Sunday, October 17, 2021
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बदन पर कपड़े नहीं और ना घर परिवार, ऐसे ही अघोरी बाबा महाकाल सवारी का खर्च उठाते हैं: आश्चर्य

Aghori Baba Bam Bam Nath

Ujjain: एक सवाल हमेशा मन में उठता है की उनके बहन पर पूरे कपड़े भी नहीं होते है और कभी अपने शरीर पर राख लगाते हैं, तो कभी क्षिप्रा तट पर बैठे दीखते हैं, तो कभी उज्जियन की सडकों पर मंजीरा लिए टहलते दीखते है। ऐसे ही कई अघोरी बाबा (Aghori Baba) हैं, जिनका कोई ठिकाना ही नहीं है। ऐसे में में एक है बाबा बमबमनाथ (Aghori Baba Bam Bam Nath), जो महाकाल की सवारी का पूरा खर्च उठाते हैं। महाकाल की नगरी में लोग उन्हें इसी रूप और नाम से में जानते हैं।

आपको बता दे की सावन भादौं माह हर सोमवार महाकाल की सवारी (Mahakal Sawari) निकलती है। जिसे पूरे उज्जैन में बड़े ही शान से निकाला जाता है। सवारी के रास्ते फूलों से सजाए जाते हैं, जगह-जगह बंदनवार लगाए जाते हैं, आतिशबाजी की जाती है। अनेक जगह पर टेंट लगते हैं। यहाँ तक के रेड कारपेट बिछाई जाती है। इस सब मे लाखों रुपए खर्च भी होते हैं। महाकाल की सवारी के लिए यह राशि बाबा बमबमनाथ (Baba Bam Bam Nath) ही देते हैं।

बता दें की बाबा बमबमनाथ पिछले 15 साल से महाकाल की शाही सवारी में होने वाला सारा खर्च उठा रहे हैं। इस तरह एक अनुमान के अनुसार वे महाकाल शाही सवारी पर करोड़ों रुपए खर्च कर चुके हैं। अघोरी बाबा बमबमनाथ (Aghori Baba Bam Bam Nath) के पास इतना पैसा कैसे आता है? यह सवाल पूछने पर बाबा बताते है की सब बाबा महाकाल की माया है। वे ही कराते हैं, हमें तो बस जो आदेश मिलता है, उसको पूरा करना रहता है। बाबा बमबमनाथ महाकाल के बहुत होइ बड़े और निराले भक्त हैं।

बाबा बमबमनाथ रोज सुबह महाकाल के दर्शन करने जाते हैं। महाकाल के भक्तों के लिए उनका हाथ हमेशा खुला रहता है। सावन में पूरे महीने भंडारा चलाते हैं। कांवड यात्रा के लिए भी सभी प्रकार के इंतजाम वे ही करवाते है। कावड़ियों के आने-जाने से लेकर उनके रुकने, खाने और चीज़ों की व्यवस्था भी बाबा ही करवाते है। बमबमनाथ पूरी तरह से अघोरी बाबा हैं, चिलम पीते हैं और तांत्रिक क्रियाएं भी करते हैं। नदी किनारे तपस्या भी करते हैं।

अघोरी के रूप में श्मशान में शिप्रा नदी के किनारे रहते हैं। बताते हैं वे तांत्रिक क्रियाएं भी करते हैं। यहां उनके शिष्य भी रहते हैं। वे नाममात्र के काले रंग के कपड़े पहनते हैं, भस्म रमाते हैं और चिलम पीते हैं। वे एंड्रॉयड मोबाइल इस्तेमाल करते हैं और वॉइस कमांड से मोबाइल ऑपरेट करते हैं। कुछ समझ नहीं आने पर उनके शिष्य तुरंत उनकी मदद करते हैं। रहने के लिए उनके पास एक बड़ा हॉल है, जिसमें कोई दरवाजा नहीं है। वे तपस्या करते हैं, हवन करते हैं।

श्मशान में बाबा बमबम नाथ अघोरी आत्माओं के लिए भंडारा भी करते हैं। बाबा ने बताया कि जीवित लोगों के साथ-साथ मृत लोगों के लिए भी भंडारा किया जाता है। दिन में जीवितों के लिए और रात में मृत लोगों के लिए भंडारा किया जाता है। मृत लोगों के लिए भंडारा इसलिए किया जाता है, क्योकि कई आत्माएं ऐसी होती हैं, जिन्हें उनकी रुचि के अनुसार भोजन नहीं मिल पाता और मोक्ष नहीं मिलने से वह भटकती रहती हैं।

सांकेतिक भाषा में उनसे बात कर उनकी इच्छाओं को पूरी कर मोक्ष के लिए मदद की जाती है। भंडारे के पहले यज्ञ किया जाता है, जिसमें शिव की स्तुति कर आत्माओं के मोक्ष के लिए प्रार्थना की जाती है। शिव को भोग के बाद भंडारे का आयोजन होता है। भंडारे में रोज अलग-अलग पकवान बनाए जाते है। पकवान शुद्ध घी से बने होते हैं।

पूजा के बाद मध्य रात्रि में आत्माओं को निमंत्रण देकर बुलाया जाता है। एक बड़ी थाली में शुद्ध भोजन को सजाकर उनके बताए स्थान पर रख दिया जाता है। इसके पास एक घी का दिया और शुद्ध पानी रखा जाता है। यह सब बाबा के निर्देश से ही होता है।

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