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Madhapar: भारत की अधिकतर जनता गांव में बस्ती है। लेकिन गांव शहरों की तरह नहीं होते। उनकी पहचान खेत (Farm) हैं। जब भी आंखों के सामने गांव (Village) की तस्वीर बनती है, तो उसमें शहर की तरह ऊंची इमारतें, हाई-फाई स्कूल, बड़े अस्पाताल और मॉल आदि दिखाई नही देते हैं, दिखाई देते है, तो मूलभूत सुविधाओं के अभावों में जीवन जी रहे लोग।
संभव है कि भारत के कई गांवों की स्थिति ऐसी हो, लेकिन भारत में ही एक गांव ऐसा भी है, जिसे देश के सबसे अमीर गांवों (Richest Village In India) में से एक माना जाता है। बैंक जमा के मामले में दुनिया के सबसे अमीर गांवों में से एक भारत में है। भारत की 90 फीसदी आबादी गांवों में रहती है और अर्थव्यवस्था में भी देश की कुल जीडीपी का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा गांवों का ही है।
आइए आज हम आपको भारत के सबसे अमीर गांव (Richest Village In The World) की जानकारी देते हैं। जी हां, आपको जानकर हैरानी होगी कि गुजरात (Gujarat) के कच्छ जिले (Kutch District) के माधापार (Madhapar) में लगभग 7600 घर और 17 बैंक हैं और इन घरों के मालिक ज्यादातर यूके, यूएसए, कनाडा और दुनिया के कई अन्य हिस्सों में रहते हैं।
कच्छ जिले में इस महारत की दौड़ से संबंधित कुल 18 गांव हैं। ये 18 गांव निर्माण श्रमिकों, स्वामी, मजदूरों और सिविल इंजीनियरों से भरे हुए हैं। इन 18 गांवों के लोग गुजरात, पड़ोसी जिलों और विदेशों में निर्माण कार्य का नेतृत्व कर रहे हैं। माधापार गांव उनमें से एक है। जी हां कस्बे में 17 बैंक हैं, जहां कुल 7600 परिवार रहते हैं। हर 447 घरों में औसतन 1 बैंक है।
Madhapar village in Kutch district established by the mistris of Kutch is the richest village in the world with 5000 crore deposit in 17 banks.
30000 people live in 7600 houses. It’s citizens may be more affluent than half the population of major towns & cities of India.
— Rajesh Kankipati (@road2rajesh) August 10, 2021
अकेले इन ग्रामीणों के पास इन बैंकों में कुल 5,000 करोड़ रुपये हैं। हाँ अकेले इन 7600 परिवारों की कुल बचत 5000 करोड़ रुपये है। औसतन प्रत्येक परिवार के पास बैंक में 65 लाख रुपये तक है। यह एक औसत खाता है। कुछ परिवारों के पास कम और कुछ परिवारों के पास बैंक में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
गांव में 17 बैंकों की शाखाएं, हर घर में एनआरआई
कृषि क्षेत्र की समृद्धि में एक बड़ी भूमिका निभाती है, और अधिकांश कृषि सामान मुंबई को निर्यात किया जाता है। वैसे तो लोग विदेश में रहते हैं, लेकिन करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि वाले गांवों के बैंकों में अपना पैसा जमा करना पसंद करते हैं।
बैंकों की शाखाओं में जमा हैं ग्रामीणों के 5000 करोड़
सबसे अहम बात यह कि गांव में अलग—अलग बैंकों की कुल 17 शाखाएं खुली हुईं हैं और इन शाखाओं में गांववालों के कुल 5000 करोड़ से भी ज्यादा की रकम जमा है। आमतौर पर यहां के लोग भारत के दूसरे शहरों में जाने की तुलना में लंदन, कनाडा, अमेरिका, केन्या, यूगांडा, मोजांबिक, दक्षिण अफ्रीका और तंजानिया तथा केन्या जाना ज्यादा पसंद करते हैं। इसका कारण यह है कि उनके पूर्वज इन्हीं देशों में यहां से गए, कारोबार किया और आज भी उनका कारोबार विदेशों में भी संचालित है।
स्विमिंग पूल, शॉपिंग मॉल समेत कई हाईटेक सुविधाएं
स्कूल-कॉलेजों के अलावा यहां एक अत्याधुनिक गौशाला भी है गाँव। मंदिरों और खेल के मैदानों के अलावा विश्व स्तरीय सुविधाओं वाला एक स्वास्थ्य केंद्र भी है। नई झीलों, बांधों और गहरे बोर वाले आर्टिसियन कुओं के साथ पूरे साल ताजा पानी रहता है।
ગુજરાતમાં આવેલું છે વિશ્વનું સૌથી શ્રીમંત ગામ, જાણો…https://t.co/rZv7MmcxIw #Kutch #Madhapar #NRI #Gujarat #Richest #Village #Deposits #chitralekha pic.twitter.com/KRmpTVldG9
— chitralekha (@chitralekhamag) August 9, 2021
कारोबार गांव के प्रत्येक घर में से कम से कम 2 लोग विदेश में रहते हैं, जबकि बाकी कृषि और अन्य रोजगार गांव में ही करते हैं। यहां का अधिकांश कृषि उत्पाद मुंबई को निर्यात किया जाता है। यह भी रोचक बात है कि इस गांव में किसी ने आज तक अपना खेत नहीं बेचा। गांव में अत्याधुनिक गौशाला और अपना कम्युनिटी हॉल भी है। गांव के पोस्ट ऑफिस में 200 करोड़ रुपए की फिक्स डिपाजिट है।
कैसे बना समृद्ध
लंदन 1968 में माधापर विलेज एसोसिएशन (Madhapar Village Association) नामक एक संगठन का गठन किया गया था। दफ्तर इसलिए खोला गया, ताकि माधापार गांव (Madhapar Village) के लोग आपस में मिलें। इसी तरह गांव में एक कार्यालय खोला गया है, ताकि लंदन से सीधा संपर्क बना रह सके। यह यूके में रहने वाले गांव के लोगों को एक करीबी समुदाय बनाने और संस्कृति और मूल्यों को जीवित रखने में भी मदद करता है।



