
Rajnandgaon: जरुरत पढ़ने पर लोग कहीं ना कहीं से अपना जुगाड़ कर ही लेते हैं। कुछ भारतीय ऐसे भी है, जिन्हे किसी को अपने काम के लिए किसी चीज़ की जरूरत है और वह चीज़ बहुत महंगी है, तो इंसान वे जुगाड़ करके वैसी ही डुप्लीकेट चीज़ बना लेते हैं। हमने इससे पहले भी ऐसे कई लोगो की खबर आपको दी है, जिन्होंने देशी तरीके से कुछ न कुछ इनोवेशन किया है।
ऐसे ही छत्तीसगढ़ के बसंत कुमार चंद्राकर (Basant Kumar Chandrakar) ने किया है। Chhattisgarh के राजनांदगांव जिले के गठुला (Gathula of Rajnandgaon district) में मुंगोड़ी और भजिया की दुकान चलाने वाले बसंत कुमार ने मंगोड़े और भजिया मेकिंग मशीन (Mungodi and Bhajiya Making Machine) विकसित की है। जिसे वह खुद अपनी दुकान पर इस्तेमाल करके फाड़ आइटम बना रहे हैं, यहाँ तक के वे कई पकौड़े वालों को यह भजिया मेकिंग मशीन बनाकर सप्लाई भी कर रहे हैं।
भजिये वाले बसंत ने हमारे एक पाठक रोहित को बताया की उनहोने 12वीं तक पढ़ाई की है। इसके बाद घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के चलते कुछ काम खोजने लगे। कई अलग-अलग काम करने के बाद कुछ साल पहले यह मुंगोड़ी का सेंटर शुरू किया। सुबह से लेकर शाम तक बहुत से लोग चाय नाश्ता करने के लिए उनके स्टॉल पर आते। काम बढियाँ चलने लगा।
बसंत को इस काम में मुश्किलें भी आई। वे मंगोड़े अपने हाथ से बनाते थे, जिन्हे बनाने में बहुत वक़्त लगता। लेकिन सुबह और शाम के समय उनकी दुकान पर काफी भीड़ होती है। ऐसे में, यदि कुछ समय की भी देर हुई, तो कस्टमर वापस चले जाते थे। अब ऐसे में ग्राहक के वापस चले जाने से नुकसान ही हो रहा था।
इस परेशानी से निकलने के लिए उन्होंने मंगोड़े और भजिये (Mungodi and Bhajiya) बनने के लिए कोई मशीन खरीदने का फैसला किया। हाथ से एक बार में आप सिर्फ एक ही मंडोगा या भजिया बना सकते हैं। परन्तु मशीन से एक बार में आप बहुत सारे मंगोड़े या भजिये एक साथ तल सकते हैं।
ऐसी मशीन खोजने पर एक तो लोकल मार्किट में मिली नहीं और उन्हें अपने हिसाब की छोटी मशीन (Small Machine) चाहिए थी। अगर बाजार में ऐसी मशीनें मिली भी, तो सभी इंडस्ट्रियल स्तर बड़ी और महंगी थी। फिर बसंत ने फैसला किया कि वे खुद ही ऐसी मशीन बनाएंगे।
फिर खोज खबर करने और मेहनत करने के बाद, उन्होंने 5 साल पहले एक मंगोड़े-भजिया मेकिंग मशीन तैयार कर ली। जिसे वह इतने सालों तक मॉडिफाई करते रहे और पिछले साल 2020 में उन्होंने अपनी बेस्ट मशीन बना ली। इस मशीन में दो हिस्से हैं। सबसे पहले आप नीचे वाले हिस्से में लगे मग में बैटर भरते हैं। फिर इसके ऊपर वाले हिस्से से इसे दबाते हैं और नीचे बने छेद में से मंगोड़े या भजिये कड़ाही में डालते हैं। इस मशीन से वे 10 मिनट में एक किलो भजिया बना लेते हैं।
बसंत ने जो मशीन बनाई, उसे बनाने में लगभग 700 रुपये की लागत आई थी। साल 2018 में उन्हें नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के जरिए इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल, लखनऊ में अपनी इस मशीन को प्रदर्शित करने का अवसर भी मिला।
In CG, Pakodawala Pasant made a machine, one kilo of Bhajiya is made in 10 minutes only pic.twitter.com/mcqFcarBxb
— sanatanpath (@sanatanpath) December 20, 2021
उन्होंने बताया की मैंने एक बार इंटरनेट पर सर्च किया कि क्या कोई ऐसी संस्था है, जो इस तरह के छोटे इनोवेशन को बढ़ावा देती है। तब मुझे नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के बारे में पता चला। मैंने अपने और अपनी मशीन के बारे में सभी जानकारी पोस्ट कर दी। जिसके बाद उनकी तरफ से एक टीम ने आकर मशीन को चेक किया और तब मुझे लखनऊ जाने का यह अवसर हासिल हुआ।
फिर उन्हें नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (National Innovation Foundation) की तरफ से 25 हजार रुपये की अनुदान राशि मिली थी। जिसकी मदद से वह फेस्टिवल में प्रदर्शित करने के लिए मशीन बना सके और एक अच्छी वेल्डिंग मशीन भी खरीद सके।
इस वेल्डिंग मशीन की मदद से उनके लिए अपनी पुरानी मशीन को मॉडिफाई करने में मदत मिली। अब उन्होंने सड़क से कूड़ा-कचरा साफ़ करने के लिए भी एक क्लीनिंग मशीन बनाई है। अब वे एक अच्छे खासे इनोवेटर कहलाते हैं।
अब बसंत इस मंगोड़े और भजिये मेकिंग मशीन को 100 से ज्यादा छोटे-बड़े शॉप चलाने वालों को मुहैया करवा चुके है। इस मशीन से पकौड़े भी बनाये जाते है। बसंत ने जो पहला मॉडल बनाया था, वैसी 80 मशीनें और नए मॉडल की लगभग 20 मशीनें वे बेच चुके हैं। अपनी भी उनके पास इस मशीनों के आर्डर आते हैं।



