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Karachi/Pakistan: पूरे विश्व का सबसे पुराना और प्राचीनतम धर्म हिन्दू धर्म है। हिन्दू धर्म को मानने वाले पूरी दुनिया में पाए जाते है और दुनिया के सबसे प्राचीन धर्म हिन्दू सनातन धर्म की संस्कृति के रंग में पूरी दुनिया और सभी धर्मों के लोग रंगे हुए है। आज का युग कलयुग है और कलयुग के देवता हनुमान जी को कहा गया है। राम भक्त हनुमान जी को सारी दुनिया में पूजा जाता है। हनुमान जी में देश और दुनिया के लोगो में गहरी आस्था है। अलग अलग देखो में हनुमान जी (Hamuman Ji) को अलग अलग नाम और रूप में पूजा जाता है। अनेक देशो में हनुमान भगवन की मुर्तिया आपको दिख जाएँगी।
ऐसे ही पाकिस्तान में भी एक प्राचीन हनुमान मंदिर है, जो करांची में स्थित है और पंचमुखी हनुमान मंदिर करांची (Panchmukhi Hanuman Mandir Karachi, Pakistan) के नाम से जाता जाता है। पाक के सबसे बड़े शहर कराची में इसी मंदिर की खुदाई के दौरान बहुमूल्य प्राचीन मूर्तियां प्राप्त हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। यह हिन्दू मूर्तियां कराची के सोल्जर बाजार के विख्यात पांचमुखी हुनमान मंदिर की खुदाई के वक़्त लोगो को प्राप्त हुई।
इन प्राचीन मूर्तियों (Ancient Statues) को बेशकीमती बताया जा रहा है। इन हिन्दू मूर्तियों को लगभग 1500 साल पुरानी (1500 Year Old) बताया जा रहा है, जबकि पाकिस्तान को एक देश बने अभी 100 साल भी नहीं हुए है। यहाँ तक के पाकिस्तान में जिस धर्म को बहुतायत में माना जाता है, वह भी केवल 1400 साल पुराना है। ऐसे में पाकिस्तान की जमीन के अंदर आज भी हिन्दू इतिहास और संस्कृति की सबूत मौजूद है।
पाकिस्तान में मंदिर की खुदाई दौरान मिली सुरंग, निकलीं हनुमान व गणेश की बेशकीमती मूर्तियांhttps://t.co/bWGPSPrecq #Panchmukhi #HanumanMandir #Pakistan pic.twitter.com/oQdrhNky5o
— World Kesari (@WorldKesari) September 4, 2019
करांची में खुदाई में मिली इस मूर्तियों को पीले पत्थर (Yellow Stone) से बनाया था और इन पर सिंदूर (Sindoor) के निशान भी देखने को मिले है, जो की 1500 साल पुराने सिन्दूर के हैं। यह खोज और मुर्तिया बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह मूर्तियां भगवन हनुमान, गणेश जी और नंदी जी की हैं। करांची के सोल्जर बाजार की संकरी गलियों और व्यस्त बाज़ार पर स्थित इस हनुमान मंदिर मरम्मत और रेनोवेशन के लिए खुदाई के काम के दौरान मजदूरों को अलग-अलग आकार की 15 मूर्तियां मिलने की खबर है।
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के कराची शहर के सोल्जर बाजार के श्री पंचमुखी हनुमान मन्दिर में खुदाई के दौरान 15 बेशकीमती पीले पत्थर से बनी हनुमानजी,गणपति एवं नंदी महावीर की मूर्तियां मिली हैं।
1500 साल पुरानी मूर्तियों के साथ हवन कुंड,अस्थि कलश और सुरंग भी मिली है। pic.twitter.com/EXRVXfhFkv— श्रीकृष्ण शर्मा🇮🇳 (@Sharmakrishna6) September 4, 2019
यहाँ प्राचीन पंचमुखी हनुमान मंदिर (Panchmukhi Hanuman Temple) के पुराने भाग में जमीन की खुदाई के दौरान इन मूर्तियों के अलावा एक हवन कुंड और एक छोटी सुरंग भी मिली, जिसमें अस्थि कलश प्राप्त हुआ है। इस कलश के पास किसी इंसान के कुछ सामान भी मिले हैं, जिससे यह ज्ञात पड़ता है की यह 1500 साल पहले किसी साधु-संत की जगह रही होगी।
पंचमुखी हनुमान मंदिर करांची पाकिस्तान
कराची पाकिस्तान (Karachi Pakistan) में मौजूद पंचमुखी हनुमान भगवन का ये मंदिर बहुत चमत्कारी (Miracle Hanuman Temple) माना जाता है। ये मंदिर अपने आप में अलग और विचित्र है। कराची के इस हनुमान मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। कहा जाता है कि इस मंदिर की पंचमुखी हनुमान मूर्ति (Panchmukhi Hanuman Statue) हजारों साल पुरानी है। इसके बारे में उल्लेख मिलता है कि भगवान राम (Hindu God Ram) भी इस जगह एक बार आये थे।
1500 yrs old Panchmukhi Hanuman Mandir in Karachi, Pakistan is one of the oldest hindu temples in Pakistan.
The temple holds special significance for Hindus as it is the only shrine in the world which is said to have a “natural statue” of Hanuman that is not man-made.#HanumanJi pic.twitter.com/VsAtzLHvWf— Indian Art (@IndiaArtHistory) April 8, 2020
इस ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर में हनुमान जी के दर्शन के लिए हर दिन पाकिस्तान के हिन्दू भक्तों की भीड़ लगी रहती है। ऐसा माना जाता है कि जिस स्थान पर यह मंदिर है, वहां से 11 मुट्ठी मिट्टी हटाने पर यह पंचमुखी हनुमान मूर्ति प्रकट हुई थी। जो इस वक़्त मंदिर में स्थापित है, जिसे आप नीचे दिए गए ट्वीट में देख रहे है।
Unique Hanuman Statue in Karachi Temple,Pakistan pic.twitter.com/wPwdfTbu78
— Krishina (@RawtaniKrishin) December 24, 2015
ऐसा कहा जाता है की इस पंचमुखी हनुमान मंदिर और अंक 11 का गहरा संबंध है। इस मंदिर में भगवान हनुमान की 11 परिक्रमा लगाने पर भक्तों की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं और मांगी गई सभी मनोकामना भी पूरी होती है। मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास तो कई लाख साल पुराना है, परन्तु आज का जो मंदिर देखा जाता है, उसका 1500 साल पुराना है। यह मंदिर 1500 साल से लरंचि में था और इस मंदिर का अंतिम पुनर्निर्माण साल 1882 में किया गया था।



