दुनिया का इकलौता जीवित शिवलिंग इंसानों की तरह बढ़ता है, जिसके आगे वैज्ञानिको ने भी घुटने टेके

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File Photo

Khajuraho MP: विज्ञान ने भले ही कितनी कामयाबी हासिल क्यों न कर ली हो, लेकिन ईश्वरीय चमत्कार के आगे उसकी कभी नहीं चल पाई है। हालांकि ऐसे बहुत से लोग हैं, जो ईश्वरीय सत्ता पर विश्वास नहीं करते और वे इस चमत्कार को संयोग या फिर भ्रम बताकर नजरअंदाज करते हैं, लेकिन आस्था के आगे विज्ञान और तर्कों की एक नहीं चलती। जिन लोगों में आस्था होती हैं, वे तर्कों पर नहीं जाते। उनका विश्वास केवल परमपिता परमेश्वर पर होता है।

खजुराहो के मंदिर वैसे तो दुनिया भर में कला के मंदिरों के रूप में बेशुमार हैं, लेकिन मतंगेश्‍वर शिव मंदिर (Matangeshwar Mahadev Mandir In Khajuraho Chattarpur) आस्था का बड़ा केंद्र है। यह एक ऐसा मंदिर है जहां प्राचीन समय से लगातार पूजा अर्चना होती चली आ रही है। इस मंदिर में स्तिथ शिवलिंग के बारे में ऐसी मान्यता है कि ये हर साल तिल के बराबर बढ़ता है। यही नहीं कहा तो यहां तक जाता है कि चंदेल राजाओं (Chandel Kings) द्वारा 9वीं सदी में बनाए गए, इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग (Shivlinga) के नीचे एक ऐसी मणि है, जो हर मनोकामना पूरी करती है।

भगवान शिव (Bhagwan Shiva) के कईं ऐसे मंदिर है, जहाँ ऐसे-ऐसे चमत्कार (Miracle) हुए है, जिन्हें देखने के बाद खुद की आँखों पर ही भरोसा कर पाना सम्भव नही होता है। ऐसा ही एक मंदिर मध्य प्रदेश के खजुराहो में स्थित है। इस मंदिर की सबसे अनोखी बात मंदिर में मौजूद शिवलिंग है जिसे जीवित शिवलिंग के नाम से भी जाना जाता है। इस अदभुत शिवलिंग का आकार अपने आप ही बढ़ता रहता है।

ऐसा माना जाता है कि इस शिवलिंग में साक्षात् भगवान शिव का वास है। इसलिए भगवान शिव के भक्त दूर दूर से इस शिवलिंग के दर्शन पाने के लिए और महादेव् का आशीर्वाद पाने के लिए आते रहते है। शिवलिंग को साक्षात शिव का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। लेकिन जिस शिवलिंग की हम यहां बात कर रहे हैं वह वाकई अद्भुत है।

यह शिवलिंग खजुराहो मध्य प्रदेश (Khajuraho Madhya Pradesh) के मतंगेश्वर मंदिर (Matangeshwar Mahadev Temple) में स्थित है, जिसे ‘जीवित’ माना जाता है। यह शिवलिंग पृथ्वी का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है, जो जीवित अवस्था में है। जो लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान समय में इस शिवलिंग़ की लंबाई 9 फीट से ऊपर है। लगातार बढ़ते रहने की वजह से इसकी ऊंचाई का सही आंकलन स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता।

किस सन में बनाया गया मतंगेश्वर मन्दिर

खजुराहो के मंदिरों (Khajuraho Temples) में पवित्रतम माना जाने वाले, इस मंदिर की वर्तमान में भी पूजा- अर्चना की जाती है। यह अलग बात है कि यह मंदिर इतिहास का हिस्सा है, लेकिन यह आज भी हमारे जीवन से जुड़ा हुआ है। लक्ष्मण मंदिर के पास ही, निर्मित यह मंदिर 35 का वर्गाकार है। गर्भगृह भी चौरस है। इसका प्रवेश द्वार पूर्वी ओर है।

यह मंदिर अधिक अलंकृत नहीं है। सादा दिखाई देने वाले इस मंदिर का शिखर बहुमंजिला है। इसका निर्माणकाल 950-1002 ई. सन् के बीच का है। इसके गर्भगृह में वृहदाकार का शिवलिंग है, जो 8’4 ऊँचा है और 3’8 घेरे वाला है। इस शिवलिंग को मृत्युंजय महादेव (Mrityunjay Mahadev) के नाम से जाना जाता है।

मंदिर की बनावट कैसी है?

