
Delhi: केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी जम्मू-कश्मीर में आर-पार की जंग के लिए तैयार हो गई है। पहला प्रयास तो उसकी संगठन की एकजुटता है, जिससे अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति बन सके। खबरो के अनुसार महबूबा मुफ्ती के साथ एक बार फिर कुछ रिश्ते बनते लग रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार भले ही सफल ना रही हो, लेकिन भाजपा तो फायदे में ही रही। बेमेल गठबंधन बताये जाने के बावजूद भाजपा ने आगे आकर PDP के साथ सरकार बनायी और जब PDP कहीं की नहीं रही तो अपना सपोर्ट वापस ले लिया।
समर्थन वापसी को लेकर भी भाजपा ने सारी तोहमत PDP के ऊपर डाल दी। ये जानकारी देने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर जम्मू पहुँचकर वहीं से राष्ट्रवाद का जुनून जगाया। 23 जून 2018 को जम्मू-कश्मीर से अमित शाह ने कोलकाता को ऐसा एकजुट किया कि आम चुनाव में पश्चिम बंगाल में पांव जमाते हुए सत्ता में भाजपा की फिर से वापसी करा दी। अब नंबर जम्मू-कश्मीर का है।
लोक सभा के साथ जम्मू-कश्मीर विधानसभा का चुनाव न कराने को लेकर विरोधी राजनीतिक के निशाने पर रही भाजपा पूरी प्लाइनिंग के साथ युद्ध स्तर पर एकजुट हो चुकी है। खबरो के अनुसार अब तक जो जानकारी मिल रही हैं वे तो यही इन्फॉर्मेशन दे रहे हैं कि भाजपा पहले हर गाँव में तिरंगा फहरा कर माहौल बनाना चाहती है और उसके बाद भगवा लहराने की तैयारी प्रारम्भ करना चाहती है।
ये मिशन कश्मीर से कुछ अलग नजर आ रहा है। इस बार जम्मू-कश्मीर में सरकार किसकी बनती है ये तो परिणाम बताएंगे। लेकिन भाजपा पहले भगवा लहराने पर नही तिरंगा फहराने की प्लाइनिंग कर रही है। भाजपा राष्ट्रवाद के नाम पर जनता को इस छोर या उस छोर खड़ा करना चाह रही है।
अमित शाह के गृह मंत्रालय का कार्यभार की जिम्मेदारी संभालने के बाद से मोदी सरकार की कश्मीर प्लाइनिंग कुछ अधिक ही आक्रामक दिखाई दे रही है। जब से घाटी में 10 हजार सुरक्षा बलों को तैनात करने की जानकारी सामने आयी तब से भूचाल मचा हुआ है।
जम्मू-कश्मीर से धारा 35A समाप्त करने की भी चर्चा प्रारम्भ हो गयी थी और इसको लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आने लगी थीं। लेकिन राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि नागरिक ऐसी किसी भी अफवाहों में ध्यान न दे।



