कभी साइकिल के टायर बेचने से काम शुरू किया और आज 4000 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी

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Arvind Poddar BKT Tires
BKT Tires Success Story in Hindi. CMD Arvind Poddar's Success Mantra for Balkrishna Industries or BKT Tires The Tyre Brand Company.

Photo Credits: BKT Tires

Delhi: इन्सान एक एक सीडी चढ़कर अपनी मंजिल की तरफ बढ़ता है। कोई भी एक बार में 4 सीढ़ी नहीं चढ़ सकता ऐसा करने पर वो मुह के बल गिरेगा। इसलिए जरुरी नहीं होता की शुरुआत छोटी है तो वो छोटी ही रहेगी धीरे धीरे स्टेप वाई स्टेप से आगे बढ़ने पर इंसान वो मुकाम हासिल कर लेता है। जिसकी वो कल्पना भी नहीं कर सकता।

पुरे देश में जो व्यापारी है और जो आमिर लोग है, उन्होंने भी धीरे धीरे खुद को आमिर बनाया है और अपने व्यापार हो बढ़ाया है। रातोरात आमिर बनना ये कहावत है ऐसा होता नहीं है। आज भारत खूब तरक्की कर रहा है क्योंकि भारत के युवा भारत की तस्बीर बदल रहे है।

अंग्रेजो के जाने के बाद हमारा देश एक दम खोखला हो गया था। परंतु अब सुधार आ रहा है। जो लोग विदेशों में काम कर रहे है वे भी एक समय के बाद अपने देश लौट आते है। और अपने ही देश के लिए कुछ बहुत अच्छा करते है।

ऐसे कई उदाहरण है जो विदेश से लौट कर आये और भारत में आकर बहुत बड़ा नाम बना लिया। ऐसे भी बहुत से लोग है, जिन्होंने 50 रु दिन से काम किया और आज 50 करोड़ रुपये के मालिक बन गए है। आज हम बात करेंगे, एक ऐसे शख्स की जिसने भारत को पहला टायर दिया था और उस शख्स के बेटे ने अपने पिता के व्यापार से 4000 करोड़ की कंपनी बना दी। आइये जानते है उस युवा ने कैसे इस काम को अंजाम दिया।

पिता से विरासत में मिले व्यापार को एक नई सूरत दी

साइकिल के टायर को बनाने से किया था, अपने कारोबार की शुरुआत और आज भारत के दूसरे नंबर के टायर निर्माता के नाम से जाने जाते है। बिज़नेस फॅमिली से बिलोंग करने वाले ये व्यापारी अपने पिता से मिले टायर, पेपर और टेक्सटाइल के व्यापार को एक नई शक्ल दे रहे है।

आपको बता दे की एक छोटे से साइकिल के टायर से शुरू किये व्यापार की आज उन्होंने एक बहुत बड़े उद्योग में तब्दील कर दिया है। आज ये कंपनी बड़े बड़े वाहनों में उपयोग हो रहे टायरों (Tyres) को बना रही है इस कंपनी का नाम जेसीबी और जॉन डेरे जैसे बड़ी बड़ी कंपनियों के साथ भी जुड़ चुका है।

बीकेटी टायर (BKT Tires) के नाम से चल रही यह कंपनी देश की दूसरी सबसे बडी टायर ब्रांड की कंपनी (Tyre Brand Company) बनी है और इस कंपनी को यहाँ तक पहुचने का पूरा क्रेडिट उद्यमी अरविन्द पोद्दार (Arvind Poddar) को जाता है। पोद्दार फॅमिली टेक्सटाइल मार्किट में बहुत ही फेमस है। कपड़ा उद्योग से लेकर कागज उद्योग तक सफल हुए साथ ही अब टायर उद्योग में भी खुद को सफल बनाया।

भारत के अलावा कई देशो तक फैला है बीकेटी टायर्स का व्यापार

अरविन्द पोद्दार ने भारत के साथ साथ अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और इटली जैसे देशों में भी अपने व्यापार को फैलाया हुआ है। उन्होंने अपनी इस कपंनी की शाखाएं इन देशों में भी लगा रखी है।

आज उनकी कंपनी पूरी दुनिया के सौ से भी ज्यादा देशों में अपने द्वारा निर्मित टायरों का निर्यात (Export Tires) कर रही है। इस कंपनी ने भारत देश से भी ज्यादा नाम विदेशों में कमाया है।

बीकेटी टायर अपने कुल निर्माण का करीब 80 प्रतिशत विदेशों में निर्यात करती है और शेष 20 प्रतिशत भारत के बाजारो में। इस कंपनी में भारत के लगभग 8000 कर्मचारी काम करते हैं। अरविंद पोद्दार बचपन से ही एक व्यापारी परिवार में पाले बढे है। इनके पिता की पहले से ही टेक्सटाइल इंडस्ट्री (Textile Industry) रही है। पढ़ाई पूरी कर अरविन्द पोद्दार भी अपने पिता के साथ व्यापार में लगे रहे।

बीकेटी की स्थापना वर्ष 1987 में हुई

वर्ष 1987 में साइकिल टायरों के निर्माण के लिए बालकृष्ण इंडस्ट्रीज (Balkrishna Industries) की स्थापना की गई। उच्च गुणवत्ता और निम्न कीमतों के कारण उन्हें अपने व्यापार में बहुत जल्द सफलता मिल गई। इसके बाद उन्होंने ऑटो और कार के टायर का निर्माण शुरू किया।

उन्होंने पहली बार में ही ट्रैक्टर के टायर का निर्माण करने का निश्चय किया। परंतु उनका लक्ष्य भारी मशीनरी के टायर निर्माण करने का था। इस लिए उन्होंने कृषि, खनन और परिवहन में उपयोग किये जाने वाले मशीनों के टायर का निर्माण करना सही समझा। समय के साथ मार्किट में बीकेटी के टायरों की मांग बढ़ने लगी और धीरे धीरे व्यापार सफल व्यापार में बदलने लगा।

अब पोद्दार परिवार की तीसरी पीढ़ी भी इस व्यापार में होगी शामिल।

इसके बाद अरविंद पोद्दार का लक्ष्य विदेशों में अपने ब्रांड को चलाना था। इसलिए उन्होंने खेल और रणनीति की मदद ली। वह मॉन्स्टर जैम का कार्यक्रम को करते।जो एक बहुत ही पसंदीदा भारी ट्रक रेसिंग कार्यक्रम है।

वर्तमान समय में बीकेटी कंपनी (BKT Company) भारत में एक बहुत बड़ा और नामचीन ब्रांड बन चूका है। अब पोद्दार परिवार की अगली पीढ़ी यानि थर्ड जनरेशन भी इस बिसनेस को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में आई है। अब अरविंद के बेटे राजीव पोद्दार (Rajiv Poddar) भी अपने पिता का सहयोग कर रहे है।

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