यहाँ के किसानों ने पुरानी खेती छोड़ नई तकनीक से खीरा उगाया, 4 महीने में 18 लाख रुपये कमाई हुई

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Khere Ki Kheti
Dausa farmers left traditional farming and planted cucumber. They earned Ru 18 lakh in 4 months. Khere Ki Kheti Se Fayeda.

Dausa: हम जानते हैं कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है। इस देश की मिट्टी काफी उपजाऊ है, जिसमें अनाज रूपी सोना उगता है, जो किसानों की पूंजी होती है। परंतु जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे महंगाई बढ़ रही है, क्योंकि पर्यावरण मैं प्रदूषण के कारण जलवायु में और मौसम में परिवर्तन हो रहा है।

कई बार किसान भाई की पूरी फसल मौसम के कारण चौपट हो जाती है, ऐसे में उन्हें काफी बड़ा झटका लगता है और इसी कारण वे आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाते हैं। परंतु वर्तमान में इसका हल निकाल लिया गया है आधुनिक खेती के रूप में।

वैसे तो भारत भूमि काफी उपजाऊ है, परंतु लगातार रासायनिक पदार्थों और रासायनिक खादों का उपयोग करने से मृदा की उत्पादन क्षमता में कमी आई है। इस वजह से किसानों को उतना लाभ नहीं होता, जितनी वे मेहनत करते हैं और खेती के अलावा भी अन्य व्यापार करने के लिए मजबूर हैं।

आधुनिक समय की आधुनिक खेती से किसानों को काफी लाभ हो रहा है, इस खेती में जैविक खाद का इस्तेमाल होता है और पारंपरिक खेती के साथ वे कुछ ऐसी चीजों की खेती करते हैं जिनसे उन्हें लाभ ही लाभ होता है तो यह जानते हैं विस्तार से।

राजस्थान के बाबूलाल शर्मा की कहानी

आज की कहानी है राजस्थान (Rajasthan) राज्य के दौसा (Dausa) जिले के अंतर्गत आने वाला गांव खवारावजी के निवासी किसान बाबूलाल शर्मा की। आपको बता दें कि दौसा जिला के कलेक्टर कमर जमान चौधरी फार्म पौण्ड और पॉली हाउस (Polyhouse) को देखने के लिए खवारावजी गांव पहुंचे।

कलेक्टर ने जब देखा की बाबूलाल शर्मा का पॉलीहाउस में काफी बड़े पैमाने पर खीरे की खेती हो रही है। इसके बाद जिला कलेक्टर कमर चौधरी ने जिला के कृषि अधिकारी अशोक कुमार मीणा से पोली हाउस और फार्म पौण्ड की खेती के बारे में और अधिक जानकारी ली।

Cucumber Cultivation tips
Cucumber Cultivation tips in Hindi. How to Plant and Grow Cucumbers. Now a days Cucumber farming giving more profit to farmers.

फिर वे किसान बाबूलाल शर्मा और विनेश जैमन से उनके द्वारा की जा रही खेती के बारे में जानकारी लेते है, जिससे उन्हे पता चलता है की इस गांव के किसान पहले पारंपरिक खेती में गेहूं और बाजरा की फसल उगाते थे, जिससे उन्हें ज्यादा लाभ नहीं हो रहा था। खेती में उन्हें लागत ज्यादा लगानी पड़ती थी और लाभ कम होता था धीरे-धीरे वे कर्ज में डूबने लगे इसीलिए उन्होंने आधुनिक खेती को अपनाया।

सरकार की योजना की मदद से कृषि के लिए तालाबों का निर्माण कराया

दौसा जिले के किसानों द्वारा आधुनिक खेती करने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चलाई जा रही योजना से प्रेरित होकर की जा रहीं है। इसके बाद किसानों ने मिलकर जिला कृषि अधिकारी से संपर्क कर विभाग में चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी ली।

Hydroponic Polyhouse

इसके बाद उन्होंने एक पॉलीहाउस निर्माण कराया और केंद्रीय सरकार की कृषि सिंचाई योजना के तहत कृषि के लिए एक तालाब का निर्माण करवाया। इस तलाब में वर्षा के जल और पॉलीहाउस की छतों का पानी साथ ही अन्य खेतो का पानी इखट्टा किया। फल स्वरुप अब खेती के लिए पानी की पर्याप्त मात्रा है।

अब राजस्थान के किसानों ने आधुनिक खेती के लिए खीरे की फसल (Cucumber Farms) को चुना। खीरे के पौधों में ड्रॉप विधि से सिंचाई की जाती है, जिससे उन्हें पानी की पर्याप्त मात्रा मिलती है और वह काफी ज्यादा मात्रा में खीरे के फल उत्पादित करते हैं। सभी किसानों ने सरकार की योजना की मदद से 2 तालाबों का निर्माण करवाया और एक अपनी तरफ से भी तलाब बनवाया।

3 कृषि तालाब और एक पॉलीहाउस के साथ कर रहें कृषि

राजस्थान के किसानों के पास 3 फार्म पॉन्ड और एक पॉलीहाउस है। जिसमे वे तीन कृषि तालाबों में करीब 4000000 लीटर वर्षा जल का संग्रह करते हैं। बाबूलाल शर्मा कहते हैं कि उन्होंने पिछले ही वर्ष इस पॉलीहाउस का निर्माण किया था और 4 महीने पहले खीरे की पहली फसल लगाई। जिसमे मात्र 4 महीने में खीरे की फसल ने उन्हें 1800000 रुपए दिए। अब बाबूलाल दोबारा अपनी फसल लगाने के लिए तैयारी कर रहे हैं।

किसानों को आधुनिक खेती से संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी दी जा रही

किसान बाबूलाल कहते हैं कि इस वर्ष यानी दूसरी फसल में वह करीब 35 लाख रुपए के खीरे का उत्पादन (Cucumber Cultivation) करने का अंदाजा लगा रहे है। दौसा जिले के कृषि अधिकारी अशोक कुमार मीणा ने अपने जिले के सभी किसानों को कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

इस योजनाओं में कांटेदार तारबंदी योजना, फार्म पौण्ड निर्माण, सिंचाई पाइप लाइन, कृषि यंत्र, पौध संरक्षण यंत्र, पॉली हाउस, शेडनेट हॉउस, फव्वारा संयंत्र, बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति, मल्च, प्याज हाउस व खरीफ फसलों में लगने वाले विभिन्न कीट-रोगों के नियंत्रण की तकनीकी आदि शामिल है।

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