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कानास: भारत एक अनोखा देश है और यहाँ की प्राचीन संस्कृति हिन्दू मंदिरों और देवी देवताओं की मूर्तियों के लिए ही जानी जानती है। ऐसे में समय समय पर भारत की धरती मंदिरो के अवशेष और मुर्तिया अपने अंदर से निकालती रहती है। ऐसे में जो पुराने समय में मंदिर या मूर्तियां किसी न किसी कारण से नष्ट होकर धरती में समा गए थे। वे कभी ना कभी खुदाई या किसी अन्न कारण से मिल जाय करते हैं।
दुनिया के कोने कोने से पुरातत्वविद और इतिहासकार भारत आते रहे है। भारत की संस्कृति और यहाँ का हिन्दू धर्म पूरी दुनिया में सबसे पुराना और प्राचीन है। भारत की प्राचीन संस्कृति की पहचान हिन्दू धर्म है और यहाँ से मंदिर। कई मंदिर तो प्राकृतिक है और कई इतने प्राचीन है की उनकी सही सही तारीख निकाल पाना असंभव है।
ओडिसा राज्य में पुरी जिले की साहुपदा पंचायत के तानामान गांव के में एक अनोखी घटना देखने को मिली। श्रावण मास के पवित्र दिनों में भगवान शिव का एक प्राचीन शिवलिंग मिलने की खबर से स्थानीय ग्रामीण उत्साहित नज़र आ रहे हैं। एक सूत्र के मुताबिक, तनमन गांव के किसान कलुचरण परिदा बुधवार की दोपहर को खेत में हल चला रहा था, जब उन्हें लगा कि उनके हल में कुछ जोरसे टकराया है।
इसके बाद जिज्ञासा होने पर कालूचरण ने उसी जगह पर खोदने का काम चालू किया। उन्हें उसी जमीन पर एक शिवलिंग प्राप्त हुआ। उसने अपने पड़ोसियों और अन्य ग्रामीणों को इसकी सुचना दी। यह खबर फैलते ही गांव और आसपास के सैकड़ों लोग शिवलिंग के दर्शन करने के लिए इकट्ठे होने लगे।
यह शिवलिंग पुरी से 40 किलोमीटर की दूरी पर कनास के पास सहुपद गाँव में पाया गया।
एक किसान को अपने खेत की जुताई के दौरान यह विशाल शिवलिंग मिला ।
#हर_हर_महादेव 🚩🙏 pic.twitter.com/8jhaDhPqXK— Sønālî 🇮🇳 (@SonaMan) July 17, 2020
हाल ही में ऐसी ही एक घटना में ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के नयागढ़ जिले में महानदी के पानी में 500 साल पुराने गोपीनाथ मंदिर का ऊपरी हिस्सा दिखाई दिया था। स्थानीयों लोगो ने बताया था कि नदी के पानी में डूब चुके इस मंदिर के दर्शन 11 साल पहले हुए थे। इसके बाद अब जाके नदी के पानी का स्तर कम होने से अब पुनः मंदिर के दर्शन हुए हैं।
आपको बता दे की गोपीनाथ मंदिर के उप्पर के हिस्से दे दिखने के बाद इसे INTACH की महानदी वैली हेरिटेज साइट्स डॉक्यूमेंटेशन प्रोजेक्ट का हिस्सा बना दिया गया था। मीडिया की खबर के अनुसार साल 1933 में यह गाँव पूरी तरह से नदी में विलीन डूब गया था। उस साल बाढ़ आने के साथ नदी अपनी धारा बदलकर व् की तरफ मुड़ गई थी और पूरा गाँव जलमग्न हो गया था।
ओडिशा के अधिकारी ने मीडिया में बताया था की ओडिशा में ऐसे बहुत से मंदिर हैं, जो पानी में डूबे हुए हैं। इसमें हीराकुद जलभंडार में 65 मंदिर शामिल हैं। नदियों में भी बहुत से मंदिर ड्प्प्बे हुए हैं, जिनका सर्वे होना चाहिए। इस प्रदेश में हमेशा से बाढ़ आने से अनेक गांव और मंदिर जलमग्न होने से समय समय पर होनी उपस्थिति दर्ज़ करवाते रहते हैं।



