किसान हुए मालामाल, बिना खाद के उगाई फसल, खीरे की खेती से 4 महीने में 18 लाख रुपए कमा रहे

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Khire Ki Kheti
Cucumber Farming is Profitable Farming Business in India. How to do Khira ki Kheti. Farmers doing Cucumber Farming and earning huge money.

Jabalpur: अगर आप बिजनेस करने का सोच रहे हैं, तो आप ये फयदेमंद व्यपार (Profitable Farming Business) कर सकते हैं। अगर आप अपनी नौकरी या बिजनेस से बोर हो गए है, आपके पास कोई रोजगार का विकल्प नहीं है। कम बजट में नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं और ज्यादा पैसे कमाना चाहते हैं। तो हम आपको बताते हैं एक ऐसा कारोबार जिसमें कम पैसे खर्च करके आप ज्यादा कमा सकते हैं।

दरअसल, इसके लिए खेती एक बेहतर विकल्प है। खेती में भी कई विकल्प हैं, लेकिन आप खीरे की खेती (Cucumber Farming) शुरू करके कम खर्च में कम समय में ज्यादा रकम कमा सकते हैं। खास बात ये है कि इसमें निवेश के लिए अधिक पैसे लगाने की जरुरत नहीं, ये काम कोई और नहीं बल्कि खेती है। अब सवाल है कि खेती में क्या करें। तो बता दें कि इसके लिए आपको खीरे की खेती (Cucumber Cultivation) करनी होगी।

खीरे की खेती और इसका कारोबार कैसे होता है, जाने कुछ महत्वपूर्ण जानकारी

वैसे तो खीरा (Khira) गर्मी के मौसम में होता है। परंतु वर्षा ऋतु में खीरे की फसल अधिक होती है। खीरे की खेती (Kakdi Ki Kheri) सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। खीरा की खेती (Kakdi Farming) के लिए भूमि का पी.एच. 5.5 से 6.8 तक अच्छा माना गया है। खीरे की खेती नदियों-तालाब के किनारे भी की जा सकती है।

इस फसल का समय चक्र 60 से 80 दिनों में पूरा होता है। फरवरी माह का दूसरा सप्ताह खीरे की बुवाई के लिए सर्वश्रेष्ठ है। खीरे की खेती (Cucumber Farming) सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट एवं बलुई दोमट भूमि उत्तम मानी जाती है। उत्तर प्रदेश के एक किसान दुर्गाप्रसाद जो कि खीरे की खेती करके लाखों में कमा रहे हैं।

उनका कहना है कि खेती में मुनाफा कमाने के लिए अपने खेतों में खीरे की बुआई की और मात्र 4 महीने में 8 लाख रुपए कमाए है। इन्होंने अपने खेतों में नीदरलैंड के खीरे कि बुआई की थी। दुर्गाप्रसाद (Farmer Durga Prasad) के मुताबिक, नीदरलैंड से इस प्रजाती खीरे के बीज मागवाकर बुआई करने वाले पहले किसान है।

अहम बात यह कि इस प्रजाती के खीरो मे बीज नहीं होते है। जिसकी वजह से खीरे कि मांग बड़े-बड़े होटलों और रेस्त्रां खूब रहती है। दुर्गाप्रसाद बताते है कि वें उद्यान विभाग से 18 लाख रुपए की सब्सिडी लेकर खेत में ही सेडनेट हाउस बनवाया था। सब्सिडी लेने के बाद भी खुद से 6 लाख रुपए खर्च करने पड़े थे।

इसके आलवा उन्होंने नीदरलैंड से 72 हजार रुपए के बीज मंगवाए। बीज बोने के 4 महीने बाद उन्होंने 8 लाख रुपए के खीरे बेचे। इस खीरे की खासियत कि इसकी कीमत आम खीरो के मुकाबले दो गुनी तक होती है। जहां देसी खीरा 20 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है।

वहीं नीदरलैंड के बीज वाला यह खीरा 40 से 45 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। हालांकि, सभी तरह के खीरों की सालभर डिमांड रहती है। यह हर प्रकार की भूमियों में जिनमें जल निकास का सही रास्ता हो, उगाया जाता है। अच्छी उपज के लिए जीवांश पदार्थयुक्त दोमट भूमि सबसे अच्छी होती है। इसकी फसल जायद और वर्षा में ली जाती है। अत: उच्च तापक्रम में अच्छी वृद्धि होती है, यह पाले को नहीं सहन कर पाता, इसलिए इसको पाले से बचाकर रखना चाहिए।

उन्नत किस्म के बीज

पंजाब नवीन खीरे की अच्छी किस्म है। इस किस्म में कड़वाहट कम होती है और इसका बीज भी खाने लायक होता है। इसकी फसल 70 दिन मे तुड़ाई लायक हो जाती हैं। इसकी औसत पैदावार 40 से 50 कुंतल प्रति एकड़ तक होती है।बीज की मात्रा एक किलो प्रति एकड़ है।

इसके अलावा खीरे की प्रमुख प्रजातियां निम्नलिखित है

हिमांगी, जापानी लॉन्ग ग्रीन, जोवईंट सेट, पूना खीरा, पूसा संयोग, शीतल, फ़ाईन सेट, स्टेट 8 , खीरा 90, खीरा 75, हाईब्रिड-1 व हाईब्रिड-2, कल्यानपुर हरा खीरा इत्यादि प्रमुख है। खीरे के अन्न प्रकार भी बहुत पसंद किये जाते हैं और खाने में स्वादिष्ट भी होते हैं।

बिजाई का ढंग

बीज को ढाई मीटर की चौड़ी बेड पर दो-दो फुट के फासले पर बोया जा सकता है। खीरे की बिजाई उठी हुई मेढ़ो के ऊपर करना ज्यादा अच्छा हैं। इसमें मेढ़ से मेढ़ की दूरी 1 से 1.5 मीटर रखते है। जबकि पौधे से पौधे की दुरी 60 सें.मी. रखते हैं। बिजाई करते समय एक जगह पर कम से कम दो बीज लगाएं।

खाद तथा उर्वरक की उचित मात्रा

खीरे की अच्छी फसल के लिए खेत (khire ki kheti) की तैयारी करते समय ही 6 टन गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद खेत में जुताई के समय मिला दें। 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 12 किलोग्राम फास्फोरस व 10 किलोग्राम पोटाश की मात्रा खीरे के लिए पर्याप्त रहती है। खेत में बिजाई के समय 1/3 नाइट्रोजन, फास्फोरस की पूरी मात्रा तथा पोटाश की पूरी मात्रा डाल दे। बची हुई नाइट्रोजन को दो बार में बिजाई के एक महीने बाद व फूल आने पर खेत की नालियों में डाल कर मिट्टी चढ़ा दें।

आज अधिकतर उन्नत किसान सब्जियों की खेती करके अधिक से अधिक लाभ ले रहा है। खीरे की खेती (Khere Ki Kheti) भी इन में से एक है, जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है। बाजार में खीरे की अधिक मांग बने रहने के कारण खीरे की खेती किसान भाइयो के लिए बहुत ही लाभदायक है।

खीरे का उपयोग खाने के साथ सलाद (khira salad) के रूप में बढ़ता ही जा रहा है, जिससे बाजार में इसकी कीमते भी लगातार बढ़ रही हैं। इसके साथ ही खीरे की खेती रेतीली भूमि में अच्छी होती ऐसे में किसान भाइयो के पास जो ऐसी भूमि है, जिसमे दूसरी फसलो का उत्पादन अच्छा नहीं होता है, उसी भूमि में खीरे की खेती से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।

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