इस दिन किन्नरों की शादी धूम धाम से होती है। आज भी महाभारत की यह प्रथा चली आ रही है।

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Kinnar Marriage Fevtival
Tamilnadu old tradition of dramatic marriage of Bhagwan Irawan and Kinnars. Kinnar Marriage festival in Tamilnadu. God Irawan and Kinnar Marrige linked to Mahabharta Story.

File Presentation Photo

Chennai: भारत देश का इतिहास और यहाँ के रीती रिवाज़ एक दूसरे से जुड़े हुए है। हर रीज़ त्यौहार के पीछे उसका इतिहास और सच्ची घटना की कहानी (True Story) छिपी हुई होती है। हमारे देश में कई परम्परा सदियों से चली आ रही है, इन्ही परम्पराओं में एक ऐसी परम्परा किन्नरों से संबंधित है। इस परम्परा को एक रीत और त्यौहार (Festival) के रूप में मनाया जाया है, जो की आपको हैरान कर देगा। यह परम्परा आज भी निभाई जा रही है, जो की आज से हज़ारों साल पहले महाभारत काम में शुरू हुई थी।

हमारे बीच स्त्री और पुरूष के अलावा भी एक जेंडर है, जिसे किन्नर (Kinnar) कहते है। आप लोगों ने अक्सर इन्हें शादी-विवाह, बच्चों के जन्म आदि मौकों पर घर आते और रस्मे निब होते देखा होगा, पर क्या यह पता है कि इन किन्नरों का भी विवाह होता है। जी हाँ किन्नर भी शादी करते है, परंरु केवल एक रात के लिये ही यह शादी होती है।

इस एक रात की शादी के बाद वे विधवा हो जाते है। असल में एक परंपरा के मुताबिक़ किन्नर केवल एक रात (One Night) के लिये अपने भगवान से विवाह (Kinnar Marraige) करते है। उसके अगले दिन ये खुद को विधवा कर लेते है। इनके यह भगवान है अर्जुन (Arjun) और नाग कन्या उलूपी (Ulupi) की संतान इरावन (Iravan) जिन्हे भगवन अरावन (Bhagwan Irawan) के नाम से भी जाना जाता है।

किन्नरों का यह विवास (NEUTRAL Marriage) एक विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है और इसे देखने के लिए आपको तमिलनाडु (Tamilnadu) जाना पड़ेगा। तमिलनाडु में तमिल नववर्ष की पहली पूर्णमासी को किन्नरों के विवाह का यह त्यौहार शुरू होता है, जो की 18 दिनों तक चलता है। 17वें दिन ये अपने भगवान इरावन के साथ शादी (Dramatic Marriage of Irawan) करते हैं और अगले दिन सारा श्रृंगार उतारकर विधवा की तरह विलाप करते हैं।

इन दिनों किन्नरों के भगवान् से विवाह के बाद उत्सव मनाया जाता है और उसके बाद इनके भगवान इरावन को पूरे शहर में घुमाया जाता है। फिर भगवान की मूर्ति को तोड़ दिया जाता है। फिर किन्नर अपना श्रृंगार उतारकर एक विधवा की तरह विलाप करते है। यह परंपरा हर साल इसी तरह होती है। यहाँ पूरे देश से किन्नर आते है। हमारे देश भारत के तमिलनाडु राज्य में देवता अरावन की पूजा की जाती है। अरावन, हिंजड़ो के देवता है इसलिए दक्षिण भारत में हिंजड़ो को अरावनी कहा जाता है।

इसके पीछे एक कहानी है, जो महाभारत काल की एक घटना से जुड़ी हुई है। महाभारत की कथामें बताया गया है कीअर्जुन को, द्रोपदी से शादी की एक शर्त के उल्लंघन के कारण इंद्रप्रस्थ से निष्कासित करके एक साल की तीर्थयात्रा पर भेजा जाता था। वहाँ से जाने के बाद अर्जुन उत्तर पूर्व भारत में जाते है जहाँ की उनकी मुलाक़ात एक विधवा नाग राजकुमारी उलूपी से होती है। दोनों को एक दूसरे से प्यार हो जाता है और दोनों विवाह कर लेते है।

विवाह के कुछ समय पश्चात, उलूपी एक पुत्र को जन्म देती है, जिसका नाम अरावन रखा जाता है। पुत्र जन्म के कुछ समय बाद अर्जुन, उन दोनों को वही छोड़कर अपनी आगे की यात्रा पर चले जाते है। अरावन नागलोक में अपनी माँ के साथ ही रहते है। युवा होने पर वो नागलोक छोड़कर अपने पिता के पास चले जाते है। उस वक़्त कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध चल रहा होता है। ऐसे में पिता अर्जुन अपने पुत्र इरावन को युद्ध करने के लिए तैयार कर देते है।

महाभारत (Mahabharata) के युद्ध में विजय प्राप्त करने के मकसद से पांडवो ने माँ काली की पूजा की और पूजा के बाद इन्हें एक राजकुमार की बलि देनी थी। बलि के लिये कोई भी राजकुमार तैयार नही हुआ। ऐसे में अपनी बलि देने इरावन तैयार हो गया, परन्तु उसकी एक कंडीशन थी कि वह बिना शादी किये अपनी बलि नहीं देगा। वो अविवाहित नहीं मरेगा।

एक और समस्या आई की ऐसे राजकुमार से कौन शादी करेगी, जिसे अगले दिन ही अपनी बलि देकर मरना है। तो भगवान कृष्ण (Bhagwan Krishna) ने इस दिक्कत का समाधान निकाला और श्री कृष्ण (Shri Krishna) ने खुद मोहिनी (Mohini) रूप धारण करके आये और इन्होंने इरवान से विवाह कर लिया। अगले दिन प्रातः राजकुमार इरावन की बलि दे दी गई और श्री कृष्ण ने विधवा की भाँती विलाप किया। आज भी महाभारत की इस घटना को याद करके किन्नर एक दिन के लिये विवाह करते है और अगले दिन विधवा हो जाते है और विधवा की भाँती विलाप करते है।

आज भी यह परंपरा (Tradition) चली आ रही है, जिसे किन्नर समाज से जीवित रखा है। आपको बता दें की किन्नर समाज के लोग श्री कृष्ण के बहुत बड़े भक्त होते हैं। महाभारत में कुछ घटनाएं (Mahabharat Incident) किन्नर किरदार से भी जुडी हुई है और महाभारत के भीस्मपितामह की मृत्यु का कारण भी एक किन्नर ही बनी थी। ऐसे में कुछ घटनाएं किन्नर समाज के लिए बहुत ख़ास है।

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