
Begusarai: पूरे देश में नए-नए प्रणालियों का परीक्षण चालू है। भारत में सबसे ज्यादा खेती किसानी की जाती है, परंतु किसानों ने अपनी खेती किसानी का तरीका ही बदल दिया, अब किसान भाई आधुनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। जैविक खेती (Organic Farming) में जैविक खादों का इस्तेमाल करके उपज में बढ़ोतरी हो रही है।
दूसरी तरफ आधुनिक खेती के माध्यम से किसान भाई गेहूं चावल के अलावा महंगी सब्जी फल फ्रूट की खेती कर रहे हैं, इसी के साथ अब भारत में मोतियों की खेती हो रही है, मोतियों की खेती से किसानों का दिन दुगना और रात चौगुना व्यवसाय बढ़ रहा है।
एक कहावत है बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया यह कहावत एकदम सही है, क्योंकि व्यक्ति के हाथ में यदि पैसा है, तो वह हर चीज कर सकता है। पैसे कमाने के काफी सारे रास्ते हैं, इस बात को साबित करते हुए बिहार (Bihar) राज्य के बेगूसराय (Begusarai) के एक व्यक्ति जिसका नाम जयशंकर कुमार है ने ढेरों काम करके अपना कारोबार इतना बड़ा लिया है कि आज वे लाखों रुपए महीने कमा रहे हैं।

बेगूसराय के जय शंकर कुमार (Jai Shankar Kumar) खेती किसानी, पशुपालन, मछली और मुर्गी पालन और वर्मीकंपोस्ट आदि के व्यवसाय करके अपने हर सीजन के मुनाफे को मजबूत कर रहे हैं। जय शंकर कुमार काफी प्रोग्रेसिव और इनोवेटिव व्यक्ति हैं।
इनकी उम्र करीब 48 वर्ष है और इनकी आय करीब सवा लाख रुपए महीने है। व्यक्ति की मेहनत ही उसका असली धन होता है इस बात का जीता जागता उदाहरण जयशंकर कुमार है, आइए जयशंकर कुमार की खेती के बारे में और विस्तार से जानते हैं।
जयशंकर कुमार से सीखे बेहतरीन कमाई का तरीका
बिहार राज्य का बेगूसराय जिला के अंदर आने वाला इलाका डांगरी के अंदर एक छोटा सा गांव तेतरी के निवासी जय शंकर कुमार काफी पढ़े लिखे और वेल एजुकेटेड पर्सन है उन्होंने केमिस्ट्री में मास्टरी की हुई है। कुमार एक अच्छे किसान भी है, वह पहले पारंपरिक खेती में मक्का गेहूं धान आदि की फसल लगाते थे।
उनके मन मुताबिक उनको फायदा नहीं हो रहा था। उनका परिवार कोई अच्छी कमाई वाला काम करने के लिए जोर दे रहा था। उन्होंने इस क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया ढेर सारे कार्यक्रम देखें और कृषि से संबंधित ढेर सारी ट्रेनिंग ली साथ ही ट्रेनर से बेहतर कमाई का विकल्प भी पूछा।
कुमार का समझदारी वाला काम इंटीग्रेटेड फार्मिंग
विशेषज्ञों से बातचीत करके कुमार ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम के बारे में समझा और वे इस सिस्टम से काफी इंप्रेस हुए। उन्हें अब अपनी तरक्की का रास्ता दिखाई देने लगा था। इसके बाद फिर कुमार ने कृषि केंद्र से सहायता लेकर हॉर्टिकल्चर, एनिमल हसबेंडरी, वर्मी कंपोस्ट, बर्ड रेरिंग और एग्रोनॉमिकल क्रॉप जैसे कारोबार को समझा और उनकी बातों पर अमल किया फिर खेती प्रारंभ कर दी।
जयशंकर कुमार के कार्य
ट्रेनिंग करने के बाद जयशंकर कुमार ने मछली पालन से अपने कारोबार (Fisheries Business) की शुरुआत की इसके लिए सबसे पहले उन्होंने मछली पालन के लिए एक तालाब का निर्माण कराया, जिसमें वह ताजे पानी में पर्ल की खेती (Moti Ki Kheti) भी करते हैं। कार्य के प्रति लगन शीलता को देखते हुए बिहार सरकार ने उन्हें 2500000 रुपए की मदद मुहैया कराई।

उन्होंने इन पैसों से वर्मी कंपोस्ट खाद का काम शुरू किया और आज वे साल का 3000 मैट्रिक टर्न कंपोस्ट खाद बनाते हैं। हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट से भी उन्हे मदद मिली और उन्होंने पॉलीहाउस का निर्माण कर सीजन की सब्जियों की फसल लगाई।
उन्हें मार्केट से पहले सब्जियों के बीज मिल जाते हैं, कृषि विज्ञान केंद्र बेगूसराय के द्वारा कुमार को तकनीकी मदद मिली। समय-समय पर वैज्ञानिक कुमार के खेतों और उनसे जुड़ी जानकारियों के लिए उन्हें ट्रेनिंग देते हैं।
3 गुना तेजी से हो रही है कमाई
कुमार की मेहनत ने आज उन्हें वह मुकाम दिया है, जिसकी शायद में कल्पना भी नहीं कर सकते थेैं। शुरुआत में कुमार को 35000 Ru महीने की बचत होती थी और अब वह महीने के सवा लाख रुपए आराम से कमा लेते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र ने कुमार को अन्य किसानों के लिए एक प्रशिक्षक के तौर पर नियुक्त किया है और उनका खेत अन्य किसानों के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर बना। जहां किसान भाई आते हैं और उस खेती को देखकर उनसे बहुत कुछ सीख के जाते हैं।




