वर्ष से अब तक चंदन ने 15 बकरियां विक्री की हैं। जिनका औसतन बजन 22 से 25 किलो के बीच में रहा और उन्हें 500 से 600 Ru प्रति किलो की दर से बेचा गया।
साथ ही एक बकरी प्रजनन के लिए बेची जिसका वजन 32 किलो था। इसका मूल्य 900 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचा गया। साथी बकरियों के मल से बनाएं खाद को भी चंदन 20 Ru किलो के हिसाब से बेचते हैं।

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