इसे भारत और दुनिया का सबसे पुराना मंदिर कहा जाता है, रहस्यमई प्राचीन मंदिर के Facts जाने

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Image Credits: Twitter Posts

Kaimur/Bihar: पूरे विश्व का सबसे पुराना और प्राचीनतम धर्म हिन्दू धर्म है। हिन्दू धर्म को मानने वाले पूरी दुनिया में पाए जाते है और दुनिया के सबसे प्राचीन धर्म हिन्दू सनातन धर्म की संस्कृति के रंग में पूरी दुनिया और सभी धर्मों के लोग रंगे हुए है। देश और विदेश में अनेक प्राचीन हिन्दू मंदिर और मुर्तिया को देखने को मिल जाएँगी। मन में एक सवाल उठता है की देश या दुनिया का सबसे पुराना मंदिर कोनसा है या रहा होगा। आज हम ओस बात की पड़ताल के नजदीक पहुँच गए है। ऐसा एक मंदिर आज भी माना जाता है, जो दुनिया का सबसे पुराना मंदिर है और यहाँ आज भी पूजा होती है।

मंदिर के गर्भगृह में शिव और शक्ति अर्थात देवी की मूर्तियां हैं। आज के दौर में मंदिर का कुछ हिस्सा टूटा हुआ है। यहाँ देखी जाने वाली कई मूर्तियां खंडित स्थिति में हैं। यह मंदिर बिहार राज्य में कैमूर जिला की कैमूर पहाड़ी पर 650 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। स्थानीय लोगो द्वारा बताया जाता है की ओस प्राचीन मंदिर का पुराना शिखर नष्ट हो चुका हैं। बाद में उसकी जगह नई छत बना दी गई है। इसका जिक्र अंग्रेज इतिहासकार कनिंघम ने भी किया है।

श्रीलंका के श्रद्धालु एक वक़्त यहाँ आते रहे थे

यह प्राचीन मुंडेश्वरी मंदिर बिहार के भी सबसे पुराने मंदिरों में शामिल है। कुछ जानकार लोग और अध्ययन करने वाले इतिहासकार इस मंदिर को बहुत ही पुराना मानते हैं। इस बात के साक्ष्य भी मौजीद हैं कि श्रीलंका के श्रद्धालु एक वक़्त यहाँ आते रहे थे, इसे 635-636 ईस्वी में भव्य मंदिर बनाया गया था। अर्थात यह मंदिर 635-636 ईस्वी से भी पुराना रहा होगा।

प्राचीन समय में यहां दर्शन के लिए श्रीलंका से भी श्रद्धालु आते रहे थे। इस बात का प्रमाण मंदिर के रास्तों में पाए गए सिक्के हैं। प्राप्त सिक्कों और पहाड़ी के पत्थरों पर तमिल और सिंहली भाषा में अक्षर देखने को मिले हैं। पहाड़ी पर एक गुफा भी है। यहां से प्राप्त कुछ लिपियों और कई खंडित मूर्तियां पटना के संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई हैं।

इसे देश का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है

इस मंदिर (Mundeshwari Temple Bihar) की अभी वाली स्थापना 108 ईस्वी में Ancient राजाओं के शासनकाल में हुई पाई गई है। यहां शिव और पार्वती की पूजा होती है। प्रमाणों के आधार पर इसे देश का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में पिछले 2026 सालों से लगातार पूजा हो रही है। कुछ के अनुसार मंदिर से प्राप्त शिलालेख के अनुसार उदय सेन के शासन काल में इसका निर्माण हुआ था।

इस मंदिर से जुडी बातों के मुताबिक़ लोगों की मान्यता है कि चंड-मुंड नाम के असुरों का नाश करने के लिए, जब देवी प्रकट हुई थी, तब चंड के वध जाने के बाद मुंड इसी पहाड़ी में आकर छिप गया था। यहीं पर देवी ने मुंड का वध किया था और असुरों का नाश किया था। इसी वजह से इसे मुंडेश्वरी माता का मंदिर कहा जाता है।

बिहार की कैमूर पहाड़ी पर मंदिर (मुंडेश्वरी मंदिर) के आस पास बिखरे पत्थरों में सिद्धयंत्र और श्लोक देखने को मिलते हैं। मंदिर के गर्भगृह की बनावट अष्टाकार है। एक कोने में देवी मुंडेश्वरी और बीच में चतुर्मुखी शिवलिंग विराजमान है। मंदिर में बाहर भी अनेक प्राचीन खंडित पत्थर और मुर्तिया देखने को मिलती है। माना जाता है की यह मंदिर दुनिया का सबसे पुराना मंदिर है और खोजकर्ता भी इस मंदिर की प्राचीनता का आंकलन नहीं कर पाए है। जितनी प्राचीनता का आंकलन किया जाना संभव है, यह उससे भी अधिक प्राचीन है।

कुछ लोग मुंडेश्वरी मंदिर (Mundeshwari Mandir) को भारत का सबसे पुराना मंदिर मानते हैं, जो बिहार के कैमूर जिले में स्थित है। यह भारत का सबसे पुराना मंदिर है जो अभी भी श्रद्धालुओं के लिये खुला है। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण ने इसे बहाल कर दिया है और इसका निर्माण संभवतः 108 ईस्वी का बना बताया गया है। तब से इस मंदिर में उसी भक्ति के साथ पूजा की जा रही है। मुंडेश्वरी मंदिर भगवान शिव और देवी शक्ति के लिए समर्पित है। मंदिर में भगवान गणेश, विष्णु, सूर्य और माता देवी जैसी अन्य मूर्तियां भी हैं।

मंदिरों का निर्माण लगभग 2000 साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन भारत के सबसे पुराने मंदिर का जवाब पाने का सवाल थोड़ा मुश्किल है। अनेक मंदिरो पर अलग दावे किये जाते रहे है। कौमी आक्रमणों ने भारत के विशेषकर उत्तर भारत के कई मंदिरों को तहस नहस कर दिया, इसलिए भारत में सबसे पुराना मंदिर साबित करने का दावा अधिक कठिन हो गया।

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