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मैसूर, कर्नाटक: मैसूर हम अपने अतीत को कभी भुला नहीं सकते हैं। समय समय पर कुदरत और हमारा अतीत अपने होने के संकेत हमें देते रहते हैं। ठीक ऐसा ही संकेत अब कर्णाटक में देखने को मिला है। इस साल सावन के महीने में महादेव का महीना प्रारम्भ हो गया है। सावन के प्रारम्भ होते ही शिव के चमत्कार देखने को मिलने लगे है।
ये शिव चमत्कार कर्नाटक के मैसूर में हुआ है। मैसूर के पास एक सूखी झील में खुदाई के वक्त सैकड़ों साल पुरानी भगवान शिव की सवारी नंदी बैल की दो मूर्ति मिली हैं। मीडिया की खबरो के अनुसार मैसूर से करीब 20 किमी दूर बसे अरासिनाकेरे की एक झील जो सदियों से सूखी पड़ी है, जिसकी खुदाई के वक्त नंदी बैल की सदियों पुरानी मूर्ति का यह जोड़ा मिली है।
गांव के लोगो ने कहा है कि खुदाई करके प्रतिमाओं को बाहर निकालने का काम यहां के स्थानीय नागरिकों ने मिलकर किया है। सूत्रों की खवरो के मुताविक अरासिनाकेरे के वृद्ध आदमी इस झील में नंदी की मूर्ति होने का दावा करते थे। बुजुर्गो द्वारा कई बार मूर्ति देखे जाने के किस्से सुने जाते रहे थे, परन्तु किसी ने भी इन दावों को गंभीरता से नहीं लिया था।
गाँव के वृद्ध आदमी ने बताया कि जब कभी झील में पानी का लेवल कम होता था, तो बताया जाता था कि मूर्ति का सिर दिखाई देता था है। इस वर्ष नदी के पूरे तरह से सूख जाने के बाद गांव में रह रहे लोगो ने इस स्थान पर खुदाई करके सच को जानने का विचार बनाया। फिर गाँव के लोगो ने मिलकर झील की तीन से चार दिनों तक खुदाई की।
मैसूर, कर्नाटक ने खबर: सूखी झील की खुदाई में भगवान शिव के वाहन नंदी की प्राचीन मूर्ति मिली। इतनी विशाल मूर्ति देश लोगो के आश्चर्य का कारण बनी। देखने भारी भीड़ लग रही है। pic.twitter.com/tczJ14Qkfv
— sanatanpath (@sanatanpath) July 18, 2019
गाँव के लोगो ने अच्छी तरह से खुदाई के लिए जेसीबी (JCB) मशीन भी बुलवाई। जिससे सच की पुष्टि हो सके। करीब चार दिनों तक लगातार चली खुदाई के बाद झील की जमीन के नीचे मलवे में दबी नंदी बैल की मूर्ति को बाहर निकाल लिया गया है। तब यह भगवान् नंदी की मूर्ति देखकर लोगो को हैरानी और प्रसन्नता हुई।
इस बात की खबर मिलते ही पुरातत्व विभाग के अफसरों की एक टीम भी वहां आ गई थी। पुष्टि की जा रहा है कि ये जो प्रतिमाएं है वो विजयनगर काल के बाद की हैं। यह लगभग 16 वीं या 17 वीं शताब्दी की हो सकती हैं। एक अनुमान के मुताबिक़ इस तरह की मुर्तिया इसी काल में बनाई जारी रही थी।



