
Jaipur: भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के इतिहास में एक ऐसी तोप बनाई गई और स्तापित की गई थी, जिसके बारे में सुनते ही दुश्मन कांप जाते और कभी उस किले पर चढ़ाई करने की हिम्मत नहीं की गई। यह टॉप कही और नहीं बल्कि राजस्थान (Rajasthan) के जयपुर (Jaipur) में आप आज भी देख सकते है। जयपुर के पास जयगढ़ किले (Jaigarh Fort) में यह तोप तब से आज तक पहरेदारी कर रही है।
इस तोप के लिए साल 1720 में जयपुर में आमेर के पास जयगढ़ किले (Jaigarh Fort Amer) में विशेष कारखाना बनाया गया था। ईद तोप की टेस्टिंग के लिए जब इससे गोला दागा गया, तो वह 35 किलोमीटर दूर जाकर गिरा। जहां गोला गिरा वहां एक तालाब बन गया। अब तक उसमें पानी भरा है और लोगों के काम आ रहा है। वह तालाब आज भी स्थित है।
दुश्मन इस तोप से के खौफ से भय खाने लगे
यह तालाब बनने का किस्सा दूर-दूर तक फैल गया और एक गॉसिप बन गया और दुश्मन इस तोप से के खौफ से भय खाने लगे। किले के नाम के बेस पर ही इस तोप का नामकरण किया गया था। उस वक़्त अपनी ताकत कायम रखने के लिए राजा और महाराजा युद्ध लड़ा करते थे। ऐसे में सभी अपने पाने किले को सुरक्षित करना चाहते थे। उस समय तोप को सबसे घातक हथियार माना जाता था। ऐसा हथियार, जिसमें बारुदी गोले को रखकर दूर तक दागा जा सकता और विरोधी सेना को भारी नुक्सान पहुंचाया जा सकता था।
उस ज़माने में तोप ऐसा हथियार साबित हुआ था, जिसमें जंग के रुख बदलकर जीत निश्चित करने की क्षमता थी। कई बार यह जंग के हालात को पूरी तरह बदल देती थी। आज भी सभी देश जंग में तोप का इस्तेमाल जरूर करते हैं, जैसे की आज के ज़माने में बोफोर्स तोप या भारत मेड धनुष तोप।
भारत में पहली बार तोप का इस्तेमाल बाबर ने किया
जानकर आप हैरान होंगे कि 13वीं और 14वीं सदी में तोप का इस्तेमाल शुरू हो गया था। 1313 ईस्वी में यूरोप में तोप के इस्तेमाल के साक्ष्य मौजूद हैं। वहीँ भारत में पहली बार तोप का इस्तेमाल पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर ने दिल्ली के बादशाह लोदी के विरुद्ध किया था। इस युद्ध में लोदी की विशाल सेना को बाबर की छोटी सी सेना ने तोप और बारूद के दम पर हरा दिया था।
This gigantic cannon at Jaigarh Fort #Jaipur was never used in a war. It's believed to be world's heaviest at 50 tonnes @incredibleindia pic.twitter.com/MBwg3GlXni
— Shakti Voyages (@shaktivoyages) March 27, 2017
फिर भारत में एक खास तोप बनी, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी तोप (Largest wheeled Cannon in the World) का दर्जा हासिल है। इसके बारे में यह चर्चा भी फेमस है कि इसके एक गोले ने बड़ा तालाब बना दिया। इस तोप का नाम है जयबाण (Jaivana Cannon)। यह जयपुर के किले में रखी है। इस विशाल तोप को 1720 ईस्वी में जयगण किले में स्थापित किया गया था। इस बड़ी तोप का निर्माण राजा जय सिंह (Raja Jai Singh) ने कराया था, जो जयपुर किले के शासक थे। उन्होंने इसका निर्माण अपने किले और राज की सुरक्षा के लिए कराया था।
किसी युद्ध में इसका इस्तेमाल हुआ
इस तोप की आश्चर्यजनक बात यह है की इस तोप को कभी किले से बाहर नहीं ले जाया गया और न ही किसी युद्ध में इसका इस्तेमाल हुआ। क्योंकि यह काफी वजनी है। बताया जाता है कि इसका वजन लगभग 50 टन है। इसे दो पहिया गाड़ी में रखा गया है। जिस गाड़ी पर इसे रखा गया है उसके पहियों का व्यास करीब साढ़े चार फीट है।
The Jaivana Cannon.
Jaigarh Fort, Jaipur
Largest wheeled Cannon in the World.
1720 CE by Jai Singh II#IndianHistory pic.twitter.com/AOiQzGcLJo— #IndianHistory (@RareHistorical) April 23, 2015
इस तोप की गाडी में दो और एक्स्ट्रा पहिये भी लगे हैं। इनका व्यास करीब नौ फीट है। इस तोप में लगभग 50 किलो वजनी गोला इस्तेमाल किया जाता था। इसके बैरल की लंबाई 6.15 मीटर है। बैरल के आगे की ओर नोक के पास की परिधि 7.2 फीट की है। वहीं, इसके पीछे की परिधि 9.2 फीट की है। बैरल के बोर का व्यास 11 इंच है और छोर पर बैरल की मोटाई 8.5 इंच है।
Artillery porn: Visited the world’s largest cannon — the 18th Century ‘Jaivana’ at Jaipur’s Jaigarh Fort. True beast:
Barrel weight: 50 tons
Barrel length: 20 feet
Stated range: 22 miles
Ammo: 50 kg cannonball
Charge: 100 kg gunpowder pic.twitter.com/giknaL1mEq— Shiv Aroor (@ShivAroor) February 12, 2018
इस विशाल और भारी तोप को बनाने के लिए जयगढ़ में ही कारखाने का निर्माण कराया गया। इसकी नाल भी यहीं विशेष सांचे में ढाली गई। इस कारखाने में और भी तोप का निर्माण कराया गया। दशहरे के दिन इस तोप की पूजा भी होती है। एक बार जब इसकी त्जस्टिंग हुई, तब गोला दागा गया तो वह करीब 35 किलोमीटर दूर चाकसू नामक कस्बे में जाकर गिरा। जहां गोला गिरा वहां एक बड़ा तालाब बन गया। इस तालाब में आज भी पानी है और स्थानीय लोग इसे अपने दैनिक जीवन में उपयोग करते हैं।



