दुनिया के सबसे प्राचीन हिन्दू धर्म में सांपों की पूजा करने का यह कारण आपको हैरानी में डाल देगा

0
1142
Why Snake worship
Why are snakes given a lot of importance in Hindu mythology. Reason Behind Worship Of Naga. Why Hindus worship snakes.

Ujjain: हिंदू धर्म याने सनातन धर्म भारत का सबसे पवित्र और बड़ा धर्म माना जाता है। इस धर्म के अनुसार पृथ्वी में जो कुछ भी है वह सब पूजनीय है। यदि व्यक्ति जीवित है और वह सांस ले रहा है, तो उनके लिए वह हवा भी ईश्वर की तरह है।

इसी प्रकार धरती में कई सारे जीव बिचरते हैं, जिनमें से कुछ जीव ईश्वर के वाहन भी हैं इसीलिए लोग उन्हें ईश्वर की तरह ही पूजते हैं जैसे सांप (Snake)। हिंदू धर्म के अनुसार पृथ्वी में ढेर सारे विषैले सांप है। लोगों का मानना है कि यह धरती उन्हीं की है इसीलिए उन्हें नागराज (Nagraj) कहकर पूजा जाता है।

Snake worship Reason
Snake worship in Hinduism file photo

लोगों का यह भी मानना है कि यह देवता किसी का बुरा नहीं करते, बल्कि यह लोगों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। भारत के कई व्यक्ति ऐसे हैं, जो लगातार नागराज की पूजा करते हैं। इतना ही नहीं हर वर्ष नाग पंचमी (Nag Panchami) को नागों के पर्व के रूप में मनाते हैं। हिंदू ग्रंथ में सांपों को देवताओं का स्थान मिला है और वह सर्वत्र पूजा जा रहे हैं। इनकी पूजा का काफी महत्व है बताया गया है, तो आइए इस लेख के माध्यम से उस महत्व के बारे में विस्तार पूर्ण जाने।

सर्पों का ईश्वर से है गहरा नाता

वेदों और पुराणों में देखा जाए तो सर्प ईश्वर से काफी करीब है। हमारे सामने सबसे पहला उदाहरण तो भगवान भोलेनाथ हैं, जिन्होंने सृष्टि की रचना की है। आप देख सकते हैं कि गले में गहने के समान सर्प को लपेटकर उन्होंने रखा हुआ है। इसीलिए लोग सर्प को भगवान शिव का आभूषण भी कहते हैं।

इसके अलावा आप देख सकते हैं कि भगवान विष्णु समुद्र के नीचे शेषनाग को अपना बैठने का स्थान बनाकर विराजमान है। परंतु इसके अलावा भी एक और कारण है, शायद जिसके बारे में आम नागरिक बहुत कम जानता है वह है श्री कृष्ण से मिला हुआ वरदान।

इस वरदान के कारण है सर्प को भगवान की उपाधि प्राप्त हो गई है और विश्व में सर्वत्र पूजा जा रहे हैं। ज्योतिष एक्सपर्ट डॉक्टर राधाकांत वत्स ने अपनी ज्ञान और रिसर्च से इस विषय में जानकारी थी।

वर्षों पहले हुई नाग वंश की स्थापना

ऐसा बताया जा रहा है कि आज से हजारों वर्षों पूर्व नागवंश को स्थापित कर दिया गया था। पृथ्वी में कई खतरनाक एक से बढ़कर एक विषैले सर्पों का जन्म हुआ, आज भी धरती पर इधर-उधर पाए जाते हैं। परंतु इन सभी सर्पों में सर्वश्रेष्ठ स्थान शेषनाग का है।

शेषनाग भगवान विष्णु की सैया कहलाती है और नागराज वासुकी भगवान शिव के गले में श्रृंगार की तरह सुसज्जित होते हैं, जिस कारण से लोगों ने सर्प को देवताओं का अवतार माना है। कुछ कथाओं के अनुसार सर्पों को पूजा जाना द्वापर युग से जोड़ा गया है।

श्री कृष्ण और कालिया नाग के बीच का युद्ध

द्वापर युग श्री कृष्ण का युग था जब भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण का अवतार लेकर धरती पर बढ़ रहे पापों को कम करने के लिए जन्म लिया। उस वक्त यमुना नदी में कालिया नाग निवास कर रहा था।

कालिया नाग इतना विषैला था कि यमुना का पानी भी विषैला हो गया था। जिसका उपयोग कर पाना गोकुल वासियों के लिए काफी कठिन था। इस स्थिति से निपटने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने कालिया नाग को यमुना से जाने के लिए कहा तब कालिया नाग अहंकार में आकर श्री कृष्ण को युद्ध के लिए चुनौती दे दी।

उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने चुनौती को स्वीकारा और कालिया नाग से युद्ध किया। युद्ध के दौरान कालिया नाग हार गया। साथ ही उसे श्री कृष्ण के अवतार में भगवान विष्णु की प्रतिमा दिखाई दी।

श्री कृष्ण के वरदान स्वरूप पूजे जाते हैं सर्प

यह जानकर कि श्री कृष्ण ही भगवान विष्णु का अवतार है, तो कालिया नाग को अपने किए पर काफी पछतावा हुआ, फिर उसने क्षमा मांगी और साथ ही अभय दान देने के लिए भी प्रार्थना की।

इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने कालिया नाग को यमुना छोड़ने के साथ एक वरदान भी दिया जिसमें उन्होंने कहा कि सर्पों की पूजा लोगों के द्वारा की जाएगी और जो सर्प की पूजा करेगा। उसे कभी सर्प दंश का भय नहीं रहेगा। वह अपने साथ एक सुरक्षा कवच का होना महसूस करेगा। तभी से नागवंशी और अन्य हिंदू धर्म के लोग नागों की पूजा करते है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here