त्रिरथ प्रकृति का यह मंदिर भद्र छज्जों वाला है। इसकी छत बहुमंजिली तथा पिरामिड आकार की है। इसकी कुर्सी इतनी ऊँची है कि अधिष्ठान तक आने के लिए अनेक सीढियां चढ़नी पड़ती है। मंदिर खार-पत्थर से निर्मित किया गया है। भद्रों पर सुंदर रथिकाएँ हैं और उनके ऊपरी भाग पर उद्गम है। इसका कक्षासन्न भी बड़ा है। इसके अंदर देव प्रतिमाएँ भी अधिक संख्या में नही है।

गर्भगृह सभाकक्ष में वतायन छज्जों से युक्त है। इसका कक्ष वर्गाकार है। मध्य बंध अत्यंत सादा, मगर विशेष है। इसकी ऊँचाई को सादी पट्टियों से तीन हिस्सो में बांटा गया है। स्तंभों का ऊपरी भाग कहीं- कहीं बेलबूटों से सजाया गया है। वितान भीतर से गोलाकार है। यह एक मात्र मंदिर है, जिसका आकार लगातार बढ़ता जा रहा है। पूजा- अर्चना सदियों से चली आ रही है। इस मंदिर का धार्मिक महत्व प्राचीन है।

क्या है वैज्ञानिक तर्क

साइंस (Science) कितनी ही तरक्की क्यों न कर ले, लेकिन कुछ गुत्थियां वैज्ञानिकों की समझ से परे होती हैं। ऐसी ही एक गुत्थी भगवान शिव की शिवलिंग से भी जुड़ी हुई है। वो शिवलिंग से जिसे जीवित शिवलिंग के नाम से जाना जाता है। कई लोगों को ये बात आश्चर्य में डाल सकती है, पर सत्य ये है कि मध्यप्रदेश में भगवान शिव की एक जीवित शिवलिंग है।

मतंगेश्वर महादेव नामक ये शिव मंदिर मध्यप्रदेश के खजुराहो में है। कहते हैं कि ये दुनिया का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है, जो लगातार बढ़ता जा रहा है। इसलिये इसे जीवित शिवलिंग भी कहा जाता है। शिवलिंग की लंबाई 9 फ़ीट है। शिवलिंग की लंबाई हर साल एक इंच बढ़ती जा रही है। कहा जाता है कि जिस दिन शिवलिंग पाताल लोक के अंदर पहुंच जायेगा, उस दिन दुनिया ख़त्म हो जायेगी।

स्नेह के देवता हैं मतंगेश्वर

खजुराहो का मतंगेश्वर महादेव मंदिर आश्चर्य (Mysterious Matangeshwar Mahadev Temple) भरा हुआ है। इस मंदिर में विशाल शिवलिंग मौजूद है, जो ढाई मीटर ऊंचा और एक मीटर व्यास का है। मान्यता है कि यह शिवलिंग जितना जमीन के ऊपर है, उतना ही जमीन के नीचे भी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस मंदिर में शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। जिसकी वजह से यह मंदिर आदि देव और आदिशक्ति के पवित्र प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

चमत्कारिक है यह शिवलिंग

मतंगेश्वर शिवलिंग (Matangeshwar Shivling) का आकार धरती के ऊपर और नीचे हर साल बढ़ जाता है। धरती के अंदर तो इस शिवलिंग की वृद्धि की पुष्टि करना मुमकिन नहीं। लेकिन धरती के ऊपर हर साल की कार्तिक पूर्णिमा के दिन पर्यटन विभाग के कर्मचारी आकर इस शिवलिंग की माप करते हैं। जिससे पता चलता है कि इस शिवलिंग का आकार हर साल बढ़ रहा है।

मनोकामना पूरी करने वाला लिंग है मतंगेश्वर

मतंगेश्वर महादेव का यह मंदिर मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए जाना जाता है। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। दूर दूर से भक्त अपनी मनोकामना लेकर भोलेनाथ के मन्दिर आते है। मान्यता है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। इस मंदिर में प्रतिदिन नियमपूर्वक पूजा अर्चना की जाती है।

कितना बढ़ता है प्रतिवर्ष

इस शिवलिंग की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि यह जितना पृथ्वी से ऊपर है उतना ही पृथ्वी के नीचे समाया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह शिवलिंग़ प्रतिवर्ष 1 इंच और ऊंचा हो जाता है। स्थानीय लोग तो यह भी मानते हैं कि जिस दिन यह शिवलिंग़ बढ़ते हुए पाताल लोक को स्पर्श कर जाएगा उसी दिन इस दुनिया का अंत भी निश्चित है।

क्या है इस शिवलिंग की कहानी

हमारे पौराणिक कथा में इस जीवित शिवलिंग का उल्लेख मिलता है। पुराणों में जीवित शिवलिंग की बात उल्लेख में आती है। जिसके मुताबिक, भगवान शिव ने युधिष्ठिर को एक चमत्कारी मणी दी थी। युधिष्ठिर के ज़रिये वो मणी मतंग ऋषि के पास पहुंच गई। ऋषि ने जादुई मणी राजा हर्षवर्मन को सौंप दी, जिसे राजा ने जमीन में गाण दिया।

जमीन में गणने के बाद मणी की देख-रेख करने के लिये कोई नहीं था। इसलिये उससे एक चमत्कारी शिवलिंग का निर्माण हुआ और नाम रखा गया मतंगेश्वर शिवलिंग। इंसान की तरह ये शिवलिंग का आकार भी बढ़ता चला जा रहा है, जिस वजह से इसे जीवित शिवलिंग कहा जाता है। ये शिवलिंग इतनी रहस्यमयी है, जिसे अब तक वैज्ञानिक भी नहीं समझ पाये हैं।

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