एक एक्सपेरिमेंट में वैज्ञानिक कटोरी में इंसानी दिमाग बना रहे थे, उसमे दो आंखें उभर आई: आश्चर्य

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human brain Eyes
Scientists shocked as blob of human brain grows functioning eyes in lab dish. Scientists were growing human brains in a bowl, suddenly two eyes grew during the experiment

Photo Credits: Twitter Post

Delhi/Germany: आज के समय में विज्ञान (Science) इतनी आगे आ चुका है की आप अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते है। आज विज्ञान और डॉक्टर्स मानव अंग भी आर्टिफिशल बनाने लगे हैं। जिसके बारे में किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी, वह आज संभव है। अभी भी वैज्ञानिक (Scientists) लगातार नई खोज करने में अपना पूरा समय लगा रहे और दुनिया के हर कोने में अलग अलग लैब में खोज चल रही हैं।

मेडिकल साइंस की बात करें तो 21वीं सदी में मृत शरीर को जिंदा करने के अलावा लगभग हर चीज संभव है। अभी इस कार्य में लगातार और नए रिसर्च सामने आ रहे हैं, हाल ही में वैज्ञानिकों ने इंसानी दिमाग (Human Brain) तैयार करने का प्रयास किया है।

पूरी दुनिया के वैज्ञानिक ऐसी चीजों को खोजने और बनाने में लगे हैं, जिससे नई क्रांति लाई जा सके, परन्तु कई बार इन प्रयोगों का रिजल्ट कुछ और ही निकल कर सामने आ जाता है। ऐसा ही कुछ जर्मनी के वैज्ञानिकों (Germany Scientists) के साथ उस समय हुआ, जब वह मिनी ब्रेन (Mini Brain) उगाने की कोशिश कर रहे थे।

हालांकि वह काफी हद तक इस कोशिश में सफल भी रहे, फिर इसके बाद आखिर में जो चीज रिजल्ट के रूप में देखी, उसने सभी को हैरान कर दिया। विदेशी मीडिया में इस खबर को जानकर लोग हैरान रह गए की जिस मिनी ब्रेन को वैज्ञानिकों ने तैयार किया, उसमें आंखें (Functioning eyes in lab dish) भी निकल आई।

जर्मनी की यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल डुसेलडॉर्फ के वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च (Germany Scientists Research) की रिपोर्ट में बताया कि लैब में उनके द्वारा उगाए जा रहे मिनी ब्रेन में आंखें भी उगने लगी थीं। इस प्रयोग को वैज्ञानिक लैब की एक कटोरी में कर रहे थे, जिसकी तस्वीरें भी विदेशी मीडिया में सामने आई हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिक इसे अपनी बड़ी कामयाबी मान रहे हैं और इससे आंखों की बीमारी पर शोध करने का मन बना रहे है। रिपोर्ट में बताया गया है की यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल डुसेलडॉर्फ के न्यूरोसाइंटिस्ट जय गोपालकृष्णन का कहना है कि वैज्ञानिकों ने यह प्रयोग इंसानी दिमाग में होने वाली बीमारियों के इलाज के रूप में शुरू किया था।

फिर अचानक से इसमें आंखें उग आने से अब रिसर्च को ब्रेन और आंखों की बीमारियों के इलाज में क्रांति लाने के लिए शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि लैब में मिनी ब्रेन उगाने के लिए वैज्ञानिकों ने एडल्ट इंसान के स्टेम सेल्स का इस्तेमाल किया था।

जय गोपालकृष्णन ने विदेशी मीडिया में बताया कि लैब में मिनी ब्रेन को तैयार करने के लिए सही टेम्पेरेचर और जरूरी माहौल का ध्यान रखा गया था। गोपालकृष्णन बताते हैं कि स्टेम सेल्स में कई तरह के टिश्यू उगाने की क्षमता होती है, इस बार वैज्ञानिक इसकी सहायता से मिनी ब्रेन बनाने का प्रयास कर रहे थे। सामने आई आंखें 50 दिनों में साफ दिखाई देने लगी थीं। इसके उलट रिसर्च में तैयार हुए दिमाग में अब तक किसी भी प्रकार के इमोशंस और हरकत नहीं है, इसे डेवेलप करने में एक महीने का वक़्त लगा है।

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