Friday, January 28, 2022
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भेड़ चराने वाले चरवाहे को मिला करोड़ों का बेशकीमती पत्थर, चमकी किस्मत

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Delhi: इंसान की जब किस्मत पलड़ती है तब देर नही लगता। गरीब इंसानों के साथ अक्सर ये देखा गया है, लेकिन जब गरीब इंसान की किस्मत बदलती गई तो लोग उन्हें सलाम करती है। हमे कभी भी किसी की गरीबी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। कब किसकी किस्मत बदल जाए देर नही लगती है। किसी का भी समय एक सा नहीं होता है। कौन जाने किस दिल तकदीर पलट जाए और पैसो की बारिश होने लगे।

ऐसे शख्सियत के बारे में बता रहे है जो एक भेड़ चराने वाला चरवाहा है। जो रातों रात करोड़पति बन गया। हालांकि उनकी इंसानियत की वजह से उसके हाथ पहले की तरह कुछ भी नही लगा। आखिर ऐसा क्या हुआ था की, चरवाहा करोड़पति बनने के बाद भी करोड़पति क्यों नही बन पाया।

मीडिया से मिली रिपोर्ट के मुताबिक साल फरवरी के महीने में यूके के कॉट्सवोल्ड्स के ग्रामीण इलाके में एक चरवाहे की अचानक से तकदीर पलट गई। भेड़ चराने वाले इस शख्स को एक दिन अचानक से उल्कापिंड के दो छोटे टुकड़े मिल गए। जिसकी कीमत करोड़ रुपए बताई जा रही है। लेकिन इस शख्स की इंसानियत ने उसके हाथ करोड़ों रुपये नहीं लगने दिए। उसने ये बेशकीमती टुकड़े म्यूजियम में दान के रूप में दे दिया।

मीडिया के अनुसार यह टुकड़ा 4 बिलियन साल पुराने है। बताया जा रहा है की इन उल्कापिंड के टुकड़ों की सहायता से इस रहस्य से पर्दा उठाया जा सकता है कि अंतरिक्ष में जीवन की कितनी संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, ये उल्कापिंड करीब 4 बिलियन साल पुराना है, ब्रिटेन में यह पिछले 30 साल में मिला पहला उल्कापिंड है।

आसमान से जो पत्थर जैसे टुकड़े गिरे थे, वो उल्कापिंड थे। लंदन में गिरे इन पत्थर का नाम Winchcombe Meteorite है। ये फरवरी के महीने में गिरे थे और अब इसे म्यूजियम रखा जाएगा। साथ ही इसकी कीमत भी करोडो में आंकी जा रही है और इसी वजह से उस शख्स को भी इनके बदले एक करोड़ रुपये दिए जा रहे थे। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार तकरीबन 4 बिलियन साल पुराने इन उल्कापिंड के टुकड़ों की सहायता द्वारा इस रहस्य से पर्दा उठाया जा सकता है कि अंतरिक्ष में जीवन की कितनी संभावना है।

यूके के कॉट्सवोल्ड्स के ग्रामीण इलाके में भेड़ चराने वाले एक चरवाहे को एक मैदान से यह दुर्लभ उल्कापिंड मिला था। चरवाहे को इसके गिरने की तेज आवाज आई थी। जब वो मैदान पहुंचा वहां उसे 103 ग्राम का पत्थर मिला था। जिस चरवाहे के मैदान में पत्थर गिरा था, उसकी पहचान 57 साल के विक्टोरिया बांड के रूप में हुई। जानकारी के मुताबिक सात वैज्ञानिक इसकी खोज कर रहे थे।

यूके के ग्रामीण क्षेत्र में एक व्यक्ति भेड़ चरा रहा था। इस दौरान उसे दो पत्थर मिले, जो दिखने में आम पत्थर थे। मगर असल में वो उल्का पिंड थे। इन दोनों की पत्थरों की कीमत करीब 1 करोड़ रु बैठती है। असल में बात यह है कि ये पत्थर करीब 400 करोड़ साल पुराने हैं।

आसमान से गिरने वाला उल्कापिंड एक तरह का ठोस टुकड़ा होता है, जो अंतरिक्ष में धूमकेतु आदि से टूटकर नीचे गिर जाता है। यह किसी और सतह पर आने के बजाय वायुमंडल से नीचे आ जाता है। कई बार आप देखते होंगे कि कुछ जलती हुई चीज नहीं गिर जाती है, जिसे कई लोग टूटता हुआ तारा भी कहते हैं। ये वैसे कोई तारे नहीं होते हैं, बल्कि उल्कापिंड होते हैं और वो किसी के घर में गिर जाते हैं तो उसे बेच देते हैं।

इसको स्टोनी, आयरन और स्टोनी-आयरन कैटेगरी में बांटा गया है। इनमें कई सबग्रुप भी होते हैं। Stony meteorites कई तत्व से बने होते हैं, जिसमें सिलिकॉन या ऑक्सीजन जैसे पदार्थ होते हैं। इसके अलावा इनमें निकेल और आयरन भी होता है। Iron Meteorites में सिर्फ आयरन और निकेल होता है। Stony-Iron Meteorites में मेटल के साथ कई और तत्व भी होते हैं। इनपर वैज्ञानिक बहुत गहराई से रिसर्च कर रहे है, यह काफी बेशकीमती बिकते हैं।

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