इस राज्य के किसान शुगर फ्री आलू की खेती कर रहे हैं, उपज भी अधिक और फायदे भी शानदार हैं

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Sugar free potato farming
Tuntun Mishra, who is cultivating sugar-free potatoes in Mahnar of Vaishali district in Bihar. Sugar free potato farming gives good earning.

Vaishali: हमारे देश की अर्थ व्यवस्था में खेती किसानी का बहुत बड़ा योगदान है। हम एक कृषि प्रधान देश में रहते हैं। यहाँ कई किसान ऐसे हैं, जो अब इस क्षेत्र में इनोवेटर बन गए हैं। वे नए नए तरीके से खेती करके लोगो के सामने मिसाल बन रहे हैं। इससे आमदनी भी अच्छी हो जाती है। अब वक़्त और जरुरत के साथ साथ खेती में भी कुछ बदलाव होने लगे हैं।

बिहार के वैशाली (Vaishali) जिले के महनार प्रखंड के जलालपुर गांव के निवासी टुनटुन मिश्र ने खेती (Tuntun Mishra) किसानी के क्षेत्र में ऐसा कारनामा किया है, जिससे इस क्षेत्र में नई कामयाबी हासिल हुई है। टुनटुन मिश्र ने बीते साल अपनी एक एकड़ जमीन में शुगर फ्री आलू (Sugar Free Potato) की खेती की थी।

अब वह अपनी आलू की फसल अच्छी देखकर वह बहुत खुश हैं और उन्हें इस शुगर फ्री आलू की खेती (Sugar-free potatoes farming) से काफी फायदे होने की उम्मीद हैं। अब टुनटुन मिश्र (Kisan Tuntun Mishra) का आईडिया जानकार आस पास के गांवों के अन्य किसान भी शुगर फ्री आलू की खेती करने के लिए विचार कर रहे है।

टुनटुन मिश्र एक मेहनतकश किसान है, उन्होंने एक मीडिया प्लेटफार्म को बताया कि मुझे समस्तीपुर, हाजीपुर, पूसा अन्न जगहों के किसानों के ज़रिये शुगर फ्री आलू की खेती करने की प्रेरणा मिली थी। इस बार मैंने हाजीपुर से बीज ला कर शुगर फ्री आलू की खेती की। मेरे उगाये गए शुगर फ्री आलू के बारे में जानकार लोग दूर दूर से इसे देखन आये और अब खुस भी इस खेती को करने की सोच रहे हैं।

वे आगे बताते हैं कि शुगर फ्री आलू की खेती में एक अच्छी बात यह है कि इसमें रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इस खेती में जैविक खाद का ही इस्तेमाल किया जाता है। खास बात यह है की सामान्य आलू की उपज की तुलना में शुगर फ्री आलू की उपज 3 गुनी अधिक होती है। इससे फायदा भी अधिक होता है।

सब्ज़ी मार्किट में यह शुगर फ्री आलू लगभग 80 रुपये किलो बिकता है। टुनटुन बताते है कि इसकी खेती के लिए वे अपने गांव के किसानों को प्रेरणा देने का काम करेंगे। वे आने वाले समय में अन्य किसानों को बीज भी उपलब्ध करवाएंगे। जलालपुर गांव (Jalalpur Village) के कुछ लोग बताते है की टुनटुन की इस लगन और कड़ी मेहनत को देखकर गांव के अन्य किसान भी शुगर फ्री आलू की खेती करने के किये गंभीर है।

आज के समय मे लगभग हर घर मे किसी न किसी को शुगर की बीमारी हो रखी है। नार्मल आलू (Potato) से शुगर लेवल और अधिक बढ़ जाता है। अब ऐसे में शुगर फ्री आलू बेहतर ऑब्शन है। तो किसानों को इस शुगर फ्री आलू की खेती से फायदा होने तो तय है।

असल में इस आलू में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है। इसे पूरी तरह से शुगर फ्री तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन कार्बोहाइड्रेट कम होने की वजह से डायबिटीज के मरीज ऐसे कम मात्रा में खा सकते हैं। आम तौर पर मई-जून के महीने में आलू अधिक सड़ता है, लेकिन इस शुगर फ्री आलू के साथ ऐसा नहीं होता। इसकी स्टोरेज क्षमता बहुत अच्छी होती है। अतः इन्हे अधिक समय तक रखा भी जा सकता है।

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